Sunday, December 6, 2009

भगवान का भोग, 'जीम गए' मंत्री-अफसर

जयपुर। जिस देवस्थान निधि के धन से मंदिरों की व्यवस्था व भगवान के भोग-राग की व्यवस्था की जानी थी, उस राशि से विभाग के मंत्री व अफसरों के लिए गाडियां, कम्प्यूटर, ब्रॉड बैण्ड कनेक्शन, स्टेशनरी, आलमारियां और अन्य उपकरण खरीद लिए गए।
विभाग के अफसरों ने इस राशि का जमकर मनमाना उपयोग किया। वित्त विभाग की ओर से देवस्थान विभाग की गत छह साल की स्पेशल ऑडिट में यह खुलासा करते हुए 1.58 करोड रूपए की गडबडियों का जिक्र किया गया है।
इस ऑडिट रिपोर्ट मेंं तत्कालीन देवस्थान राज्यमंत्री, प्रमुख देवस्थान सचिव व अन्य अफसरों से करीब 16.50 लाख रूपए की वसूली की सिफारिश की है। देवस्थान मंत्री बृजकिशोर शर्मा के निर्देश पर वित्त विभाग ने 2003 से 2008 तक सहायक आयुक्त कार्यालय की स्पेशल ऑडिट की है। पूर्ववर्ती भाजपा शासनकाल की इस अवधि में उषा पूनिया देवस्थान राज्यमंत्री थीं।
रिपोर्ट के अनुसार देवस्थान निधि नियमों के तहत केवल राजकीय व आत्मनिर्भर श्रेणी के मंदिरों की व्यवस्था, रख-रखाव व भगवान के भोग-राग पर ही राशि खर्च की जा सकती है, लेकिन ऑडिट अवधि में जम कर नियम विरूद्ध मनमाना खर्चा किया गया।
खजाने में जमा नहीं करवाए 55 लाख रिपोर्ट के अनुसार विभाग में गडबडी का आलम यह था कि अफसरों ने अपने मनमाने खर्च के लिए करीब 55 लाख रूपए सरकारी खजाने (पीडी एकाउण्ट) में जमा ही नहीं करवाए। यह राशि मन्दिरों की सम्पत्ति के किराये, भेंट आदि के रूप में मिली थी। ऑडिट अवधि में विभाग को 1.31 करोड राशि मिली थी, लेकिन 55 लाख रूपए रख कर पीडी एकाउण्ट में 76 लाख ही जमा करवाए गए। ऑडिट रिपोर्ट में टिप्पणी की गई है कि कार्यालय में इतनी राशि रखने से गबन की आशंका रहती है और यह राशि सीधे खर्च करना गम्भीर अनियमितता है।
विभाग के पी.डी. खाता पास-बुक व रोकड बही में भी बडा अन्तर है। इस अनियमितता के लिए सहायक आयुक्त प्रथम को जिम्मेदार ठहराया गया है। कर्मचारियों के सीपीएफ के 60 हजार रूपए भी खातों में जमा नहीं करवाए गए। रिपोर्ट में इसके लिए जरूरी कार्रवाई की सिफारिश की गई है।
मनमानियां-गडबडियां* राज्यमंत्री, प्रमुख सचिव व अन्य अफसरों ने नियम विरूद्ध 17.28 लाख रूपए की यात्राएं किराये के वाहनों में की। वसूली की सिफारिश।* प्रमुख सचिव व सहायक आयुक्त के लिए 9.69 लाख रूपए की दो गाडियों की खरीद, इनकी मरम्मत पर 5.04 लाख रूपए खर्च। गाडियों की लॉग बुक का संधारण भी नहीं।* निधि से 3.42 लाख रूपए का फर्नीचर, फोटो स्टेट मशीन, साइबर शॉट कैमरे खरीदे गए।* कम्प्यूटर, कलर प्रिंटर, स्टेशनरी खरीद तथा फोटोस्टेट पर 8.55 लाख रूपए खर्च।* काफी सामान आयुक्तालय से सचिवालय भेजा गया, जिसकी रसीद तक नहीं।* 2.16 लाख रूपए का अनियमित कार्यालय व्यय* राज्यमंत्री, प्रमुख सचिव व उप सचिव के लिए 3 लाख रूपए की स्टेशनरी खरीद व 9.14 लाख रूपए ऑपरेटर सहित कम्प्यूटर का अनियमित भुगतान।

