केन्द्रीय ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज मंत्री डा. सी. पी. जोशी ने देश के समग्र विकास पर जोर देते हुए कहा है कि हमें गांव-गरीब का विकास करना है तभी सही मायने में भारत निर्माण की कल्पना साकार हो सकेगी।केन्द्रीय केबिनेट मंत्री बनने के बाद शनिवार को पहली बार उदयपुर आए डा. सी. पी. जोशी ने अपने अभूतपूर्व स्वागत के पश्चात यहां गांधी ग्राउण्ड में जनसभा को संबोधित करते हुए यह बात कही ।सी. पी. जोशी ने कहा कि गांव-गरीब का विकास कर हमें नए भारत का निर्माण करना है। इसके लिए पैसे की कहीं कोई कमी नहीं आने दी जाएगी।जोशी ने कहा कि गांव-गरीब का विकास तभी संभव हो पाएगा जब विकास की योजना के लिए आने वाले पैसे का सदुपयोग हो तथा वह सही हाथों में पहुंच पाएगा। इसके लिए सभी को सकारात्मक सोच पैदा करनी पड़ेगी।डा. जोशी ने जनता से भी आह्वान किया कि वे ऐसा वार्ड पंच, सरपंच, प्रधान चुने जो गांव-गरीब का विकास कर सके।आदिवासी क्षेत्रों के समग्र विकास पर बल देते हुए ग्रामीण विकास एवं पंचायती राजमंत्री डा. सी. पी. जोशी ने आदिवासियों का जीवन स्तर ऊंचा लठाने के लिए नए सिरे से नीतियां बनाने पर जोर देते हुए कहा कि ५ साल में आदिवासियों के कच्चे मकान की जगह पक्के मकान बन गए तो दिल को बड़ा सकून मिलेगा।नरेगा का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि हमारा प्रयास होगा कि अभी हमें २५० करोड़ मिल रहे है वे बढ़कर ४०० करोड़ हो जाए ।सभा को राज्य के जनजाति विकास मंत्री महेन्द्रजीत सिंह मालवीय, खेलमंत्री मांगीलाल गरासिया, सांसद रघुवीर मीणा, विधायक सज्जन कटारा, उदयलाल आंजना, सुरेन्द्र सिंह जाडावत, जिलाध्यक्ष डा. मधुसूदन शर्मा (शहर), छगनलाल जैन (देहात), कैलाश व्यास (भीलवाड़ा) ने भी संबोधित किया। संचालन विरेन्द्र वैष्णव ने किया। इस अवसर पर सांसद ताराचन्द भगोरा, गोपाल सिंह, विधायक पुष्कर डांगी, गजेन्द्र सिंह शक्तावत, दयाराम परमार, नगराज मीणा, गणेश सिंह परमार, जिला प्रमुख केवल चन्द लबाना सहित कई जनप्रतिनिधि, पार्टी पदाधिकारी व गणमान्य नागरिक उपस्थित थे।
Saturday, June 20, 2009
अपने विधायकों को संभालना
कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और पूर्व केन्द्रीय कपडा मंत्री शंकरसिंह वाघेला ने मुख्यमंत्री नरेन्द्र मोदी का नाम लिए बगैर चेतावनी दी है, "अब तुम अपने विधायकों को संभाल लेना।" वाघेला ने खजुराहो कांड दोहराने की चेतावनी भी दी है।वाघेला शनिवार को खेडा जिले के फागवेल स्थित भाथीजी मंदिर के नवनिर्माण के लिए आयोजित यज्ञ में नारियल चढाने के बाद विशाल सम्मेलन को सम्बोधित कर रहे थे। नारियल के चढावे के साथ ही वाघेला ने मोदी के खिलाफ बिगुल बजा दिया। उन्होंने घोषणा की कि अब वे हाथ पे हाथ धरे नहीं बैठे रहेंगे। वे गुजरात की राजनीति में सक्रिय होंगे। सात से ज्यादा विधायक सम्पर्क मेंहाल ही में सम्पन्न लोकसभा चुनाव में वाघेला पंचमहाल सीट से हार गए थे। उन्होंने उनकी हार के लिए भाजपा खासकर मोदी की साजिश को जिम्मेदार ठहराया था। उन्होंने कहा कि लोकसभा चुनाव में हार के बाद अब वे गुजरात की राजनीति में फिर सक्रिय होने जा रहे हैं। चुनाव में हार का यह मतलब नहीं है कि वे चुपचाप बैठ जाएंगे। वाघेला ने दावा किया कि भाजपा के 7 से अधिक विधायक उनके सम्पर्क में हैं। ऎसे में मोदी का नाम लिए बगैर उन्हें सावधान करते हुए वाघेला ने भाजपा विधायकों को संभाल के रखने और खजुराहो कांड दोहराने की चेतावनी भी दी।