Sunday, November 1, 2009

मंत्री ने देखे हालात

दीगोद (कोटा)। कोटसुआं गांव में शनिवार को खरंजा निर्माण को लेकर हुए विवाद के बाद रविवार को शांति रही। दिनभर पुलिस गांव में गश्त करती रही। पुलिस ने इस मामले में 11 जनों को गिरफ्तार किया, जिन्हें न्यायाधीश ने 13 नवम्बर तक जेल भेजने के आदेश दिए। उधर रविवार शाम पंचायतीराज व ग्र्रामीण विकास मंत्री भरत सिंह ने मौके पर स्थिति का जायजा लिया। उन्होंने पीडित परिवारों से जानकारी ली तथा दोनों पक्षों से शांति बनाए रखने की अपील की।
सिंह ने कहा कि मामूली विवाद को लेकर आगजनी की घटना दुर्भाग्यपूर्ण है। गांव में शांति व भाईचारा कायम करने के लिए बैठकर प्रयास किए जाएं। उन्होंने विद्यालय भवन में दोनों पक्षों के लोगों की बैठक ली तथा मुकदमेबाजी से बचने व बातचीत से मनमुटाव दूर करने की सलाह दी। बैठक में पुलिस व प्रशासनिक अधिकारियों सहित बडी संख्या में ग्र्रामीण उपस्थित थे।
यह था मामला कोटसुआं में खरंजा निर्माण को लेकर विवाद के बाद कुछ लोगों ने समुदाय विशेष के चार घरों में आग लगा दी थी। जिससे घर व उनमें रखे सामान जल गए थे। पुलिस ने इस संबंध में दोनों पक्षों की ओर से मामले दर्ज किए थे।

कांग्रेस-एनसीपी में अब तक समझौता नहीं

मुंबई। महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव में कांग्रेस और एनसीपी गठबंधन ने जीत तो दर्ज कर ली। लेकिन, मंत्रिमंडल में मलाईदार पदों को लेकर दोनों के बीच खींचतान चरम पर पहुंच गई है। मौजूदा विधानसभा का कार्यकाल 3 नवंबर को खत्म हो रहा है। फिर भी गठबंधन अभी तक नई सरकार बनाने का दावा पेश नहीं कर पाया है। सरकार बनाने का दावा आज पेश करना ही होगा।
चव्हाण करते रहे इंतजारमुख्यमंत्री अशोक चव्हाण अपनी दूसरी पारी खेलने की तैयारी कर चुके हैं। लेकिन, जो कुछ हो रहा है, उससे उनकी राह आसान नहीं दिख रही है। कल रात वे मंत्रालय को लेकर सबकुछ साफ करने की तैयारी में थे। लेकिन, एनसीपी वाले मूड में नहीं थे। चव्हाण अपने बंगले पर इंतजार करते रहे। एनसीपी के नेता पहुंचे ही नहीं।
नई सरकार में किसके खाते में कितनी और कौन सी कुर्सी जाएगी इस बात का फैसला फिर टल गया। मंत्रिमंडल के बंटवारे को लेकर मुख्यमंत्री के बंगले वारशा में कांग्रेस और एनसीपी के नेताओं की बैठक होनी थी। लेकिन, एनसीपी नेता छगन भुजबल नहीं आए। सूत्रों का कहना है कि मंत्रिमंडल को लेकर एनसीपी के भीतर ही मतभेद है।