लालू और ममता गायब रहेंगे बहस से

लिब्रहान आयोग की रिपोर्ट को सदन पटल पर रखने की मांग को सियासी-औजार के रूप में बार-बार इस्तेमाल करने वाले राजद सुप्रीमो लालू प्रसाद और तृणमूल कांग्रेस अध्यक्ष और रेलमंत्री ममता बनर्जी सोमवार को इस पर बहस के दौरान सदन में नहीं रहेंगे। ममता ने जहां रेलवे के पूर्व नियोजित कार्यक्रम के बहाने बेंगलुरू में रहने का कार्यक्रम बनाया है, वहीं लालू प्रसाद को झारखंड विधानसभा चुनाव में वोटरों से रू-ब-रू हो रहे होंगे।

आगामी 8 दिसंबर को सूबे में तीसरे चरण के चुनाव होने हैं। मुस्लिम-यादव समीकरण पर बिहार में १५ साल राज करने वाले लालू प्रसाद पर लोगों की निगाहें टिकी थीं, लेकिन राजद संसदीय दल के मुख्य सचेतक जगदानंद ने दैनिक भास्कर से साफ कर दिया कि वे नहीं आ सकते। मजे की बात ये है कि राजद की ओर से इस मुद्दे पर कौन पहल करेगा, इसकी सूचना लोकसभा सचिवालय को नहीं दी गई है।

पहले वरिष्ठ नेता रघुवंश प्रसाद सिंह को रिपोर्ट पर बोलना था लेकिन वे भी झारखंड चुनाव में उलझे रहने के कारण रविवार देर रात दिल्ली नहीं पहुंच सके। जगदानंद सिंह ने साफ किया कि रघुवंश बाबू की अनुपस्थिति में वे बहस का हिस्सा बन सकते हैं।

तृणमूल कांग्रेस की ओर से बहस में भाग लेने के लिए केंद्रीय पर्यटन राज्यमंत्री सुल्तान अहमद ने लोकसभा स्पीकर से विशेष अनुमति मांगी है। संवैधानिक पद पर रहने के कारण पार्टी की ओर मुख्य सचेतक सुदीप बंदोपाध्याय ने सुल्तान को वक्ता बनाने के लिए स्पीकर मीरा कुमार को लिखा है। सुदीप ने बताया कि तृणमूल की ओर से कल्याण बनर्जी और सुल्तान अहमद ही बहस-मुबाहिसों में हिस्सा लेंगे।

दुर्ग जिला भाजपा कार्यालय में तोड़फोड़

टिकट वितरण से असंतुष्ट भाजपा कार्यकर्ताओं का गुस्सा आखिरकार फूट पड़ा। महापौर प्रत्याशी की घोषणा के तुरंत बाद नाराज कार्यकर्ताओं ने रविवार की शाम करीब 7.30 बजे दुर्ग जिला भाजपा कार्यालय में तोड़फोड़ की। उस समय जिला भाजपा अध्यक्ष जागेश्वर साहू, अजय तिवारी, देवेंद्र चंदेल, देवनारायण चंद्राकर समेत कई अन्य पदाधिकारी भी मौजूद थे। अचानक ईंट, पत्थर फेंके जाने से वे भौचक रह गए।

कई कार्यकर्ता चोट से बचने इधर-उधर छिप गए। प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक करीब 20 की संख्या में पहुंचे नाराज कार्यकर्ताओं ने पहले कार्यालय के सामने लगाए गए पोस्टर फाड़ दिए। इसके बाद बाहर से ईंट, पत्थर बरसाकर खिड़कियों के कांच तोड़ दिए।

बरामदे में रखीं कुर्सियों को भी उलट-पुलट दिया। करीब 15 मिनट बाद पत्थरबाजी व तोड़फोड़ करने वाले भाग गए। भाजपा कार्यालय के कमरों व बरामदों में पत्थर व ईंट के टुकड़े बिखरे हुए थे। सूचना पाकर कोतवाली टीआई आदित्य शर्मा मौके पर पहुंचे।

