Sunday, September 5, 2010

वसुंधरा, माथुर सहित कई नेताओं की सुरक्षा हटाई

सरकार ने पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे, सांसद ओमप्रकाश माथुर समेत कई भाजपा नेताओं की सुरक्षा हटा ली है।अचानक सुरक्षाकर्मी बुलाए जाने से नाराज भाजपा नेताओं ने सरकार पर ओछी मानसिकता का आरोप लगाया है। सूत्रों के अनुसार 2 सितंबर को सरपंचों के आंदोलन का समर्थन करने के बाद विधायकों और सांसदों की गिरफ्तारी से ठीक पहले देर रात सभी सुरक्षा गार्डो को वापस बुला लिया गया था। इसके बाद अभी तक ये गार्ड वापस नहीं लौटे हैं।गृहमंत्री और डीजी ने कहा-हमें पता ही नहीं: गृहमंत्री शांति धारीवाल ने इस बारे में कहा कि उन्हें इसकी जानकारी नहीं है। वे फिलहाल कोटा में हैं, इसलिए पुलिस महानिदेशक हरीशचंद्र मीना ही कुछ बता सकते हैं। मीना ने कहा कि उन्हें भी इस बारे में कुछ नहीं पता। वे फाइल देखकर ही बता सकते हैं। शेष x पेज ४मैं तो कल भी अकेला ट्यूर करके आया हूं: ओमप्रकाश माथुर का कहना है कि मुझे वाई श्रेणी की सुरक्षा मिली हुई है। मेरे सभी सुरक्षाकर्मी 2 सितंबर की रात्रि वापस बुला लिए गए। कारण मुझे पता नहीं है। मैं तो शनिवार को भी अकेला ही टूर करके आया हूं। सरकार की ओछी मानसिकता: पूर्व मंत्री राजेन्द्र राठौड़ का कहना है कि उन्हें धमकियां मिली हुई हैं। सीआईडी सीबी की रिपोर्ट पर उन्हें दो सुरक्षाकर्मी उपलब्ध कराए गए थे। सरपंच आंदोलन के समर्थन में हमारी गिरफ्तारी से पहले इन गार्डो को अचानक बुला लिया गया। यह सरकार की ओछी मानसिकता है। अब कुछ हुआ तो सरकार की जिम्मेदारी: पूर्व मंत्री डॉ. दिगंबरसिंह ने कहा कि मौजूदा राजनीतिक वातावरण को देखते हुए उन्हें सीआईडी की रिपोर्ट पर सुरक्षा मुहैया कराई गई थी। सरकार ने सरपंच आंदोलन के कारण उनके सभी सुरक्षाकर्मी वापस बुला लिए। अब यदि उनके साथ कोई अप्रिय घटना होती है तो उसकी जिम्मेदारी सरकार की होगी। इनके हटाए सुरक्षाकर्मीराज्यसभा सांसद ओमप्रकाश माथुर, पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधराराजे, सांसद डॉ. किरोड़ीलाल, पूर्व मंत्री राजेन्द्र राठौड़, डॉ. दिगंबरसिंह के सभी सुरक्षाकर्मी वापस बुला लिए गए हैं। इनमें से माथुर, वसुंधरा और किरोड़ीलाल को वाई श्रेणी की सुरक्षा मिली है। इन नेताओं का कहना है कि उन्हें लिखित या मौखिक आदेश भी नहीं दिया गया।

Thursday, September 2, 2010

विधायक पुत्र के साथ मारपीट

श्रीडूंगरगढ के कांग्रेस विधायक मंगलाराम गोदारा के पुत्र को घेरकर कुछ लोगों ने मारपीट कर दी। यह घटना पूनरासर गांव में गुरूवार दोपहर को हुई। इससे उनके चोटें आई। मारपीट के कारणों का अभी खुलासा नहीं हो सका है।
पुलिस ने बताया कि मारपीट में घायल हुए विधायक पुत्र केसराराम गोदारा (35) को यहां पीबीएम अस्पताल में भर्ती कराया गया है। उनके बयान अभी तक दर्ज नहीं हुए। उधर, घटना की सूचना मिलने पर अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक सतीश चंद्र जांगिड, वृत्ताधिकारी सदर सरजीत सिंह व अन्य घटनास्थल गांव पूनरासर पहुंच गए तथा आरोपियों की तलाश शुरू कर दी।

