संसद सत्र से ठीक पहले केंद्र सरकार ने पेट्रोल और डीजल के दाम बढ़ाकर विपक्ष के हाथों एक और मुद्दा थमा दिया है। भाजपा और राजग के अन्य घटक दल शिक्षा क्षेत्र में मानव संसाधन विकास मंत्री कपिल सिब्बल के प्रस्तावित सुधारों पर संसद में सरकार को घेरने का मन बना चुके हैं। अब पेट्रो पदार्थो की कीमतों में की गई बढ़ोतरी पर भी हंगामे के आसार हैं।
Thursday, July 2, 2009
दाम बढ़ाकर विपक्ष के हाथों मुद्दा थमा दिया
संसद सत्र से ठीक पहले केंद्र सरकार ने पेट्रोल और डीजल के दाम बढ़ाकर विपक्ष के हाथों एक और मुद्दा थमा दिया है। भाजपा और राजग के अन्य घटक दल शिक्षा क्षेत्र में मानव संसाधन विकास मंत्री कपिल सिब्बल के प्रस्तावित सुधारों पर संसद में सरकार को घेरने का मन बना चुके हैं। अब पेट्रो पदार्थो की कीमतों में की गई बढ़ोतरी पर भी हंगामे के आसार हैं।
कश्मीर में छोटी-छोटी बातों का बवंडर बनता हैः चिदंबरम
गृहमंत्री पी. चिदंबरम ने बारामूला में केंद्रीय रिजर्व पुलिस फोर्स (सीआरपीएफ) को पुलिस ड्यूटी से हटाए जाने को उचित बताया है। उनका कहना है कि हमारा शुरू से ही यह मत है कि राज्य पुलिस को अपनी मुख्य भूमिका निभानी चाहिए। केंद्रीय सुरक्षा बल उसकी मदद के लिए है और उन्हें वही भूमिका निभानी चाहिए। दुबारा गृहमंत्री बनने के बाद अपना पहला मासिक रिपोर्ट कार्ड पेश करते हुए चिदंबरम ने माना कि कश्मीर की हालत नाजुक है। उन्होंने बारामूला की घटना का उल्लेख करते हुए कहा कि राज्य सरकार ने जो कदम उठाए है वे ठीक हैं। साथ ही उन्होंने कहा कि कश्मीर में छोटी-छोटी बातों का बवंडर बना दिया जाता है। वहां लोग अलग-अलग उद्देश्य को लेकर काम कर रहे है। ऐसे हालात में बहुत ही सावधानी से कदम उठाने की जरूरत है। एक सवाल के जवाब में उन्होंने कहा कि बारामूला में सीआरपीएफ को पुलिस ड्यूटी से हटाने का फैसला राज्य सरकार ने किया है। इसमें हम तो शुरू से ही इस बात के पक्षधर है कि केंद्रीय पुलिस बल राज्यों में सिर्फ सहयोगी की भूमिका निभाएं। मुख्य भूमिका राज्य पुलिस की ही रहे। सशस्त्र सेना विशेष अधिकार कानून की समीक्षा से जुड़े एक प्रश्न पर गृहमंत्री ने कहा कि हम समीक्षा कर रहे हैं। इस संबंध में अलग-अलग संगठनों और लोगों की राय और सिफारिशें गृह मंत्रालय को मिलती रही हैं। हम सभी पर विचार करेंगे। इस बारे में अभी कोई फैसला नहीं हुआ है। समलैगिंकता कानून पर सरकार की स्थिति के बारे में गृहमंत्री का कहना था कि तीन मंत्रियों की समिति बनी है। वह इस बारे में विचार करेगी जहां तक गृह मंत्रालय द्वारा हाईकोर्ट में दिए गए हलफनामे का सवाल है वह अपनी जगह है। लेकिन अब नई सरकार बनी है, नए मंत्री हैं। इसलिए उनकी राय अलग हो सकती है। एक अन्य सवाल पर उन्होंने कहा कि देश की सुरक्षा जरूरतों को पूरा करने के लिए गृह मंत्रालय ने एक कार्य योजना तैयार की है।
कश्मीर में छोटी-छोटी बातों का बवंडर बनता हैः चिदंबरम