बाद में भाजपा कार्यालय की लाइट बंद कर बाहर गेट पर ताला जड़ दिया गया। कार्यालय के गेट पर पुलिस जवान तैनात कर दिए गए। तोड़फोड़ करने वालों में भाजपा मांझी प्रकोष्ठ के जिला अध्यक्ष दशरथ ढीमर व गोपाल पटेल भी शामिल थे। इसकी पुष्टि जिला भाजपा के मीडिया प्रभारी अजय तिवारी ने की। पुलिस ने दोनों आरोपियों को हिरासत में लेकर पूछताछ शुरू कर दी है। जानकारी के मुताबिक तोड़फोड़ करने वाले महापौर पद के प्रबल दावेदार रहे राजेश ताम्रकार के समर्थक बताए जाते हैं। उन्हें टिकट न देकर डा. एसके तमेर को टिकट देने से वे नाराज थे।

ञ्चतोड़फोड़ करने वालों को मैं नहीं पहचानता। विरोध करने का यह तरीका ठीक नहीं है। कोई भी बात हो तो पार्टी फोरम में उठाया जाना चाहिए। पार्टी हाईकमान का निर्णय सबको मान्य होता है। इस घटना से प्रदेश संगठन मंत्री को अवगत करा दिया गया है। तोड़फोड़ करने वाले पार्टी के लोग होंगे तो प्रदेश नेतृत्व के निर्देशानुसार कार्रवाई की जाएगी। जागेश्वर साहू, अध्यक्ष, जिला भाजपा

तमेर होंगे दुर्ग से भाजपा प्रत्याशी महापौर के लिए भाजपा ने दुर्ग से डॉ. शिवकुमार तमेर को जबकि राजनांदगांव से अशोक चौधरी को प्रत्याशी बनाया है। प्रदेश भाजपा अध्यक्ष विष्णुदेव साय ने रविवार शाम को इन नामों का ऐलान किया। शेष सात के महापौर प्रत्याशियों की घोषणा कल की गई थी।

दुर्ग में सांसद सरोज पांडे व उच्च शिक्षा मंत्री हेमचंद यादव के बीच प्रत्याशी तय करने को लेकर हो रही खींचतान के कारण वहां फैसला नहीं हो पाया था। दोनों अपने समर्थक को टिकट दिलाने का प्रयास कर रहे थे।

प्रदेश भाजपा ने बीच का रास्ता निकालते हुए डॉ. तमेर को प्रत्याशी बना दिया। इसी प्रकार राजनांदगांव के लिए मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह से सहमति नहीं मिल पाने के कारण वहां का प्रत्याशी घोषित नहीं किया जा सका था। प्रदेश अध्यक्ष ने टेलीफोन पर उनसे बात कर प्रत्याशी का नाम तय किया।

