Friday, August 7, 2009

मुनाफे में शाही रेल-काक

भारतीय रेल और राजस्थान पर्यटन के संयुक्त सहयोग से चलाई जा रही राजस्थान की शाही रेल "पैलेस ऑन व्हील्स" को राजस्थान की पर्यटन मंत्री बीना काक ने बुधवार सायं हरी झंडी दिखाकर दिल्ली के सफदरजंग स्टेशन से रवाना किया। इस दौरान उन्होंने बताया कि राजस्थान में पर्यटकों को आकर्षित करने के लिए नए पर्यटन सर्किटों का विकास किया जाएगा। विशेषकर हाड़ौती सर्किट एवं शेखावटी सर्किट में कोटा, झालावाड़, बूंदी आदि क्षेत्रों की हवेलियों आदि पर विशेष ध्यान दिया जाएगा।काक ने बताया कि पैलेस ऑन व्हील्स देश की एकमात्र पहली ऎसी शाही रेलगाड़ी है जो मुनाफे में चल रही है। पर्यटकों में सफर का उत्साह बढ़ाने के लिए इस लग्जरी गाड़ी का किराया कम करने के लिए रेल मंत्रालय से गुहार की जा रही है। पर्यटकों के लिए वाई-फाई सिस्टम, लाइब्रेरी, पार्लर आदि की सुविधा उपलब्ध करवाने के प्रयास किए जाएंगे।राजस्थान पर्यटन विकास निगम के अध्यक्ष एवं प्रबंध निदेशक डॉ. मंजीत सिंह ने कहा कि टे्रन में यात्रियों को बेहतर सुविधाएं प्रदान करने के लिए इसमें इंटरनेट की सुविधा शुरू की गई है। इसके अतिरिक्त ट्रेन की आंतरिक सज्जा के लिए कई तरह के बदलाव किए गए हैं।राजस्थान पर्यटन विकास निगम के महाप्रबंधक जे.पी. पाठक ने बताया कि टे्रन दिल्ली से जयपुर, सवाईमाधोपुर, चित्तौड़गढ़, उदयपुर, जैसलमेर, जोधपुर, भरतपुर, आगरा होते हुए अपनी साप्ताहिक यात्रा पूरी करके दिल्ली लौटेगी। उन्होंने बताया कि ऑफ सीजन में टे्रन का किराया 370 डॉलर प्रति व्यक्ति प्रति रात्रि है तथा सितम्बर माह में अपने नियमित यात्रा के दौरान इस टे्रन का किराया 500 डॉलर प्रति व्यक्ति प्रति रात्रि रखा गया है। पैलेस ऑन व्हील्स के महाप्रबंधक प्रमोद शर्मा ने बताया कि शाही रेलगाड़ी की इस पहली यात्रा में कुल 34 पर्यटक रवाना हुए हैं। जिसमें भारत के अतिरिक्त अमरीका, ब्रिटेन, फ्रांस, कनाडा के कई देशी-विदेशी पर्यटक शामिल हैं। शाही रेलगाड़ी इस सत्र की अपनी दूसरी यात्रा पर 26 अगस्त को रवाना होगी।