कानून-व्यवस्था चौपटमोदी के धुर विरोधी माने जाने वाले वाघेला ने राज्य सरकार को आडे हाथ लेते हुए कहा कि गुजरात में कानून-व्यवस्था चौपट हो चुकी है। मां-बहनें सुरक्षित नहीं हैं। सूरत-राजकोट में गैंगरेप की घटनाएं इसका प्रमाण हैं। उन्होंने गत चुनाव में भाजपा की ओर से लालकृष्ण आडवाणी को वेटिंग इन पीएम घोषित किए जाने पर व्यंग्य कसते हुए कहा कि प्रधानमंत्री पद रेलवे की कोई सीट नहीं है।
माओवादियों पर बरसा संघ
राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ ने लालगढ में माओवादियों के खिलाफ पश्चिम बंगाल की वाममोर्चा सरकार के सशस्त्र अभियान का समर्थन किया है। संघ ने माओवादियों को देश का दुश्मन करार देते हुए कहा कि उन्हें कुचल देना चाहिए। संघ के मुखपत्र आर्गेनाइजर ने छत्तीसगढ के पुलिस महानिदेशक विश्व रंगन को उद्धृत करते हुए कहा है कि माओवादी राज्य के प्रशासनिक तंत्र का मनोबल तोडना चाहते हैं ताकि वे नक्सली हिंसा को रोकने में पूरी तरह अक्षम हो जाएं।
माथुर खिसके, वसुंधरा नदारद
राष्ट्रीय कार्यकारिणी के पहले दिन तमाम राज्यों के भाजपा अध्यक्षों ने हार-जीत का लेखा जोखा रखा लेकिन राजस्थान प्रदेश अध्यक्ष रिपोर्टिग शुरू होने से पहले सभास्थल से रवाना हो गए। उन्होंने तर्क दिया कि वे अपना इस्तीफा सौंप चुके हैं इसलिए उनके रहने का कोई मतलब नहीं जबकि नेता प्रतिपक्ष और पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे सिंधिया को पूरे दिन निगाहें तलाशती रह गई लेकिन वे न दिखीं। पता चला कि वे विदेश में हैं लेकिन यहां नहीं आएंगी इस बारे में अधिकृत सूचना राज्य या केंद्र स्तर पर किसी के पास न थी। इतना ही नहीं चुनाव के संचालक रहे राष्ट्रीय कोषाध्यक्ष भी गैरमौजूद थे। माथुर के चले जाने के बाद संगठन सचिव प्रकाश चंद्र ने हार के कारणों के साथ रिपोर्ट पेश की। सूत्रों के अनुसार, संगठन सचिव ने यह कहकर निराशाजनक परिणामों का गम हल्का करने की कोशिश की कि विधानसभा चुनाव के मुकाबले पार्टी के मत प्रतिशत में बढोतरी हुई है। बावजूद इसके पराजय मिली जिसकी एक बडी वजह बसपा के वोट बैंक का कांग्रेस के खाते में चले जाना भी है। हार के तीन मुख्य बिंदु गिनाते प्रकाशचंद्र ने बताया कि लोकसभा चुनाव में पार्टी ने सात सांसदों को दोबारा मैदान में उतारा। यह गलत फैसला था क्योंकि क्षेत्र में इन सांसदों के खिलाफ हवा बह रही थी। कई सीटें परिसीमन के बाद बदले समीकरणों के कारण पार्टी के हाथ से निकल गई जबकि तीसरी वजह कार्यकर्ताओं में व्याप्त निराशा थी। विधानसभा चुनाव में मात खा चुके कार्यकर्ताओं में उत्साह का संचार करने के लिए ठोस कदम नहीं उठाए जा सके जिस कारण वे पूरे मन से नहीं जुटे।