गृहमंत्री पी. चिदंबरम ने बारामूला में केंद्रीय रिजर्व पुलिस फोर्स (सीआरपीएफ) को पुलिस ड्यूटी से हटाए जाने को उचित बताया है। उनका कहना है कि हमारा शुरू से ही यह मत है कि राज्य पुलिस को अपनी मुख्य भूमिका निभानी चाहिए। केंद्रीय सुरक्षा बल उसकी मदद के लिए है और उन्हें वही भूमिका निभानी चाहिए। दुबारा गृहमंत्री बनने के बाद अपना पहला मासिक रिपोर्ट कार्ड पेश करते हुए चिदंबरम ने माना कि कश्मीर की हालत नाजुक है। उन्होंने बारामूला की घटना का उल्लेख करते हुए कहा कि राज्य सरकार ने जो कदम उठाए है वे ठीक हैं। साथ ही उन्होंने कहा कि कश्मीर में छोटी-छोटी बातों का बवंडर बना दिया जाता है। वहां लोग अलग-अलग उद्देश्य को लेकर काम कर रहे है। ऐसे हालात में बहुत ही सावधानी से कदम उठाने की जरूरत है। एक सवाल के जवाब में उन्होंने कहा कि बारामूला में सीआरपीएफ को पुलिस ड्यूटी से हटाने का फैसला राज्य सरकार ने किया है। इसमें हम तो शुरू से ही इस बात के पक्षधर है कि केंद्रीय पुलिस बल राज्यों में सिर्फ सहयोगी की भूमिका निभाएं। मुख्य भूमिका राज्य पुलिस की ही रहे। सशस्त्र सेना विशेष अधिकार कानून की समीक्षा से जुड़े एक प्रश्न पर गृहमंत्री ने कहा कि हम समीक्षा कर रहे हैं। इस संबंध में अलग-अलग संगठनों और लोगों की राय और सिफारिशें गृह मंत्रालय को मिलती रही हैं। हम सभी पर विचार करेंगे। इस बारे में अभी कोई फैसला नहीं हुआ है। समलैगिंकता कानून पर सरकार की स्थिति के बारे में गृहमंत्री का कहना था कि तीन मंत्रियों की समिति बनी है। वह इस बारे में विचार करेगी जहां तक गृह मंत्रालय द्वारा हाईकोर्ट में दिए गए हलफनामे का सवाल है वह अपनी जगह है। लेकिन अब नई सरकार बनी है, नए मंत्री हैं। इसलिए उनकी राय अलग हो सकती है। एक अन्य सवाल पर उन्होंने कहा कि देश की सुरक्षा जरूरतों को पूरा करने के लिए गृह मंत्रालय ने एक कार्य योजना तैयार की है।
इलाहाबाद हाई कोर्ट ने मांगा जवाब
मायावती का दलित नेताओं की मूर्ति लगाने का मोह अब उन्हें ही परेशानी पैदा कर रहा है। सुप्रीम कोर्ट के बाद अब इलाहाबाद हाई कोर्ट की लखनऊ बेंच ने भी राज्य सरकार को 9 जुलाई तक अपना जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया है। हाई कोर्ट बेंच के जस्टिस राजीव शर्मा एवं जस्टिस सतीश चंद्र ने इस मामले की अगली सुनवाई के लिए 10 जुलाई की तारीख तय की है। यूपी के ऐड्वकेट जनरल रह चुके और राज्यसभा के सदस्य वीरेंद्र भाटिया ने जनहित याचिका दाखिल करने वाले रिटायर्ड कर्नल सत्यवीर सिंह यादव की ओर से बहस करते हुए कहा कि माया सरकार ने साल 2005 के हाई कोर्ट के आदेश का उल्लंघन किया है। इसमें कोर्ट ने लखनऊ के चौराहों में मूर्तियों की स्थापना को लेकर आदेश दिया था। भाटिया ने कहा कि हाई कोर्ट ने तीन फुट से ऊपर की मूर्तियों को नहीं लगाने का साफ आदेश दिया था पर इसका पालन नहीं हुआ। बोलगा तो : वाह जी वाह ! शायद , मायावती की बातों का लब्बोलुआब यही है कि , चलो मिलजुलकर जनता को लूटें ! जो तुमने किया , अब मैं भी वही कर रही हूं। न तुम मुझपर सवाल उठाओ न मैं तुम्हारे फैसलों पर अंगुली उठाऊंगी। ऐसा लगता है कि भारत की जनता सिर्फ थप्पड़ खाने के लिए है। कभी सांसद का थप्पड़ , कभी जनता के पैसों से बनी संगमरमर की मूर्तियों का थप्पड़। तो कभी महंगे पेट्रॉल - डीजल का झन्नाटेदार थप्पड़। खाए जाओ , खाए जाओ , सरकार के गुण गाए जाओ ...
तुमने राजघाट बनवाया, मैंने अपनी मूर्तियां...