भूमाफियाओं के खिलाफ राहुल का फरमान

मप्र में हाउसिंग सोसायटियों और भूमाफिया की धोखाधड़ी के खिलाफ कांग्रेस मैदान में उतरेगी। पार्टी महासचिव राहुल गांधी ने प्रदेश इकाई को आम लोगों को ठगने वाले इन सफेदपोश गिरोहों के खिलाफ आंदोलन करने के लिए फरमान जारी किया है। पार्टी को लगता है कि ऎसी हालत में भी वह जनता के साथ खड़ी नहीं दिखेगी तो गलत संदेश जाएगा।इसी मंशा को लेकर पार्टी के कुछ नेता पिछले दिनो राहुल गांधी से मिले और उन्हें बताया कि किस प्रकार "पत्रिका" के एक के बाद एक खुलासों से लोग हाउसिंग सोसायटियों और भूमाफिया के खिलाफ सड़कों पर उतर रहे हैं। राहुल को बताया गया कि पार्टी को बिना देर किए जनता के साथ खड़ा दिखना चाहिए। आंदोलन का समय और स्वरूप प्रदेश कांग्रेस कमेटी ही तय करेगी।सरकार को घेरोप्रदेश कांग्रेस के प्रभारी महासचिव बीके हरिप्रसाद ने भूमाफियाओं के खिलाफ राहुल के निर्देशों की पुष्टि की। उन्होंने "पत्रिका" को बताया मप्र में जमीनों के गोरखधंधे की पूरी जानकारी आलाकमान को है। आंदोलन करना अनिवार्य है। पार्टी चाहती है कि प्रदेश इकाई भाजपा सरकार को जनता की अदालत में खड़ा करे।प्रदेश कांग्रेस बेखबर प्रदेश कांग्रेस कमेटी आलाकमान के निर्देश से बेखबर है। नेता कह रहे हैं कि भूमाफियाओं से उनके संबंध नहीं हैं, लेकिन आम आदमी के हित में कुछ नहीं कहना चाहते। प्रदेश अध्यक्ष सुरेश पचौरी ने "पत्रिका" के अभियान की प्रशंसा करते हुए कहा कि इसकी मंशा ठीक प्रतीत होती है। जरूरी है, इससे आम आदमी को न्याय दिलाया जाए।

Thursday, August 6, 2009

क्यों लड़ती, यूपी की महारानी

-'राहुल भैया से क्यों लड़ती, यूपी की महारानी है!' कांग्रेस महासचिव राहुल गांधी द्वारा बुंदेलखंड से किए विकास के वादे को पूरा करने में उत्तर प्रदेश की बीएसपी और मध्य प्रदेश की बीजेपी सरकार के अड़ंगा डालने से इस सूखाग्रस्त इलाके में कांग्रेस में नई जान आ गई है। बुंदेलखंड में 37 प्रतिशत दलित हैं। यूपी में दलित आबादी का सबसे बड़ा हिस्सा बुंदेलखंड में रहता है। यहां कांग्रेस के मजबूत होने का मतलब कांग्रेस का यूपी के दलितों में वापस अपनी जगह बनाना है। राहुल गुरुवार को यूपी कांग्रेस समन्वय समिति की बैठक में हिस्सा लेने लखनऊ जा रहे हैं। बैठक में राहुल द्वारा प्रस्तावित अंतर्राज्यीय बुंदेलखंड विकास प्राधिकरण की मांग को आगे बढ़ाने पर भी चर्चा की संभावना है। 1857 का पहला स्वतंत्रता संग्राम बुंदेलखंड की रियासत झांसी से शुरू हुआ था। अंग्रेज इस बात को कभी नहीं भूले। उन्होंने बुंदेलखंड को विकास से हमेशा दूर रखा। अभी दो साल पहले जब देश ने 1857 के पहले स्वतंत्रता संग्राम की 150वीं सालगिरह मनाई तो इस बात पर भी उठाया गया कि आजादी के आंदोलन के केंद्र रहे क्षेत्रों के विकास के लिए सरकारों को विशेष ध्यान देना चाहिए। मगर बुंदेलखंड के विकास का सवाल उठते ही जिस तरह उसका विरोध शुरू हुआ, उससे आक्रोशित केंद्रीय ग्रामीण विकास राज्यमंत्री और झांसी के सांसद प्रदीप जैन आदित्य कहते हैं कि क्या हमें अपने इलाके के विकास का सवाल उठाने का भी हक नहीं है? जैन ने कहा कि जब उत्तर प्रदेश और मध्य प्रदेश की सरकारें बुंदेलखंड की पीड़ा की अनदेखी कर रही थीं, तब राहुल गांधी ने बुंदेलखंड के गांव-गांव जाकर वहां के लोगों के दुख-दर्द बांटे। बहन मायावती को पत्थर की मूर्तियों से ज्यादा प्रेम है, हाड़-मांस के इंसानों की दुख-तकलीफों से नहीं। इसी साल लोकसभा चुनाव से पहले यूपी और एमपी के सांसदों ने दलीय सीमाओं से ऊपर उठकर प्रधानमंत्री से मिलकर 25 हजार करोड़ रुपये के बुंदेलखंड पैकिज और राष्ट्रीय आपदा घोषित करने की मांग की थी। लेकिन लोकसभा में यूपी से कांग्रेस की भारी जीत ने राजनीतिक दलों को चौकन्ना कर दिया। वे कांग्रेस के बुंदेलखंड विकास में राजनीति देखने लगे। बुंदेलखंड के कई दुर्भाग्य हैं। इनमें से सबसे बड़ा तो यह है कि वह अप्राकृतिक रूप से दो राज्यों में बंटा हुआ है। बुंदेलखंड के सात जिले - झांसी, चित्रकूट ,बांदा, हमीरपुर, महोबा, जालौन और ललितपुर यूपी में जबकि दतिया, टीकमगढ़, छतरपुर, पन्ना, सागर और दमोह मध्य प्रदेश में आते हैं। यहां कोई बड़ा उद्योग-धंधा नहीं है। 7 साल से लगातार सूखा पड़ रहा है। छोटे और सीमांत किसानों के पास जोत का रकबा भी धीरे-धीरे कम होकर 1.32 हेक्टेयर ही रह गया है। जबकि 1960-61 में यह 2.69 हेक्टेयर था। पिछले साल जनवरी में वहां गए केंद्रीय अध्ययन दल ने पाया कि पथरीले बुंदेलखंड की कृषि भूमि की उपजाऊ क्षमता भी पंजाब, हरियाणा और पश्चिमी उत्तर प्रदेश के मुकाबले केवल एक चौथाई है। NBT