सोनिया बनेंगी चौथी बार कांग्रेस अध्यक्ष

नई दिल्ली। सोनिया गांधी शुक्रवार को चौथी बार कांग्रेस अध्यक्ष बनकर नया रिकॉर्ड बनाएंगी। उनका फिर से अध्यक्ष चुना जाना तय हो गया है। गुरूवार को एकमात्र पर्चा उन्होंने ही दाखिल किया। इस औपचारिकता को पूरा करने में प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह, कांग्रेस महासचिव राहुल गांधी समेत सभी पदाघिकारियों, कांग्रेस शासित राज्यों के मुख्यमंत्रियों, केन्द्रीय मंत्रियों व प्रदेश अध्यक्षों ने अपना योगदान दिया। केन्द्रीय चुनाव प्राघिकरण के अध्यक्ष आस्कर फर्नांडीस ने बताया कि सोनिया गांधी के समर्थन में 56 प्रस्ताव आए जिसमें से एक प्रस्ताव चंडीगढ का रद्द किया गया।
शुक्रवार को बाकी औपचारिकताएं पूरी करने के बाद शाम को सोनिया को फिर अध्यक्ष चुने जाने की घोषणा की जाएगी। पार्टी संविधान के अनुसार अध्यक्ष पद के लिए उम्मीदवार को स्वयं नामांकन भरना जरूरी नहीं है। कोई भी दस मतदाता उम्मीदवार की लिखित सहमति के बाद उनके नाम का प्रस्ताव करते हैं।
पीएम ने भरा पहला प्रस्तावसोनिया ने 1998 में पार्टी की कमान संभाली थी। सोनिया गांधी को अध्यक्ष बनाने का सबसे पहला प्रस्ताव गुरूवार को प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने भरा। इसके बाद प्रणव मुखर्जी के नेतृत्व में मंत्री व पदाघिकारी शामिल हुए। राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत, प्रदेश अध्यक्ष सीपी जोशी सहित कई नेताओं ने कांग्रेस अध्यक्ष के समर्थन में पर्चे भरे।