नगर निकाय चुनाव पर्यवेक्षक दो व तीन को बैठक लेंगे

राजस्थान प्रदेश कांग्रेस के अध्यक्ष एवं केन्द्रीय मंत्री डा. सी पी जोशी ने आगामी २३ नवम्बर को होने वाले ४६ स्थानीय निकाय चुनाव के लिये नियुक्त किये गये पर्यवेक्षकों को दो तथा तीन नवम्बर को संबंधित नगर निकाय में बैठकें आयोजित करके चार नवम्बर तक अपनी रिपोर्ट प्रदेश कांग्रेस कमेटी को प्रस्तुत करने के निर्देश दिये है।पार्टी के प्रदेश प्रवक्ता सत्येन्द्र ङ्क्षसह राघव ने आज यहां जारी विज्ञप्ति में बताया कि ४६ निकायों के महापौर सभापति अध्यक्ष एवं पार्षदों के चयन की प्रक्रिया दो नवम्बर से प्रारंभ हो जायेगी। प्रदेश कांग्रेस की ओर से चयन प्रक्रिया को लेकर प्रदेश पर्यवेक्षक जिला एवं ब्लॉक कांग्रेस कमेटियों के अध्यक्षों के लिये आवश्यक निर्देश दिये गये है जिनके आधार पर पार्टी उम्मीदवारों का चयन करेगी। सभी जिला एवं ब्लॉक कांग्रेस कमेटियों को निर्देश दिये गये है कि प्रदेश पर्यवेक्षक के मार्गदर्शन में ही पार्टी प्रत्याशियों के चयन की प्रक्रिया चलायें।सभी पर्यवेक्षकों को कहा गया है कि वे संबंधित जिला कांग्रेस अध्यक्ष के लोकसभा चुनाव एवं २००८ के विधानसभा चुनाव लड़े पार्टी प्रत्याशियों ब्लॉक कांग्रेस अध्यक्षों संबंधित निकायों के निवर्तमान महापौर सभापति अध्यक्षों एवं नेता प्रतिपक्ष पद पर रहे कांग्रेसजनों पार्टी के अग्रिम संगठनों के जिलाध्यक्षों सहित महत्वपूर्ण कांग्रेसजनों से पार्टी प्रत्याशी के लिये विचार विमर्श करें।राघव ने बताया कि पार्षदों एवं अध्यक्ष के प्रस्तावित नामों पर अंतिम फैसला प्रदेश कांग्रेस द्वारा किया जायेगा। अधिकृत प्रत्याशियों की घोषणा प्रदेश कांग्रेस द्वारा ही की जायेगी। प्रदेश कांग्रेस के निर्णयानुसार जिनको पार्टी अपना उम्मीदवार बनायेगी उनके खिलाफ कार्य करने वालों को प्रदेश कांग्रेस पर्यवेक्षकों एवं जिला कांग्रेस की अनुशंषा पर तत्काल छह वर्ष के लिये पार्टी से निष्कासित कर दिया जायेगा।

कोड़ा के जयपुर ठिकाने पर भी छापा

आयकर विभाग ने झारखंड के मुख्यमंत्री और सांसद मधु कोड़ा एवं उनके सहयोगियों के ठिकानों और प्रतिष्ठानों पर देशभर में मारे गए छापों के तहत जयपुर में भी छापा मारा। यह जानकारी आयकर विभाग के सूत्रों ने दी। उन्होंने इस बारे में कोई और ब्यौरा देने से यह कहकर इंकार कर दिया कि छापे की कार्रवाई दिल्ली स्तर की है, इसलिए वहीं से जानकारी मिल सकती है।