विधानसभा चुनाव के लिए शिवसेना का फेस लिफ्टिंग

कांग्रेस, एनसीपी, बीजेपी के मुकाबले शिवसेना ने हर लिहाज से चुनाव के लिए खुद को तैयार कर लिया है। पार्टी के ढांचे में फेरबदल करने के बाद कार्याध्यक्ष उद्धव ठाकरे ने उसे टेक्नोसैवी बनाया है। अब वे शिवसेना को नया चेहरा देने के लिए सही और यंग उम्मीदवारों एवं पदाधिकारियों की गंभीरता से तलाश कर रहे हैं। लोकसभा चुनाव में महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना को मिली कामयाबी के कारण शिवसेना में असमंजस और कुछ हद तक हताशा का माहौल था पर शिवसेना भवन में जमा हो रही भीड़ का जोश देखकर यह कहना गलत नहीं होगा कि शिवसेना मनसे के फीवर से उबर चुकी है। राज ठाकरे की निकटतम साथी श्वेता परुलकर के शिवसेना में आ जाने से उसे सकारात्मक संकेत मिलने लगे हैं। जिन शिवसैनिकों में अब भी असमंजस है, ठाकरे यह याद दिलाकर उनमें जोश लाने की कोशिश कर रहे हैं कि लोकसभा में मुम्बई, ठाणे में भले शिवसेना को झटका लगा हो ग्रामीण इलाके में उसकी पकड़ बरकरार रही है। यह भी याद दिलाया जा रहा है कि शिवसेना को बीजेपी एवं एनसीपी से ज्यादा सीटें मिली है। लोकसभा में एनसीपी को नौ, बीजेपी को दस और शिवसेना को 11 सीटें मिली है। ग्रामीण क्षेत्र पर पकड़ कायम रखने के लिए ठाकरे ने विदर्भ, मराठवाड़ा और खानदेश का दौरा शुरू किया है। मुख्यमंत्री अशोक चव्हाण के नांदेड शहर में गत रविवार को उद्धव की विशाल सभा हुई। शिवसैनिकों में उत्साह लौटाने के लिए यह दौरा उपयुक्त साबित होने की चर्चा है।