Tuesday, December 1, 2009

स्मिता के वेलकम को कांग्रेस में उत्साह नहीं

शिवसेना और कांग्रेस दोनों खेमों में ठाकरे परिवार की बहू स्मिता ठाकरे के मामले पर ज्यादा उत्सुकता का माहौल नहीं दिखाई दे रहा है। उलटे इस घटना को नजरअंदाज करने का ही आलम है। खासतौर से शिवसेना द्वारा यह जाहिर किया जा रहा है कि 'स्मिता यदि कल-परसों के बजाय आज और अभी चली जाएं तो बेहतर होगा।' सूत्रों के अनुसार, शिवसेना प्रमुख बाल ठाकरे के दोनों बेटे- जयदेव और उद्धव उन्हें मातोश्री से बाहर निकालने के लिए कब से आतुर हैं। जयदेव से तलाक के बाद से वे स्मिता को ठाकरे परिवार का सदस्य नहीं मानते। हालांकि बाला साहेब के कारण खुले तौर पर यह कहने से बचते रहे हैं। ठाणे में रविवार को एक कार्यक्रम के बाद पत्रकारों से बातचीत में उद्धव ने कहा कि 'आप चित्रे की नहीं, चित्रों की बात करिए' उनका मतलब स्मिता के विवाह पूर्व सरनेम (चित्रे) से था। वह यह संदेश देना चाहते थे कि स्मिता का ठाकरे सरनेम से कोई लेना-देना नहीं है।
तलाक के बाद जयदेव ने एक इंटरव्यू में कहा था कि स्मिता को अब अपने नाम के साथ ठाकरे नहीं लगाना चाहिए। उसके बाद भी मातोश्री में स्मिता का वास्तव्य बना रहा है। इस वास्तु की पहली मंजिल पर वह, दूसरी पर बाला साहेब और तीसरी मंजिल पर उद्धव रहते हैं। कांग्रेस में जाने की इच्छा जाहिर करने के बाद से स्मिता मातोश्री नहीं आईं। वह जुहू स्थित अपने लक्ष्मी बंगले में ही हैं। यह बात सर्वविदित है कि शिवसेना में स्मिता का कभी कोई खास रोल नहीं रहा। युति के शासन काल में वह सत्ता केन्द्र थीं पर पार्टी में उनका कोई योगदान नहीं था। सामाजिक और राजनीतिक स्तर पर जिसे नकारात्मक योगदान माना जाता है, स्मिता उस श्रेणी में गिनी जाती रही हैं। हालांकि फिल्म और टीवी में उन्होंने सिक्का जमाया है। इसीलिए शिवसैनिकों पर स्मिता के ऐलान का असर नहीं हुआ है और कांग्रेस में भी उनके बारे में ज्यादा उत्सुकता नहीं है। राज्य स्तर पर कांग्रेस में किसी को उनके शामिल होने के बारे में कोई जानकारी नहीं है, न ही यह पता है कि दिल्ली में स्मिता किसके संपर्क में है? चर्चा है कि जिस तरह गांधी परिवार की एक बहू (मेनका) को बीजेपी ने अपने धड़े में स्थान दिया है, उसी तरह कांग्रेस पार्टी ठाकरे परिवार की बहू को अपनी छत्रछाया में रखने का रवैया अपना सकती है। पर राज्य के कांग्रेसियों को लगता है कि स्मिता की राजनीतिक कीमत मेनका जितनी नहीं है। इसलिए उन्हें शामिल करने से पहले इसका जायजा लिया जाना चाहिए कि पार्टी को इससे फायदा ज्यादा होगा या नुकसान! फिलहाल इसी उधेड़बुन में है कांग्रेसी।

34 सांसदों की गैर मौ

नई दिल्लीलोकसभा में प्रश्नकाल के दौरान सोमवार को प्रश्न पूछने वाले करीब 34 सांसदों की गैर मौजूदगी के कारण सदन को स्थगित करना पड़ा। करीब दो दशक में ऐसा पहली बार हुआ है जब प्रश्न पूछने वाले इतने ज्यादा सांसद बिना बताए गैर हाजिर रहे। लोकसभा अध्यक्ष मीरा कुमार ने जहां इसे गंभीर मुद्दा बताया वहीं कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी ने अपनी पार्टी के गैर हाजिर सदस्यों से सफाई मांगी है।

सांसदों के इस गैर-जिम्मेदाराना रवैये से आहत कुमार ने पूर्व अध्यक्ष सोमनाथ चटर्जी के अंदाज में सांसदों को तो नहीं लताड़ा, लेकिन सदन के बाहर इतना अवश्य कहा कि ये गंभीर मुद्दा है, प्रश्नकाल लोकतंत्र का सार है।

गायब रहने वालों में कांग्रेस, भाजपा, शिवसेना, भाकपा, जद (यू) समेत कई पार्टियों के सांसद शामिल थे।