मैं अन्याय के खिलाफ लड़ती रहूंगी : वसुंधरा

पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे ने कहा है कि वे भाजपा के आम कार्यकर्ता के साथ कंधे से कंधा मिलाकर प्रदेश में होने वाले हर तरह के अन्याय के खिलाफ लड़ती रहेंगी। वे पार्टी के साथ रहेंगी।भाजपा में अपने विरोध की बातों को खारिज करते हुए उन्होंने कहा कि जब वे हर किसी की मदद करेंगी और हर किसी के संकट में साथ देंगी तो कोई उनके विरोध में कैसे हो जाएगा। नेता प्रतिपक्ष पद से इस्तीफा देने के बाद वसुंधरा राजे ने भास्कर से लंबी बातचीत करते हुए अपने मन की गुत्थियों को पूरी तरह खोला। भाजपा में हर जगह लड़ाई छिड़ी है। नफरत और मारकाट। लोग आपसे भी लड़ रहे हैं?मैंने पाया है कि प्यार के बंधन में बांध कर ही राजनीति की जा सकती है। जाति या नफरत से नहीं। मैं मानती हूं, प्यार ही पोटेंट वैपन (कारगर हथियार) है। हाउ कैन यू फाइट मी, इफ आई लुक आफ्टर यू, इफ आई केयर फॉर यू? अगर मैं सच्चे दिल से किसी का भला सोचती हूं और उसकी खैरखबर रखती हूं, बुरे वक्त में मदद करती हूं, खुशियों में शरीक होना चाहती हूं तो कोई मुझसे कैसे लड़ सकता है। अदृश्य लड़ाई का आप क्या इलाज देखती हैं? राजनीति तो राजनीति है। अलग-अलग लोग हैं। अलग ट्रीटमेंट हैं। भाजपा ने जब कहा तो तत्काल इस्तीफा नहीं दिया? कहां देर की? कहते ही तो दे दिया। लेकिन इतने महीने लग गए पार्टी को आप तक पहुंचने में?विधानसभा से मेरे कुछ विधायकों को निलंबित कर दिया था। आरक्षण का इश्यू था। कैसे छोड़ देती उसको? उनको बहाल करवाना था। और फिर कोई समय सीमा नहीं थी। मुझे जब बोले इस्तीफा दे दो तो दे दिया। क्या भाजपा में कोई है, जो आपको नुकसान पहुंचाना चाहता है? मैं ऐसा नहीं सोचती। मेरी पार्टी में डायवर्स काफी हैं। बड़ी पार्टी है। सबकी अलग-अलग जगह है। एक नेता के लिए मुश्किल घड़ी होती है जब वह समर्थकों की रक्षा नहीं कर पाता। क्या आप ऐसे ही दौर से नहीं गुजर रही हैं? मेरा एक्जिस्टेंस नेता प्रतिपक्ष से ही नहीं है। मैं तो समझती हूं जब साथ काम कर रहे हैं तो दिक्कत ही क्या है? मैं अन्याय के खिलाफ हमेशा लड़ती रही हूं। आगे भी लडूंगी। अन्याय बर्दाश्त ही नहीं कर सकती। अपने समर्थकों को अब तक प्रोटेक्ट करती रही हूं तो आगे भी करूंगी। विभाजन तो साफ दिख रहा है? मेरे लिए तो सभी 78 विधायक मेरे अपने हैं। राजनीति भले संकरी गली की तरह हो, लेकिन इसमें बड़ा दिल रखकर काम करने और सबको साथ लेकर चलने की जरूरत है। जब जन्मदिन या सालगिरह होती है तो मैं भाजपा के ही नहीं, कांग्रेस, माकपा सहित सभी विधायकों को फोन करती रही हूं। सात के लिए तो करना और सत्तर के लिए नहीं करना, ये ओछी बात मैं नहीं सोचती। और आज कह देती हूं, किसी के साथ अन्याय होगा तो मैं उसके साथ खड़ी रहूंगी।

