Saturday, October 3, 2009

महिला उत्पीड़न के मामले बढ़े’

राष्ट्रीय महिला आयोग की अध्यक्ष डॉ. गिरिजा व्यास ने कहा कि मंहगाई व महिला उत्पीड़न के मामलों में बढ़ोतरी चिंताजनक है।

उन्होंने धारा 498 का उपयोग गंभीर प्रकरणों में ही किए जाने पर जोर दिया।

यहां शुक्रवार को पत्रकारों से उन्होंने कहा कि महंगाई बढ़ी है और इससे आम आदमी के साथ कांग्रेस व सरकार भी आहत है। इसके बावजूद देश की विकास दर को बढ़ाने में सरकार सफल रही है। महंगाई को रोकने के प्रयास किए जा रहे है।

उन्होंने कहा कि राजस्थान समेत देश में महिला उत्पीड़न के अपराधों में तेजी से इजाफा हो रहा है। सर्वाधिक मामले उत्तरप्रदेश में हैं, जहां महिला सुरक्षित नहीं है।

उन्होंने कहा कि महिला उत्पीड़न में घरेलू हिंसा एवं दहेज प्रताड़ना के मामले भी शामिल हैं। उनका कहना था कि दहेज प्रताड़ना संबंधी धारा 498 का उपयोग गंभीर मामलों में ही होना चाहिए, लेकिन ऐसा हो नहीं रहा है। नरेगा में कार्यदिवस बढ़ाने के सवाल पर उन्होंने कहा कि इसके लिए कानून में बदलाव लाना होगा, लेकिन सरकार अकाल राहत के माध्यम से लोगों को रोजगार उपलब्ध करा देगी। उन्होंने महिला विधेयक को परित कराने के लिए चलाए जा रहे आंदोलन पर भाजपा महिला मोर्चा को आड़े हाथों लिया।
उन्होंने कहा कि भाजपा को इतनी ही ंिचंता थी तो फिर एनडीए शासन में विधेयक की प्रतियां क्यों फाड़ी। पंचायत राज की सफलता को लेकर उन्होंने कहा कि इसके लिए पंचायत राज के जनप्रतिनिधि भी जिम्मेदार हैं।