हज यात्रियों का कोटा जारी करने की मांग

मुम्बई।। सेंट्रल हज कमेटी ने भारत सरकार के माध्यम से सऊदी अरब सरकार से हज के
लिए 15 हजार अतिरिक्त यात्रियों का कोटा जारी करने की मांग की है। सेंट्रल हज कमेटी के मुख्य कार्यकारी अधिकारी मोहम्मद ओवैस ने बताया कि इस वर्ष हज कमेटी से एक लाख 15 हजार हज यात्री हज के लिए जा रहे हैं जिसमें 11 हजार भारत सरकार के कोटे के तहत हैं। सरकार ने सऊदी सरकार से 15 हजार का अतिरिक्त कोटा जारी करने की मांग रखी है। इसके अलावा 45 हजार लोग निजी टूर आपरेटरों के माध्यम से हज यात्रा पर जा रहे हैं। हज कमेटी ने सभी हज यात्रियों से अपील की है कि अपने पासपोर्ट 31 अगस्त तक राज्य हज कमेटी के कार्यालय में कवर नंबर के साथ जमा करा दें। कमेटी के पास अब तक पासपोर्ट कार्यालय या हाजियों से 18 हजार पासपोर्ट आए हैं और लगभग 15 हजार राज्य हज कमेटी के पास जमा हुए हैं। हज की उड़ानें 20 अक्टूबर से शुरू होंगी। ओवैस ने यह भी स्पष्ट किया है कि हज कमेटी या सरकार ने हज यात्रियों पर आयु को लेकर कोई बंधन नहीं लगाया है। 12 साल से कम और 65 वर्ष से अधिक की आयु के नागरिक भी हज यात्रा पर जा सकते हैं।

हारे जिलों की होगी सार-संभाल

मप्र से राज्यसभा में चुनकर आए कप्तान सिंह सोलंकी यहां भी कप्तानी पारी खेलने की तैयारी में हैं। उनकी चली तो भाजपा के राज्यसभा सांसदों का "जिला बदल" हो सकता है। एक जिले में दो सांसदों की मेहरबानी का फार्मूला उन्हें रास नहीं आ रहा। वह ऎसी व्यवस्था चाहते हैं कि पार्टी के हर राज्यसभा सांसदों के हिस्से में वह क्षेत्र आए जहां हार का सामना करना पड़ा है। इसकी शुरूआत वह खुद करेंगे और इस कड़ी में भिण्ड, मंदसौर और खंडवा में से किसी एक क्षेत्र को गोद ले सकते हैं।अभी सब घालमेल चल रहा है। भाजपा के नौ राज्यसभा सांसद हैं और सभी अपनी मर्जी से क्षेत्र का चयन कर खर्च कर रहे हैं। ऎसे में कई संसदीय क्षेत्र में विकाश राशि की वर्षा हो रही है तो कई क्षेत्र सूखे पड़े हैं। इसमें ग्वालियर सबसे बड़ा अपवाद हैं, उसे तीन तरफ से पैसा मिल रहा है। लोकसभा सीट भाजपा के पास है, इस लिहाज से सांसद मद की वह राशि उसे मिल ही रही है। दूसरी ओर राज्यसभा सांसद माया सिंह और प्रभात झा भी अधिकतर राशि वहीं खर्च कर रहे हैं। ग्वालियर की तरह इन्दौर का हाल है। भाजपा सांसद सुमित्रा महाजन के अलावा इस क्षेत्र पर राज्यसभा सदस्य नारायण सिंह केशरी अपने मद का पैसा बरसा रहे हैं। छिंदवाड़ा को प्यारेलाल खंडेलवाल और अनुसुईया उइके ने गोद ले रखा है। बाकी बचे रघुनंदन शर्मा, विक्रम वर्मा वह भी अपने हिसाब से खर्च कर रहे हैं। कप्तान को यह नीति नहीं सुहा रही। मिल रहे संकेत इस व्यवस्था में बदलाव का इशारा कर रहे हैं। सूत्रों के अनुसार कप्तान की मंशा राज्यसभा सांसदों की हिस्सेदारी उन क्षेत्रों में बढ़ाने की है जहां कमजोर पड़ी पार्टी को मजबूती मिल सके।उन्होंने ऎसी रणनीति बनाई है जिसमें किसी के नानुकुर करने की कोई गुंजाइश नहीं रहेगी। इसकी शुरूआत वह खुद करेंगे और इसके लिए तीन ऎसे क्षेत्रों के नाम पर विचार-विमर्श हो गया है जहां पार्टी ने अपना आधार खोया है। भिण्ड उनका गृह क्षेत्र है, लेकिन भाजपा की सूची में वह नीचे है। दूसरी सीट मंदसौर है जो भाजपा का गढ़ मानी जाती थी, लेकिन इस बार हाथ से फिसल गई। तीसरी सीट खंडवा है जहां पार्टी को नए सिरे से काम करने की जरूरत महसूस की जा रही है। कप्तान की चली तो मप्र में राज्यसभा के भाजपा सांसदों की चल रही मनमर्जी पर पानी फिर सकता है।