बजरंगी अगले विधानसभा चुनाव में

मलाड में दिल्ली पुलिस के हाथों मुन्ना बजरंगी की सकुशल गिरफ्तारी ने सवाल खड़े कर दिए हैं। बीएसपी के बाहुबली विधायक मुख्तार अंसारी को बजरंगी का आका माना जाता है। डॉन के सेफ अरेस्ट से लगता है अंसारी ने दिल्ली-मुंबई में पकड़ मजबूत कर ली है और अपराध की दुनिया में उसका रसूख भी बढ़ा है। बीजेपी विधायक कृष्णानंद राय की हत्या के आरोपी बजरंगी को अगले विधानसभा चुनाव में उतारने की भी योजना है। मां की तमन्ना है : बजरंगी के जौनपुर स्थित आलीशान मकान में रौनक है। उसकी बुजुर्ग मां लीलावती इस बात से खुश हैं कि बेटे को मुंबई-दिल्ली पुलिस ने सकुशल गिरफ्तार कर उसे नया जीवन दिया। उनका कहना है कि अगर यूपी पुलिस के हत्थे चढ़ता तो पता नहीं, जिंदा होता या नहीं। बड़ा से बड़ा वकील करके मैं उसे बरी करवाने की कोशिश करूंगी। मेरी तमन्ना है कि लाड़ला एलएलए-एमपी और मिनिस्टर बने। उसकी पहले से राजनीति में आने की इच्छा रही है। वह जौनपुर अथवा आसपास के जिलों में जहां से चाहेगा, जीतकर दिखा सकता है। उसके दोस्त हर राजनीतिक पार्टी में हैं और सभी उसे चाहते हैं। मुन्ना ने पांचवीं के बाद अपराधियों की पाठशाला को जॉइन कर लिया था। पूर्व नियोजित गिरफ्तारी? सवाल उठता है कि क्या मुंबई-दिल्ली पुलिस द्वारा मुन्ना की सुरक्षित गिरफ्तारी पूर्व-नियोजित तो नहीं थी? प्रेम प्रकाश सिंह उर्फ मुन्ना बजरंगी के बारे में पुलिस रेकॉर्ड बताता है कि 16 लोगों की अत्याधुनिक हथियारों से हत्या करने वाले मुन्ना गिरोह का जाल एनसीआर से लेकर महाराष्ट्र तक फैला है। उसे मुंबई में जौनपुर कनेक्शन का फायदा मिला है। विभिन्न पार्टियों के सीनियर नेता मुन्ना के संपर्क में हैं, जिन पर पुलिस की नजर है। इन नेताओं में जौनपुर के मुंबई स्थित बड़े कांग्रेसी नेता और लखनऊ में कांग्रेस से एमएलसी रह चुके जौनपुर के बिल्डर भी हैं। राय मर्डर से मिली थी कुख्याति बजरंगी ने सबसे पहले एके-47 का इस्तेमाल बीजेपी नेता रामचंद्र सिंह के गनर के मर्डर में किया था। जौनपुर के जमालपुर ब्लॉक प्रमुख कैलाश नाथ दूबे सहित तीन लोगों की निर्मम हत्या, बीजेपी विधायक रह चुके अजय राय के छोटे भाई सुनील की हत्या, काशी विद्या पीठ के रामप्रकाश पांडेय सहित तीन लोगों के कत्ल में भी आधुनिक हथियारों का इस्तेमाल हुआ था। लेकिन 2005 में अंसारी के विरोधी और बीजेपी के बाहुबली विधायक कृष्णानंद राय और उनके आधा दर्जन समर्थकों की नृशंस सामूहिक हत्या के बाद मुन्ना बजरंगी का नाम चर्चा में आया। इस घटना के बाद बीजेपी नेता राजनाथ सिंह ने वाराणसी में अनशन तक किया था। बीवी को भी नहीं थी भनक मुन्ना बजरंगी दो साल से मुंबई के मलाड स्थित एक फ्लैट में अपनी पत्नी सीमा के साथ रह रहा था। वह शादी के बाद दिल्ली में भी 1998 तक रहा। कहा जाता है कि क्राइम की भनक वह पत्नी सीमा को भी नहीं लगने देता था। दिल्ली में एनकाउंटर के बाद ही सीमा को पता चला कि मुन्ना बड़ा डॉन है। दिल्ली पुलिस के अधिकारी राजवीर सिंह ने जब मुन्ना का एनकाउंटर किया था तो उसके शरीर में नौ गोलियां लगी थीं। इसके बाद ही राजवीर सिंह की हत्या हो गई। कहा तो यह भी जाता है कि मुंबई में उसने डी-गैंग से सीधे रिश्ते जोड़ लिए थे और यूपी पुलिस को आशंका है कि उसने मुंबई में यूपी-बिहार और दिल्ली के कई अपराधियों का अपने मिशन में इस्तेमाल किया।