Friday, October 2, 2009

माओवादियों ने नीतीश को जान से मारने की धमकी दी

प्रतिबंधित संगठन सीपीआई (माओवादी) के एक कथित सदस्य ने मोबाइल फोन पर एसएमएस भेजकर बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार को जान से मारने की धमकी दी है। राज्य के गृह सचिव आमिर सुबहानी ने बताया कि एक निजी टीवी न्यूज चैनल के एक पत्रकार के मोबाइल फोन पर डब्लू नाम के कथित नक्सली ने मोबाइल फोन संख्या 09308670993 से यह एसएमएस भेजा है। एसएमएस में लिखा है आपके सीएम की जान खतरे में हैं अगर उन्हें बचाना चाहते हैं तो हमारे दो नेता रवि जी और विरेन सिंह को जेल से रिहा कर दें। सुबहानी ने बताया कि मुख्यमंत्री की सुरक्षा व्यवस्था कडी कर दी गयी है और राज्य के पुलिस महानिदेशक आनंद शंकर और आईजी (ऑपरेशन)एस. के. भारद्वाज पूरे मामले की छानबीन कर रहे हैं। नैतिकता के आधार पर नीतीश इस्तीफा दें: पासवान लोकजनशक्ति पार्टी (एलजेपी) सुप्रीमो और पूर्व केंद्रीय मंत्री राम विलास पासवान ने बिहार के खगड़िया जिले में बीती रात अज्ञात व्यक्तियों द्वारा भूमि विवाद को लेकर 16 लोगों की गोली मारकर हत्या किए जाने की घटना के लिए राज्य सरकार को जिम्मेदार ठहराते हुए मुख्यमंत्री नीतीश कुमार से नैतिकता के आधार पर इस्तीफे की मांग की है। पासवान ने शुक्रवार को यहां कहा कि उस इलाके में भूमि विवाद सालों से चला आ रहा है और प्रदेश सरकार इस समस्या के समाधान के लिए संवेदनशील होती तो ऐसी घटना नहीं घटती।
उन्होंने इस घटना की पटना हाई कोर्ट के किसी सेवानिवृत्त न्यायधीश से जांच कराने और मृतकों के आश्रितों को सरकार की ओर से तुरंत दस-दस लाख रुपये मुआवजे के रूप में और एक-एक सदस्य को योग्यता के आधार पर सरकारी नौकरी दिए जाने की मांग की है। पासवान ने कहा कि इस तरह की घटना इस बात का परिचायक है कि प्रदेश में कानून-व्यवस्था की स्थिति बद से बदतर हो गयी है। ऐसे में प्रदेश के मुख्यमंत्री को सत्ता में बने रहने का कोई अधिकार नहीं है। प्रदेश के एलजेपी अध्यक्ष पशुपति कुमार पारस के साथ घटनास्थल के लिए रवाना होने से पूर्व पासवान ने इस घटना को कथित तौर पर सरकार प्रायोजित बताते हुए प्रदेश के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार पर महादलित के नाम पर समाज को बांटने का आरोप लगाया। इस बीच, राज्य के डीजी (पुलिस)आनंद शंकर और आईजी (ऑपरेशन) एस. के. भारद्वाज विशेष कार्य बल की दो टुकड़ी और बिहार सैन्य पुलिस बल के गोरखा बटालियन की एक टुकडी के साथ पटना से घटनास्थल के लिए रवाना हो गए हैं। राज्य के एडीजीपी (हेडक्वॉर्टर) नीलमणि ने बताया कि खगड़िया के जिलाधिकारी अभय कुमार और एसपी इंद्रानंद मिश्र घटनास्थल पर मौजूद हैं और अपराधियों की गिरफ्तारी के लिए छापेमारी जारी है। उन्होंने बताया कि भागलपुर के आईजी ए. आर. किन्नी भी घटनास्थल के लिए रवाना हो गए हैं। नीलमणि ने बताया कि इस घटना को अंजाम देने वाले वाले लोग प्रतिबंधित नक्सली संगठन सीपीआई (माओवादी) के प्रति सहानुभुति रखते हैं पर यह जांच के बाद स्पष्ट हो पाएगा कि इस घटना को अंजाम देने के लिए उन्होंने नक्सलियों की मदद ली है कि नहीं। अलौली के प्रखंड विकास पदाधिकारी सतीश चंद्र ने बताया कि मृतकों में 14 कुर्मी जाति और दो कुशवाहा जाति के हैं और उनका इस इलाके के मुसहर जाति के लोगों से लंबे समय से भूमि विवाद चला आ रहा था।

उम्मीदवारों पर हमले के बाद प्रशासन सख्त

राजधानी हरियाणा. चुनावी सभाओं व प्रत्याशियों के दौरे के दौरान हिंसक घटनाओं को चुनाव आयोग और प्रशासन ने गंभीरता से लिया है। इस बाबत खुफिया तंत्र को गांव-ढाणियों तक सक्रिय करने के साथ ही जिला निर्वाचन व पुलिस अफसरों को फिर से निर्देश दिए गए हैं। राज्य में सुशील इंदौरा, रघुबीर कादियान और रामकुमार गौतम सहित कई प्रत्याशियों को पथराव व उग्र विरोध का सामना करना पड़ा है।

प्रत्याशियों की सुरक्षा के लिए मुकाबले वाली सीटों पर खुफिया जाल फैला दिया गया है। अधिकारी स्टार प्रचारकों के दौरे को लेकर भी खासा चिंतित हैं। इसके लिए भी इंतजाम किए जा रहे हैं। पिछले विस चुनाव के मुकाबले इस बार हिंसक वारदातें बढ़ी हैं। 2005 में मतदान के दिन बरवाला विस क्षेत्र में कांग्रेस प्रत्याशी रणधीर धीरा के सुरक्षा गार्ड की हत्या कर दी गई थी। इसलिए संवेदनशील और अति संवेदनशील मतदान केंद्रों पर इस बार पुख्ता व्यवस्था रहेगी।

खून-खराबे की आशंका

खुफिया तंत्र को राज्य में खून-खराबे की आशंका है। इसलिए दूसरे प्रदेशों के प्रचारकों पर कड़ी नजर रहेगी। अन्य राज्यों से लगने वाले विस क्षेत्रों में पुख्ता कानून व्यवस्था के लिए विशेष बैठक की जा चुकी है, जिसमें राजस्थान, पंजाब व हरियाणा के पुलिस अफसरों ने भाग लिया। हरियाणा पुलिस के अलावा इन राज्यों की पुलिस भी मतदान वाले दिन तक सीमाओं पर मुस्तैद रहेगी। अफसरों का इन रास्तों से कच्ची शराब, अवैध हथियार व फर्जी वोटरों के आने की आशंका भी है।