सदन के नेता प्रणव मुखर्जी व संसदीय कार्य मंत्री पीके बंसल आश्चर्यचकित देख रहे थे। पहला सवाल पूछने वाले सांसद हर्षवर्धन भी गैर-हाजिर ही थे। उसके बाद आए ग्रामीण मंत्रालय से जुड़े सवाल अवश्य पूरे हो गए। तीन सवालों के बाद मीरा कुमार एक-एक कर सवाल पूछने वाले बाकी सांसदों के नाम पुकारती रहीं। एक सवाल पूछने के लिए दो-दो सांसदों के नाम शामिल थे। लेकिन 17 सवालों को पूछने वाले सांसद सदन से नदारद थे। इस अजीबोगरीब स्थिति के कारण मीरा कुमार को 11 बजकर 27 मिनिट पर ही प्रश्नकाल स्थगित करना पड़ा। यह 12 बजे तक चलता है। किसी सांसद ने अनुपस्थिति की पूर्वसूचना भी नहीं दी थी।

इनसे जुड़े थे 20 सवाल :

वाणिज्य और उद्योग, संचार, रक्षा, श्रम, रोजगार, ग्रामीण विकास, पंचायती राज, सामाजिक न्याय मंत्रालय

ये नहीं थे मौजूद

वरुण गांधी (भाजपा), श्रुति चौधरी, मधु गौड यक्षी, एकनाथ गायकवाड़, बी झांसी लक्ष्मी (सभी कांग्रेस), आनंद राव अडसुल, शिवाजी ए पाटील, (शिवसेना) प्रबोध पांडा (भाकपा), राजीव रंजन सिंह (जदयू), असदुद्दीन ओवैसी (एआईएमआईएम) पीटी थामस, राधा मोहन सिंह, अहीर विक्रम भाई

‘लोकसभा में प्रश्नकाल के दौरान सदस्यों की गैर मौजूदगी के मुद्दे पर संसदीय कार्य मंत्रणा समिति में विचार किया जाएगा।’

भूख हड़ताल और आंदोलन खत्म नहीं

तेलंगाना मुद्दे पर अनशन कर रहे टीआरएस अध्यक्ष के चंद्रशेखर राव ने आज दावा किया कि उन्होंने अपनी भूख हड़ताल और आंदोलन खत्म नहीं किया है.राव ने कहा कि मुझे जबर्दस्ती अस्पताल ले जाया गया, जहां मुझे जूस पिलाया गया. यह सरकार का षड्यंत्र था. मेरी भूख हड़ताल जारी है. इसके पूर्व राव ने खम्मम में अस्पताल के चिकित्सकों के हाथ से जूस पीकर भूख हड़ताल तोड़ दी थी. राव का भूख हड़ताल जारी रखने का दावा छात्रों और तेलंगाना मुद्दे पर प्रदर्शन कर रहे अन्य लोगों की आलोचना के बाद आया है.सरकार ने राव को गिरफ्तार करके जेल भेज दिया था, जहां से उन्हें चिकित्सकों की सलाह पर अस्पताल ले जाया गया था. अस्पताल पहुंचकर उन्होंने जूस पीकर अनशन तोड़ दिया था. उनके इस फैसले की बहुत निंदा हुई थी. इसके पूर्व टीआरएस द्वारा पृथक तेलंगाना मुद्दे और अपने नेता की गिरफ्तारी के विरोध में आयोजित 12 घंटे के बंद से सामान्य जनजीवन प्रभावित हुआ. कई स्थानों पर हिंसक घटनाओं की भी खबर है.बंद समर्थकों ने प्रदर्शन करते हुए हैदराबाद के तारनाका में दुकानों पर पेट्रोल बम फेंके. इसी तरह तेलंगाना के करीमनगर, वारंगल, निजामाबाद और मेदक में सरकारी बसों पर पेट्रोल बम फेंकने की भी खबर है.

अंबेडकर पार्क पर सुप्रीम कोर्ट से यूपी सरकार की अपील खारिज

सुप्रीम कोर्ट ने अंबेडकर पार्क मसले पर यूपी सरकार द्वारा की गई अपील को खारिज कर दी है. इस मामले पर अब अलगी सुनवाई 19 जनवरी को होगी.मायावती प्रत्‍येक साल 6 दिसंबर को अंबेडकर जयंती धूमधाम से मनाती है. पर इस बार अंबेडकर पार्क को जनता के लिए खोल कर अंबेडकर जयंती मनाने की मायावती की इच्‍छा अधूरी रह जाएगी. सुप्रीम कोर्ट ने मायावती सरकार की अपील को मानने से इंकार कर दिया है.