पर्यवेक्षक करेंगे प्रत्याशी चयन

जयपुर। स्थानीय निकाय चुनाव में प्रत्याशियों के चयन के लिए कांग्रेस ने पर्यवेक्षक नियुक्त किए हैं। ये पर्यवेक्षक दो-तीन नवम्बर तक सम्बन्धित नगर निकायों में बैठकें करेंगे और कांग्रेसजनों की राय जानेंगे और चार नवम्बर तक सम्भावित प्रत्याशियों की सूची प्रदेश कांग्रेस को सौंपेंगे। कांग्रेस के प्रदेश प्रवक्ता सत्येन्द्र राघव ने बताया कि प्रदेशाध्यक्ष डॉ.सी.पी.जोशी ने सभी जिला अध्यक्षों को दो व तीन नवम्बर को चुनाव वाले स्थानों का दौरा करने के निर्देश दिए हैं। इन दौरों में जिले के प्रभारी मंत्री, कांग्रेस पर्यवेक्षक, लोकसभा चुनाव के प्रत्याशी और अग्रिम संगठनों के जिला अध्यक्ष भी साथ रहेंगे। इस दौरान ही ब्लॉक अध्यक्षों की बैठकें भी होंगी। प्रस्तावित नामों पर अंतिम फैसला प्रदेश कांग्रेस द्वारा किया जाएगा।
ये बने पर्यवेक्षकनगर निगम: जयपुर-डॉं, चंद्रभान, रतनलाल ताम्बी, सलीम भाटी, जोधपुर- प्रमोद जैन भाया, पुखराज पाराशर, अश्क अली टाकबीकानेर- हीरालाल इंदौरा, भंवरू खान, जगदीश शर्मा, प्रभा सिंघवी, कोटा- गोपाल सिंह ईडवा, कैलाश त्रिवेदी, निजामुद्दीन छबडानगर परिषद: पाली-रघु शर्मा, मोहम्मद अनवर, उदयपुर- हरिमोहन शर्मा, अनिल डांगी, ब्यावर-रामपाल शर्मा, सम्पत सिंह, टोंक-नरेन्द्र बुढानिया, श्रवण तंवर, स्वर्णलता व्यास, चूरू- भगवान सहाय सैनी, सुरेन्द्र दादरी, हनुमानगढ-रणदीप धनखड, मुकेश वर्मा, श्रीगंगानगर- भंवरलाल मेघवाल, राजीव अरोडा, अलवर-भरतसिंह कुंदनपुर, शंकर डंगायच, भरतपुर- मुमताज मसीह, मुकेश शर्मा, सीकर-चिंरजीलाल बडाया, शफी मोहम्मद, झुंझुनूं- भंवरलाल शर्मा, रशीदन बेगम।
नगर पालिका: बाडमेर- मलखान सिंह, रतन देवासी, बालोतरा- शांति मेहता, सुनील परिहार, जैसलमेर- राजेन्द्र सोलंकी, गणपत सिंह चौहान, जालोर-डॉ.विज्ञान मोदी, नीरज डांगी, सिरोही- सोमेन्द्र गुर्जर, आबू पर्वत- लाल सिंह झाला, सुमेरपुर- वीरेन्द्र पूनिया, बांसवाडा-प्रेम पाटीदार, सुरेश श्रीमाली, चित्तौडगढ- अक्षय त्रिपाठी, निम्बाहेडा- गोपाल बाहेती, भंवरू खान (उपाध्यक्ष सहकारी बैंक भीलवाडा), मकराना- रामेश्वर डूडी, कौसर खान, भिवाडी- सीताराम अग्रवाल, मोहम्मद माहिर आजाद- फलोदी- गोवर्धन कल्ला, सालेह मोहम्मद, भीनमाल- अजीत डग, शारदाकांत शर्मा, शिवगंज-अजय सिंह कछावा, रणवीर डूडी, नाथद्वारा- वीरेन्द्र वैष्णव, आमेट- शिवदयाल शर्मा, पुष्कर- महेन्द्र चौधरी, निघि शर्मा, डीडवाना- डॉ.खानूखान, बनारसी मेघवाल, राजगढ चूरू- मंगलाराम गोदारा, नवीन शर्मा, सूरतगढ- ममता शर्मा, मेजर ओ.पी.यादव, पिण्डवाडा-गोपाराम मेघवाल, कानोड- राइया मीणा, रावतभाटा- रामकिशन वर्मा, धर्मेन्द्र पुरोहित, सांगोद- सी.एल.प्रेमी, कैथून- राजकुमार माथुर, छबडा- प्रेमचंद नागर, मांगरोल- गिरिराज उपाध्याय, अरूणा आकोदिया, नीमकाथाना-महेश पारीक, निर्मला चौधरी, पिलानी- सुचित्रा आर्य, चक्रेश्वरी दाधीच, बिसाऊ- गोविंद मेहनसरिया, शकुन्तला रावत।