स्मारकों और मूर्तियों पर खर्च को लेकर लगातार आलोचनाओं से यूपी की सीएम मायावती बौखला गई हैं। माया ने कांग्रेस पर पलटवार करते हुए सलाह दी कि जिनके घर शीशे के होते हैं उन्हें दूसरे के घर पर पत्थर नहीं फेंकने चाहिए। मायावती ने चिदंबरम को अपने आरोप के टारगिट पर लेते हुए कांग्रेस से सवाल किया कि रक्षा बजट कुछ कम कर देने से देश में हजारों स्कूल - कॉलिज खुल जाते। मायावती ने ऑम्बेडकर - कांशीराम पार्कों , स्मारकों व मूर्तियों के निर्माण पर हुए खर्च को नाममात्र बताते हुए कहा कि लखनऊ के ये सभी स्थल देश - विदेश के दलितों के लिए तीर्थस्थल से कम नहीं होंगे। दिल्ली में राजघाट स्थित समाधि स्थल पर जो भारी - भरकम रकम खर्च हुई है , उसके मुकाबले लखनऊ में कुछ भी खर्च नहीं हुआ। उन्होंने कहा कि इनकी टूरिस्ट स्पॉट के तौर पर पब्लिसिटी की जाएगी। उन्होंने कहा कि लखनऊ में बने पार्क - स्मारकों और समाधि स्थलों पर अभी एंट्री फ्री है पर अगले छह माह बाद इससे होने वाली आय को मलिन बस्तियों और इसी तरह के दलित उत्थान कार्य में लगाया जाएगा। पर्यटन विभाग अब लखनऊ के नवनिर्मित पार्कों - स्मारकों एवं मूर्तियों को प्रचार अभियान में शामिल कर इस स्थल को दुनियाभर में पहचान दिलाएगा। पब्लिसिटी के तहत कई भाषाओं में दलित संतों - महात्माओं और राजपुरुषों की जीवनी इलेक्ट्रॉनिक व प्रिंट मीडिया के जरिए से दिखाई जाएगी।
सिब्बल के सुधारों पर लामबंद
राजग सरकारों के तेवर बता रहे हैं कि मानव संसाधन विकास मंत्री कपिल सिब्बल के लिए शिक्षा क्षेत्र में प्रस्तावित सुधारों पर अमल आसान न होगा। पूर्व मानव संसाधन विकास मंत्री मुरली मनोहर जोशी की पहल पर बुधवार को विपक्षी राज्यों के शिक्षा मंत्रियों की बैठक हुई जिसमें राजग संयोजक शरद यादव और लोकसभा में उपनेता प्रतिपक्ष सुषमा स्वराज भी मौजूद थीं।जोशी के अनुसार, बैठक में आए शिक्षा मंत्री एक बोर्ड और एक पाठयक्रम के सिब्बल के सुझाव से कतई सहमत नहीं। इस बात पर भी कड़ी आपत्ति दर्ज कराई गई कि शिक्षा के समवर्ती सूची का विषय होने के बावजूद केंद्र की तरफ से प्रस्तावित सुधारों के बारे में न तो उनसे बात की गई और न ही कोई मसौदा भेजा गया।जोशी के बुलावे पर मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, हिमाचल प्रदेश के शिक्षा मंत्री बैठक में आए जबकि गुजरात और बिहार में चल रहे विधानसभा सत्र के कारण इनके मंत्री शामिल नहीं हो सके किन्तु सबने अपनी राय भेजी है। इस बात पर सहमति बनी कि सरकार बाकायदा सुधारों पर रोडमैप बनाए। राजनीतिक दलों, राज्य सरकारों, शिक्षाविदों और विश्वविद्यालयों के कुलपतियों से विस्तृत चर्चा व गहन अध्ययन के बाद ही कोई कदम उठाया जाए। राजग सरकारों के शिक्षा मंत्रियों ने एक मत से कहा कि शिक्षा सबके लिए सुलक्ष और कम खर्चीली होने के साथ वर्तमान युग के अनुरूप भी होनी चाहिए लेकिन उसमें सुधार का मतलब पाठयक्रम व परीक्षा में सुधार नहीं हो सकता। जरूरत अध्यापन स्तर और अध्यापकों की गुणवत्ता को सुधारने की है। अध्यापकों की उपलब्धता सुनिश्चित करना भी एक बड़ा मसला है।परीक्षा से होने वाले तनाव को दूर करने पर जोर दे रहे केंद्रीय मंत्री को समझना होगा कि सिर्फ परीक्षा से तनाव पैदा नहीं होता। इसके लिए व्यवस्थागत कमजोरियां और उ“ा शिक्षा के अवसरों की कमी भी जिम्मेदार है। शिक्षा क्षेत्र में सुधार सौ दिन या एक साल में नहीं हो सकता। यह दशकों का काम है। सिब्बल जब तक सुधारों का खाका तैयार नहीं कर लेते तब तक हर बात बेमानी है। राजग का मानना है कि पहले प्राथमिक और माध्यमिक शिक्षा में सुधार करना चाहिए। उसका यह वादा भी है कि सरकार कोई कारगर योजना सामने रखती है तो विपक्षी गठबन्धन पूरा सहयोग करेगा। सिब्बल अभी सिर्फ हवा में बातें कर रहे हैं। यही कारण है कि कांग्रेसी सरकारों राजस्थान, महाराष्ट्र, केरल के अलावा उड़ीसा और पश्चिम बंगाल ने भी केंद्र सरकार को आपत्ति दर्ज कराते हुए नोट भेजा है।
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