दर्ज होंगे केस

हरियाणा के मुख्य निर्वाचन अधिकारी सज्जन सिंह ने बताया कि चुनाव के दौरान हिंसा भड़काने वालों के खिलाफ केस दर्ज करने के निर्देश दिए हैं। पिछले दिनों हुई वारदातों को भी गंभीरता से लिया गया है और संबंधित जिला निर्वाचन अधिकारियों को मुकदमा दर्ज करने को कहा गया है। नेताओं को जनभावना को ठेस पहुंचाने वाले भाषण से बचने को कहा गया है।

डीजीपी ने दिए निर्देश

हरियाणा पुलिस के प्रवक्ता एचएएस जैदी ने बताया कि डीजीपी रंजीव दलाल ने सभी जिलों के पुलिस अधीक्षकों से सुरक्षा व्यवस्था की पुख्ता समीक्षा करने को कहा है। प्रत्याशियों से भी अपील की है कि यदि उन्हें किसी बात की आशंका है तो वे पुलिस को विश्वास में लेकर सभाएं करें। जनता से अफवाहों से सावधान रहने और कानून व्यवस्था बनाने में सहयोग की अपील भी की है।

फिलहाल नहीं बदलेंगे प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष

कांग्रेस के राष्ट्रीय सचिव व प्रदेश प्रभारी विवेक बंसल ने कांग्रेस प्रदेशाध्यक्ष पद पर किसी नई नियुक्ति के बारे में फिलहाल विराम लगा दिया है।

उन्होंने कहा कि सीपी जोशी सही काम कर रहे हैं और आवश्यकता पड़ी तो कांग्रेस वर्किग कमेटी किसी नए व्यक्ति को इस पद पर ला सकती है। वह मंगलवार को सर्किट हाउस में पत्रकारों से बातचीत कर रहे थे।

बंसल ने कहा कि जोशी केंद्रीय मंत्री व प्रदेश अध्यक्ष की जिम्मेदारी बखूबी निभा रहे हैं। फिलहाल अभी नेतृत्व परिवर्तन की आवश्यकता महसूस नहीं की जा रही है। जब जरूरत पड़ेगी तो वर्किग कमेटी तत्काल किसी और उपयुक्त व्यक्ति को यह पद सौंप देगी। एक सवाल के जवाब में उन्होंने कहा कि पार्टी कार्यकर्ताओं व पदाधिकारियों को जल्द ही लाभ दिया जाएगा।पूर्व सरकार के दौरान जिन कार्यकर्ताओं पर अनुचित मुकदमे लगे हैं उन्हें वापस लिया जाएगा। किसी भी कार्यकर्ता के साथ अन्याय नहीं होने दिया जाएगा।

जगन के हाथ से फिसला सीएम का ताज

आंध्रप्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री दिवंगत वाईएसआर राजशेखर रेड्डी के निधन के एक माह बाद लग रहा है कि उनके बेटे जगनमोहन के हाथ से सीएम का ताज फिसल गया है। इसके लिए जगन समर्थक वे कांग्रेसी नेता भी काफी हद तक जिम्मेदार हैं, जो दो सितंबर को वाईएसआर के निधन के बाद से ही जगन को मुख्यमंत्री बनाने की लगातार मांग करते आ रहे हैं। जगन कैंप के एक युवा विधायक ने कहा, ‘मुझे लगता है कि समर्थकों ने जरूरत से ज्यादा उत्साह दिखाया। उनके अभियान ने जगन का भला नहीं किया, बल्कि कांग्रेस हाईकमान को सख्त रवैया अपनाने पर मजबूर कर दिया।’ अखिल भारतीय कांग्रेस समिति के एक वरिष्ठ नेता ने कहा, ‘पार्टी आलाकमान फिलहाल कुछ राज्यों में चुनाव में व्यस्त है। आंध्रप्रदेश में पहले ही एक मुख्यमंत्री है और उन्हें हटाने के लिए कुछ तो वजह होनी चाहिए।’जगन समर्थकों ने हेलीकॉप्टर हादसे में वाईएसआर की मौत के फौरन बाद से अभियान शुरू कर दिया था। उन्होंने उन सभी मंत्रियों, विधायकों के दस्तखत ले लिए, जो वाईएसआर को श्रद्धांजलि देने आए थे। एक विधायक के शंकर राव ने बताया, ‘उन्होंने मुझसे एक दस्तावेज पर हस्ताक्षर करवाए, जबकि उस वक्त मैं सदमे में था।’ बैनर फाड़ने से बिगड़ा मामला : पार्टी के सदस्यता अभियान को प्रभावित करने के अलावा जगन समर्थकों ने खम्मम में सोनिया गांधी का पोस्टर फाड़ दिया था। जगन समर्थकों ने इस घटना के लिए कुछ वरिष्ठ कांग्रेसी नेताओं को जिम्मेदार बताया था।