वार्ड निवासी को ही टिकटजयपुर। स्थानीय निकाय चुनाव में कांग्रेस सम्बन्धित वार्ड के निवासी को ही टिकट देगी। विशेष परिस्थितियों में ही प्रत्याशी को वार्ड परिवर्तन की अनुमति दी जाएगी। प्रत्याशियों के बारे में फीडबैक लेने जा रहे पर्यवेक्षकों को प्रदेश कांग्रेस द्वारा दिए गए दिशा-निर्देशों में यह बात कही गई है। पर्यवेक्षकों को कहा गया है कि वे वार्ड के जातिगत समीकरण, राजनीतिक परिस्थिति और जीत की सम्भावना को देख कर प्रत्याशी का चयन करें। प्रत्याशी चयन के लिए में युवाओं को प्राथमिकता देने की बात कही गई है।
बागी होंगे छह वर्ष के लिए बाहर दिशा-निर्देशों में कहा गया है जो कांग्रेसजन बागी प्रत्याशी के रूप में चुनाव लडेंगे, उन्हें जिला कांग्रेस समितियां प्रदेश कांग्रेस की सहमति से तुरंत छह वर्ष के लिए निष्कासित कर सकेंगी। ऎसे नेता न संगठन चुनाव लड सकेंगे और न ही इन्हें राजनीतिक नियुक्तियों में कोई लाभ दिया जाएगा।
गहलोत-जोशी में हुई चर्चा मुख्यमंत्री अशोक गहलोत और प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष डॉ.सी.पी.जोशी के बीच शनिवार को प्रदेश कांग्रेस कार्यालय में एक-डेढ घंटे लम्बी चर्चा हुई। दोनों ने यहां कांग्रेस के स्थानीय निकाय अध्यक्षों से भी बात की और चुनाव के सम्बन्ध में फीडबैक लिया। साथ ही आश्वस्त किया कि प्रत्याशी चयन में उनकी राय को भी महत्व दिया जाएगा।
अभियान समितियां प्रदेश अध्यक्ष डॉ.सी.पी.जोशी ने बताया कि निकाय चुनाव के लिए राज्य और जिला स्तर पर अभियान समितियां बनाई जाएंगी। इन समितियों में प्रचार के लिए स्थानीय और राज्यस्तरीय नेताओं को जोडा जाएगा।
दावेदारों की भीडजयपुर। नगर निगम चुनाव लडने के इच्छुक दावेदारों की भीड शनिवार को भाजपा कार्यालय में उमड पडी। आवेदन जमा कराने की अंतिम तिथि के कारण भाजपा कार्यालय में तो मेले जैसा माहौल था। सुबह दस बजे से ही भाजपा कार्यालय में बडी संख्या में दावेदार हाथों में बायोडाटा लेकर पहुंचने लगे। समर्थकों के साथ पहुंचे दावेदारों ने भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष अरूण चतुर्वेदी, चुनाव प्रभारी ओंकार सिंह लखावत समेत भाजपा जयपुर शहर, युवा मोर्चा व महिला मोर्चा के पदाधिकारियों एवं वहां मौजूद विधायकों को बायोडाटा सौंपे। शाम पांच बजे तक पांच सौ से अधिक दावेदारों ने बायोडाटा सौंपे। बडी चौपड स्थित शहर कांग्रेस कार्यालय में बडी संख्या में दावेदार बायोडाटा देने पहुंचे। पार्षदों के लिए अब तक आठ सौ से अधिक व महापौर के लिए चौदह आवेदन आ चुके है।