नतीजा उल्टा हो गया। पिछली बार चार सीटों पर सिमटी कांग्रेस ने अबकि बीस सीटें जीत लीं जबकि भाजपा 21 से खिसकर तीन पर पहुंच गई और एक सीट निर्दलीय की झोली में चली गई। कार्यकारिणी में प्रकाशचंद्र के अलावा राजस्थान भाजपा से गुलाब कटारिया, घनश्याम तिवाडी, कैलाश मेघवाल, किरण माहेश्वरी, जसकौर मीणा और मानवेंद्र सिंह शामिल हुए। मध्य प्रदेश की रिपोर्टिग नरेंद्र सिंह तोमर, गुजरात की पुरूषोत्तम रूपाला, दिल्ली की ओमप्रकाश कोहली, उत्तर प्रदेश की रामरमापति त्रिपाठी और उत्तराखंड की ब“ाी सिंह रावत ने की। तोमर ने कुछ सीटें हाथ से निकल जाने के बारे में सफाई दी कि प्रत्याशियों का अति आत्मविश्वास उन्हें ले डूबा। इसके अलावा हारी हुई सीटों में अधिकांश एससी-एसटी थीं जहां गोंडवाना पार्टी और बसपा फैक्टर भी कांग्रेस का मददगार साबित हुआ। रूपाला ने अच्छी बातें कहीं जबकि कोहली ने कहा मनमोहन सिंह को सिंह इस किंग के रूप में पेश करने से सिख भाजपा से दूर चले गए। जबर्दस्त खींचतान झेल रहे उत्तराखंड अध्यक्ष रावत ने सुझाव दिया कि बिहार फार्मूले की तर्ज पर गुप्त मतदान कराकर राज्य में मुख्यमंत्री का विवाद निपटाया जाए।
नहीं होगा संशोधन
गुजरात के मुख्यमंत्री नरेन्द्र मोदी और केन्द्र सरकार एक बार फिर आमने-सामने आ गए हैं। गुजकोका लौटाने के फैसले से खफा मोदी ने संशोधन मानने से सीधे इनकार कर दिया है। उन्होंने दो टूक लहजे में कहा, विधेयक मकोका जैसा है। केन्द्र ने उसे वापस करने के लिए बदलाव का बहाना लिया है। शनिवार को दिल्ली में कदम रखते ही मोदी ने पहला प्रहार केंद्र पर किया। गुजरात संगठित अपराध नियंत्रण कानून (गुजकोका) को पांच साल दबाकर रखने के बाद उसमें संशोधन का सुझाव दिए जाने पर आश्चर्य प्रकट करते हुए बोले कि केन्द्र को तीन आपत्ति ढूंढने में इतने साल लग गए। मोदी ने गुजकोका विधेयक को सही ठहराया और कहा कि वह महाराष्ट्र के मकोका की तरह ही है, लेकिन सरकार की मंशा ठीक नहीं होने के कारण उसे कानून का रूप देने में अडचन पैदा की जा रही है। उन्होंने केन्द्र सरकार के सुझाए गए संशोधन को यह कहते हुए मानने से इनकार कर दिया कि उसमें बदलाव कर दिए जाने से वह दंतविहीन और नखविहीन हो जाएगा। मोदी ने कहा कि आवश्यकता पडने पर गुजरात सरकार गुजकोका विधेयक को राज्य विधानसभा में फिर पेश करेगी। गुजकोका विधेयक को राज्य विधानसभा ने संगठित अपराध से निपटने के बारे में केंद्र सरकार के दिशानिर्देशों के आधार पर तैयार किया था। मालूम हो कि शुक्रवार को केन्द्रीय मंत्रिमंडल ने 2004 से लंबित गुजकोका विधेयक में खामी बताते हुए उसे वापस लौटाने की सिफारिश करने का फैसला लिया है।
Friday, June 19, 2009
कोश्यारी ने इस्तीफा वापस लिया