गुस्साए सरपंचों का विधानसभा कूच आज

जयपुर । जयपुर में स्टेच्यू सर्किल के पास उद्योग मैदान में दो दिन से जमे राज्यभर के सरपंचों ने शुक्रवार को सुबह 11 बजे विधानसभा की ओर कूच करने का ऎलान किया है। सरपंच ग्राम पंचायतों का सामाजिक अंकेक्षण और अधिकारों में की गई कटौती समाप्त करने की मांग कर रहे हैं। पडाव स्थल पर सरपंचों के साथ बैठे भाजपा व निर्दलीय विधायकों और सांसद किरोडी लाल मीणा ने भी कूच में शामिल होने का ऎलान किया है। इस बीच खबर है कि स्टेच्य सर्किल पर जमे सरपंचों को देर रात पुलिस ने हटा दिया है तथा पडाव स्थल से भाजपा नेता ओम बिरला व राजेन्द्र राठौड तथा सांसद मीणा को उठा कर उन्हें गुप्त स्थान पर ले जाया गया है। विधानसभा की तरफ जाने वाले मार्गों पर सुरक्षा बढा दी गई है तथा बेरिकेट्स लगाए गए हैं।
सरपंचों में पुलिस के लाठीचार्ज को लेकर आक्रोश है। पडाव स्थल पर दिनभर चली सभा के दौरान लोगों ने लाठीवार की निंदा की। सरपंचों का कहना था कि जब तक उनकी मांगें मानी नहीं जाती तब तक आंदोलन जारी रहेगा। भाजपा विधायक ओम बिडला व सांसद मीणा ने सरपंचों से आह्वान किया कि सरपंच साथियों व समर्थकों को रातों रात जयपुर बुलाएं। पडावस्थल पर नई संघर्ष समिति भी गठित की गई। इस बीच सांसद किरोडीलाल मीणा को सरकार की ओर से दी गई वाई श्रेणी की सुरक्षा देर रात्रि हटा दी गई। मीणा के अनुसार उनके सुरक्षाकर्मियों ने बताया कि उन्हें पुलिस लाइन बुलाए जाने का आदेश मिला है।
सरपंचों में गुटबाजी पडाव के दौरान सरपंचों में गुटबाजी भी नजर आई। यह गुटबाजी उद्योग मैदान में पडाव शुरू होने के साथ ही शुरू हो गई थी। शुक्रवार को भी यह देखने को मिली। कांग्रेस की विचारधारा वाले सरपंच पडाव स्थल पर बिखरे नजर आए।
बातचीत से मामला सुलझाए सरकारसरपंचों के कूच में भाजपा विधायक शामिल होंगे। यह आंदोलन सरपंचों का है और उन्हें ही आंदोलन की रणनीति तैयार करनी है। संवेदनहीन हो चुकी सरकार ने महिलाओं को भी नहीं छोडा। सरकार को मामला बातचीत से सुलझाना चाहिए लेकिन सरकार डण्डे बरसा रही है। वसुन्धरा राजे, राष्ट्रीय महामंत्री, भाजपा
'हिंसा हुई तो भाजपा जिम्मेदार'मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने गुरूवार को आरोप लगाया कि भाजपा व उनकी पूर्व मुख्यमंत्री सरपंचों के आंदोलन में हिंसा भडकाने का षड्यंत्र कर रही हैं। गहलोत ने इसे राज्य की परम्परा के खिलाफ बताते हुए निन्दा की और कहा कि शुक्रवार को कोई हिंसा हुई तो भाजपा व पूर्व मुख्यमंत्री इसके लिए जिम्मेदार होंगे।
उन्होंने सरपंचों से भी अपील की, वे शांतिपूर्ण तरीके से अपनी मांगें रखें, वार्ता के द्वार खुले हैं। सरकार खुले दिमाग से उनकी मांगों पर विचार कर जरूरी कार्रवाई करेगी। वे कानून हाथ में नहीं लें और सरपंचों के नाम पर हिंसा फैलाने वालों से सावधान रहें। सरपंचों के सहयोग के बिना ग्रामीण विकास नहीं हो सकता। अपने निवास पर पत्रकारों से बातचीत में गुरूवार को गहलोत ने कहा कि लोकतंत्र में आंदोलन का सबको हक है। सरपंचों की मांग पर पंचायती राज मंत्री ने एक कमेटी बनाई है जो गौर कर रही है।
इसमें भी दिक्कत नहीं लेकिन अब भाजपा ने अपने राजनीतिक स्वार्थ के लिए आंदोलन को हथिया लिया है। भाजपा के नेता, खास कर पूर्व मुख्यमंत्री, धरनास्थल पर जाकर भडकाऊ भाषण दे रहे हैं कि बदला लेना है। गुप्त बैठकें हो रही हैं और षडयंत्र किए जा रहे हैं कि किस तरह हिंसा हो। यह प्रयास और सोच निन्दनीय है।
गहलोत ने कहा कि सरपंच बुधवार को उनसे मिलना चाहते थे, वे तैयार भी थे, लेकिन उन्हें नहीं मिलने दिया गया। बाद में लाठीवार की दुर्भाग्यपूर्ण घटना हुई। गहलोत के अनुसार अपने शासनकाल में 21 बार गोलियां चला कर 90 लोगों को मार चुकी भाजपा व पूर्व मुख्यमंत्री को मलाल है कि कांग्रेस राज में गोली क्यों नहीं चल रही। उन्होंने कहा कि अपने राजनीतिक स्वार्थ पूरा करने के लिए हिंसा फैलाने के षडयंत्र का किसी को अघिकार नहीं।
जिस भाजपा ने पंचायतों के अघिकार वापस ले लिए, पांच साल तक कटारिया कमेटी का नाटक कर अघिकारों का मामला दबाए रखा। वे आज कि स हक से सरपंचों की तरफदारी कर रही हैं। इसका उन्हें नैतिक अघिकार ही नहीं है। भाजपा विधानसभा में अपनी बात रखे, लेकिन इस तरह आंदोलन का मकसद पीछे छोड कर सिर्फ राजनीतिक रोटियां सेंकने का हक किसी को नहीं है। उन्होंने कहा कि माकपा विधायक अमराराम व सांसद किरोडीलाल से भी उन्हें आंदोलन भडकाने की अपेक्षा नहीं है।
सरपंचों की मांग पर गहलोत ने कहा कि उनका सम्मान कायम रहना चाहिए। खरीद प्रक्रिया में बदलाव इसीलिए किया गया है कि सरपंच बदनाम न हों, उनकी विश्वसनीयता बनी रहे। इस मामले में सरपंचों की एकल पीठ में हार के बाद हाईकोर्ट में अपील भी लम्बित है और सरकार के पास सीमित विकल्प हैं।