आस्ट्रेलिया में भारतीय छात्रों को सुरक्षा मिलेगी : कृष्णा

आस्ट्रेलिया में भारतीय छात्रों पर जारी हमलों के बीच विदेश मंत्री एस. एम. कृष्णा ने सुरक्षा का आश्वासन दिया है। पांच दिवसीय आस्ट्रेलियाई दौरे पर आए कृष्णा ने कहा कि आस्ट्रेलिया में भारतीय छात्रों की सुरक्षा भारत सरकार की पहली प्राथमिकता है और केन्द्र इसके लिए प्रतिबद्ध है। केन्द्रीय मंत्री ने आस्ट्रेलिया में भारतीय छात्रों के संगठन (एफआईएसए) के सदस्यों के साथ बातचीत के दौरान यह बात कही। उल्लेखनीय है कि इन दिनों आस्टे्रलिया में भारतीय छात्रों पर नस्लीय हमले के मामले सामने आ रहे हैं। हालांकि, आस्ट्रेलियाई सरकार इन हमलों को नस्लभेद से प्रभावित नहीं मानती, लेकिन जिस तरह से आस्ट्रेलियाई विश्वविद्यालयों में पढ़ाई कर रहे भारतीय छात्रों को निशाना बनाया जा रहा है उससे यह साफ है कि भारतीय छात्र नस्लभेद का शिकार बन रहे हैं। आस्ट्रेलिया में 25 मई से 15 जुलाई के बीच 1583 भारतीयों को नस्लभेद का सामना करना पड़ा है। इनमें से अधिकतर भारतीय छात्र शामिल हैं। अमरीका के बाद (104522) आस्ट्रेलिया में ही सबसे अधिक लगभग 97035 भारतीय छात्र शिक्षा ग्रहण कर रहे हैं। इस बीच एफआईएसए ने भारतीय छात्रों की सुरक्षा सुनिश्चित करने की मांग करते हुए कहा है कि सरकार को भारतीय छात्रों के लिए आस्ट्रेलिया में आपातकाल की स्थिति में संकट केन्द्र की स्थापना करनी चाहिए। विदेश मंत्री एस एम कृष्णा आस्ट्रेलिया दौरे के दौरान भारतीय छात्रों की सुरक्षा सुनिश्चित करने का प्रयास करेंगे। कृष्णा के भारतीय छात्रों की सुरक्षा को लेकर आस्ट्रेलियाई विदेश मंत्री स्टीफन स्मिथ और प्रधानमंत्री केविन रूड से भी चर्चा करने की संभावना है।