महंगाई पर भाजपा ने मांगा पीएम से जवाब

कई दिनों के वायदे को आखिरकार पूरा करते हुए प्रमुख विपक्षी दल भाजपा ने गुरुवार को महंगाई पर सरकार की बखिया उधेड़ी। प्रवक्ता रविशंकर प्रसाद ने आरोप लगाया कि यूपीए सरकार में आसमान छूते अनाज के दाम की वजह खाद्यान्न की कमी नहीं, बल्कि सरकार का कुप्रबंधन है।

प्रसाद ने प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह से मांग की है कि वह इस मसले पर सरकार की नीति साफ करें और यह बताएं कि एक कुशल अर्थशास्त्री होते हुए भी महंगाई पर लगाम क्यों नहीं लगा पाए। भाजपा ने कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी को भी लपेटे में लेते हुए कहा कि पहले तो वह महंगाई जैसे अहम मसले पर सरकार को चिट्ठी लिखा करती थीं, मगर इस बार ऐसा क्यों नहीं किया। प्रसाद ने सवाल किया कि क्या अब सोनिया गांधी भी सरकार के रवैए से हताश हो चुकी हैं।

अपने आरोपों का वजन बढ़ाने के लिए प्रसाद ने कई आंकड़ें पेश किए जिसमें एनडीए सरकार के दौरान अनाज के दाम के साथ 2008 और मौजूदा दामों की तुलना शामिल है। कुप्रबंधन के आरोप को विस्तार से समझाते हुए प्रसाद ने कहा कि कृषि व खाद्य मंत्री शरद पवार व अन्य केंद्रीय मंत्रियों ने खुद माना है कि सरकारी भंडारों में अनाज की कोई कमी नहीं है। फिर आसमान छूते दाम की वजह क्या है? भाजपा का मानना है सरकार निर्यातकों की खास लॉबी के हाथों खेल रही है और आयात-निर्यात की नीति उन्हीं के कहने पर तय की जा रही है। रविशंकर प्रसाद की मानें तो यही लॉबी बढ़ती कीमतों के लिए जिम्मेदार है।

आडवाणी को चार साल पहले संन्यास ले लेना था

इंडियन नेशनल लोकदल (इनेलो) के मुखिया ओमप्रकाश चौटाला ने लोकसभा चुनाव में उनकी पार्टी की हार के लिए भाजपा नेता लालकृष्ण आडवाणी को जिम्मेदार ठहराया है। उन्होंने गुरुवार को कहा कि सक्रिय राजनीति से संन्यास लेने की सोच रहे आडवाणी यदि यही विचार चार साल पहले कर लेते तो केंद्रीय स्तर पर भाजपा और हरियाणा में इनेलो का बुरा हश्र न होता।

चौटाला ने कहा कि लोकसभा चुनाव में जनता ने मनमोहन सिंह के मुकाबले आडवाणी को पूरी तरह नकार दिया। इसका खामियाजा भाजपा के सहयोगी होने के नाते इनेलो को भी उठाना पड़ा। राज्य के पूर्व मुख्यमंत्री चौटाला ने आरोप लगाया कि आडवाणी के नेतृत्व में भाजपा ने हमेशा अपने सहयोगियों के कंधे पर बंदूक रखकर चलाई और इसी सोच के चलते एनडीए बिखरता चला गया।

हरियाणा में विधानसभा चुनाव से ठीक पहले भाजपा से अपना गठबंधन टूटने के सवाल पर उन्होंने कहा कि इनेलो को इससे नुकसान के बजाय लाभ ही होगा। उन्होंने कहा कि राज्य में मुकाबला कांग्रेस-इनेलो व हुड्डा-चौटाला के बीच है, जिसमें उन्हें अपनी जीत का पूरा भरोसा है। हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि यदि जरूरत हुई तो उनकी पार्टी कांग्रेस को छोड़कर भाजपा समेत किसी भी समान विचारधारा वाले दल का सहयोग लेने से नहीं कतराएगी। चौटाला ने कहा कि वे राजनीति में किसी भी दल को अछूत नहीं मानते।