Sunday, August 1, 2010

'मेरा जीना उतना जरूरी नहीं, जितना मुलायम का मरना'

अमर सिंह ने एसपी प्रमुख मुलायम सिंह यादव पर अब तक का सबसे करारा हमला किया। अमर ने
कहा कि उनके जीने से ज्यादा जरूरी मुलायम सिंह जैसे नेताओ का मरना। इलाहाबाद में रविवार शाम पीस पार्टी की एक जनसभा में लोकमंच के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमर सिंह की जुबान फ्रेंडशिप डे पर आग उगल रही थी। उन्होंने मुलायम पर अब तक का सबसे तीखा हमला किया। कभी मुलायम के सबसे नजदीकी दोस्त रहे अमर सिंह ने कहा कि मेरा जीना उतना जरूरी नहीं जितना मुलायम सिंह जैसे सियासतदारों का मरना जरूरी है। एसपी के पूर्व महासचिव अमर सिंह ने कहा कि मुलायम सिंह ने मुसलमानों के हित में कुछ करने के बजाय उन्हें हमेशा धोखा दिया है। मुसलमान मुलायम के चेहरे को अच्छी तरह से पहचान गए हैं। मालूम हो कि एसपी से निष्कासित किए जाने से पहले अमर सिंह अक्सर मुलायम से अपनी दोस्ती के बारे में कहते थे कि हम दो जिस्म एक जान हैं।



कांग्रेस को भारी पड़ेगी मोदी से पूछताछ : वेंकैया
सोहराबुद्दीन मामले में कथित तौर पर बीजेपी को निशाना बनाने के लिए सीबीआई के इस्तेमाल पर कां
ग्रेसनीत यूपीए की आलोचना करते हुए वरिष्ठ पार्टी नेता एम वेंकैया नायडू ने रविवार को कहा कि गुजरात के मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी से पूछताछ की खातिर कोई कदम उठाना कांग्रेस के लिए आत्मघाती साबित होगा। उन्होंने यहां संवाददाताओं से कहा, हमें जानकारी मिली है कि सोहराबुद्दीन मामले में गुजरात के मुख्यमंत्री नरेंद मोदी से सीबीआई पूछताछ करने वाली है। यह कांग्रेस पार्टी के लिए आत्मघाती साबित होगा। उन्होंने आरोप लगाया कि देश के एक खास समुदाय को तुष्ट करने के लिए कांग्रेस सोहराबुद्दीन मामले का इस्तेमाल कर बीजेपी के साथ राजनीतिक मुठभेड़ करना चाहती है।
उन्होंने कहा हमें यह भी जानकारी मिली है कि सीबीआई की योजना मामले में मोदी को फंसाने की है। इस दिशा में कोई कदम अंतत: कांग्रेस पार्टी के लिए आत्मघाती साबित होगा। नायडू ने कहा कि केंद्र या सीबीआई द्वारा गुजरात की छवि को प्रभावित करने के किसी भी प्रयास का पुरजोर विरोध किया जाएगा। उन्होंने कहा, 'आग से नहीं खेलना चाहिए। मोदी सर्वश्रेष्ठ मुख्यमंत्री हैं और उनके नेतृत्व में गुजरात विकास के रास्ते पर आगे बढ़ा है।'