बुधवार को राज्यसभा की सदस्यता से इस्तीफा देने वाले बीजेपी के उत्तराखंड से वरिष्ठ नेता भगत सिंह कोश्यारी ने पार्टी नेतृत्व के निर्देश पर शुक्रवार अपना इस्तीफा वापस ले लिया। कोश्यारी ने इस्तीफा वापस लेने के लिए उपराष्ट्रपति और राज्यसभा के सभापति हामिद अंसारी से मुलाकात की। उनके साथ बीजेपी उपाध्यक्ष मुख्तार अब्बास नकवी भी थे। नकवी ने संवाददाताओं को बताया कि कोश्यारी ने उप राष्ट्रपति से मुलाकात कर उन्हें अपना इस्तीफा वापस लेने के फैसले से अवगत कराया और आग्रह किया कि वह उनका इस्तीफा वापस कर दें। अंसारी ने परंपरा के अनुरूप कोश्यारी को मुलाकात के लिए बुलाया था। किसी सांसद का इस्तीफा राज्यसभा के सभापति के साथ बैठक के बाद ही मंजूर किया जाता है। कोश्यारी और भाजपा अध्यक्ष राजनाथ सिंह के बीच हुई बैठक में सिंह ने कोश्यारी को इस्तीफा वापस लेने के लिए राजी कर लिया था। उत्तराखंड के मुख्यमंत्री भुवनचंद खंडूरी को हटाने का दबाव बनाने के लिए कोश्यारी ने बुधवार को राज्यसभा की सदस्यता से इस्तीफा दे दिया था।
घुमाकर नहीं, सीधे आऊंगा राजनीति में: आदित्य ठाकरे
उनका विषय है राजनीति विज्ञान, फिर भी आदित्य ठाकरे का दावा है कि वे राजनेताओं के लाडलों वाला ड्रीम शेयर नहीं करते। बल्कि अपने एनजीओ 'ड्रीम वी शेयर' को वे छात्र आंदोलन से जोड़ने का वादा करते हैं। पर लोग हैं कि उनके इस कदम को हर तरह से विधानसभा चुनाव से पहले युवाओं को शिवसेना की तरफ खींचने के प्रयासों से ही जोड़कर देख रहे हैं। पहले कविताएं लिखकर और फिर पिता शिवसेना कार्याध्यक्ष उद्धव ठाकरे के साथ चुनावी सभाओं में जाकर वे पहले ही दर्शा चुके हैं कि लाइमलाइट उन्हें पसंद है। महज 19 साल की उम्र में वे जिस बेबाकी से मीडिया से बात करते दिखे, इससे भी साफ होता है कि वे पूरी तैयारी से मैदान में उतरे हैं। हां मैं बड़ा हो गया हूं। कॉलिज में (सेंट जेवियर्स) आ गया हूं तो बाल भी बड़े रख लिए हैं, दाढ़ी भी आ गई है। कुछ कविताएं लिखी हैं तो कुछ अधूरी पड़ी हैं। अलबम तो पता नहीं कब आएगा। एक दिन मैं अल्टामाउंट रोड से बांद्रा जा रहा था कि ट्रैफिक में बुरी तरह फंस गया। उसी वक्त लगा कि यह दिक्कत तो हर मुम्बईकर झेल रहा है। ऐसी ही और भी समस्याएं हैं। दोस्तों से चर्चा की, तो सबने माना कि शहर में समस्याएं हैं और यहां रहना है, तो हमें ही इसका ख्याल भी रखना होगा। शायना जी से इस बारे में बात हुई, तो उन्होंने भी हां कर दी। और अब हम 'आई लव मुम्बई' के साथ मिलकर काम कर रहे हैं। मैं कुछ कहना नहीं चाहता। बस युवाओं से आग्रह करूंगा कि अपने बिजी शेड्यूल से थोड़ा वक्त निकालकर शहर के लिए कुछ करें। ग्लोबल वार्मिंग और शंघाई जैसी बड़ी बातें करने के बजाय खुद पेड़ लगाएं, शहर को साफ रखें और ट्रैफिक नियमों का पालन करें। बातें छोटी हैं, पर इसी से शहर बेहतर होगा। वे सब सपोर्टिव हैं। उनके गाइडंस से ही हमने कॉलिज स्टूडंट्स के बीच जाकर सेमिनार किए और इस मुहिम से जोड़ना शुरू किया। प्लीज इसमें राजनीति को मत देखिए। मुझे राजनीति में आना होगा, तो सीधे आऊंगा। मुझे छिपकर या बाईपास से आने की क्या जरूरत है! पता नहीं। माता-पिता कहते हैं कि यह क्षेत्र संघर्ष का है, अगर आना है तो सोच-समझकर आना। अभी तो 19 साल का हूं। शहर के लिए कुछ करना चाहता हूं। आगे क्या करूंगा अभी सोचा नहीं है।
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