जोशी ने किया आचार संहिता का उल्लंघन

राजकीय अतिथि मानते हुए कुछ शर्तो पर वहां ठहरने की अनुमति दी।
इसमें साफ कहा गया था कि वे किसी भी राजनीतिक कार्यकर्ता से नहीं मिलेंगे और न ही चुनाव के बारे में किसी संवाददाता से बातचीत करेंगे। इसके बावजूद वे उदयपुर से जयपुर जाते समय कुछ देर के लिए यहां सर्किट हाउस में ठहरे और पार्टी कार्यकर्ताओं से भी मिले। पार्टी कार्यकर्ताओं ने उनका स्वागत किया। इस दौरान जोशी ने सभी से कहा कि इस बार भी स्थानीय निकाय चुनाव में एकजुटता दिखाते हुए जीत दर्ज करें।
जिला कलक्टर से रिपोर्ट मांगेंगेजोशी को सर्किट हाउस में ठहरने की अनुमति दी थी, लेकिन वहां कार्यकर्ताओं से मिलने तथा संवाददाताओं से चुनाव के बारे में बातचीत करना चुनाव आचार संहिता का उल्लंघन है। इसकी रिपोर्ट जिला कलक्टर से मांगी जाएगी। ए.के. पाण्डे, आयुक्त, राज्य निर्वाचन आयोग, जयपुर केन्द्रीय ग्र्रामीण विकास एवं पंचायती राजमंत्री सी.पी. जोशी रविवार को न केवल भीलवाडा सर्किट हाउस में ठहरे, बल्कि पार्टी कार्यकर्ताओं से मिले और उन्हें एकजुट होकर स्थानीय निकाय चुनाव लडने की नसीहत देकर आचार संहिता का उल्लंघन किया। जोशी ने राज्य निर्वाचन आयोग से सर्किट हाउस में ठहरने की अनुमति मांगी थी। मुख्य निर्वाचन आयुक्त ए.के. पाण्डे ने उन्हें

गतिरोध खत्म, संसद में होगी महंगाई पर चर्चा

नई दिल्ली। महंगाई पर चर्चा को लेकर संसद की कार्यवाही में गतिरोध दूर करने के लिए वित्त मंत्री प्रणव मुखर्जी की टी पार्टी में विपक्षी दलों से सरकार की सुलह हो गई है। न तुम हारे न हम हारे की तर्ज पर केन्द्र सरकार महंगाई के मुद्दे पर संसद में चर्चा को तैयार हो गई। हालांकि अब यह चर्चा बिना किसी नियम के होगी। विपक्ष को अपनी बात रखने का पूरा मौका मिलेगा और सरकार भी जवाब देगी। इससे पहले विपक्ष नियम 184 के तहत चर्चा पर अडा था। इस नियम के तहत बाद में वोटिंग का प्रावधान है। उधर, सरकार नियम 193 के तहत चर्चा कराने को तैयार थी, इसमें वोटिंग का प्रावधान नहीं है। सूत्रों के अनुसार लोकसभा के नेता प्रणब मुखर्जी के निमंत्रण पर सुबह उनके निवास पर टी पार्टी में जुटे विपक्षी दलों के नेताओं ने इस फैसले पर सहमति जताई। बातचीत में तय हुआ कि लोकसभा में महंगाई पर चर्चा कल और राज्यसभा में चर्चा परसों होगी। बैठक के बाद आज सदन चलने को लेकर पूछे गए सवाल के जवाब में विपक्षी दलों के नेताओं का कहना था कि जब सरकार ने चर्चा कराने का वादा कर लिया है तो उसे आज सदन की कार्यवाही चलने में उन्हें कोई एतराज नहीं। प्रणब ने सभी राजनीतिक दलों के नेताओं को सुबह नाश्ते पर आमंत्रित किया था। नेता प्रतिपक्ष सुषमा स्वराज, समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष मुलायम सिंह यादव समेत कई नेता प्रणब के निवास पहुंचे। जनता दल (यू) नेता शरद यादव, माकपा नेता बासुदेब आचार्य, राजद अध्यक्ष लालू प्रसाद यादव और अन्य नेताओं को इस बैठक के लिए आमंत्रित थे। हालांकि विपक्षी कुछ बाते मानने से सरकार साफ किनारा कर गई। प्रस्ताव में मुद्रास्फीति की जगह 'महंगाई' व 'आम आदमी' जैसे शब्द जोडे जाने की विपक्ष की मांग ठुकरा दी गई है।ज्ञातव्य है कि संसद के मानसून सत्र का पहला सप्ताह महंगाई के मुद्दे पर विपक्षी दलों के हंगामे की भेंट चढ गया। विपक्ष जहां मतदान के प्रावधान वाले नियमों के तहत चर्चा कराने की मांग करता रहा वहीं सरकार ऎसे किसी भी नियम के तहत चर्चा से बचती नजर आई।