Monday, September 6, 2010

सीवीसी नियुक्ति पर भाजपा को वीटो पॉवर नहीं : कांग्रेस

नई दिल्ली. कांग्रेस ने मुख्य सतर्कता आयुक्त की नियुक्ति के मामले में भाजपा के विरोध को नकारते हुए कहा है कि विपक्ष की नेता को इस संबंध में वीटो का अधिकार नहीं है। कांग्रेस प्रवक्ता ने भाजपा पर संवैधानिक संस्थाओं के अवमूल्यन करने का आरोप लगाते हुए कहा है कि एक पद पर किसी की नियुक्ति का फैसला हो गया है तो इस आधार पर उसे नहीं नकारा जा सकता कि वह नियुक्ति विपक्ष की पंसद की नहीं है। सिंघवी ने कहा कि भाजपा का रुख निंदनीय है। उन्होंनें कहा कि नियुक्ति के संबंध में विचार-विमर्श किया जाता है लेकिन इसका यह मतलब नहीं है कि विपक्ष जिसे चाहता है उसे ही अहम पदांे पर नियुक्त किया जाए। कांग्रेस प्रवक्ता ने कहा कि भाजपा इसके पहले भी चुनाव आयोग और गुजरात मामले में कोर्ट के संबंध में ऐसा ही नकारात्मक रुख अपनाती रही है।थॉमस के चयन पर बिफरे शरदकेंद्रीय दूरसंचार सचिव पीजे थॉमस को अगले मुख्य सतर्कता आयुक्त के चुनने की प्रक्रिया पर जदयू अध्यक्ष शरद यादव ने कड़ी आपत्ति दर्ज कराई है। भास्कर से बातचीत में वरिष्ठ नेता ने कहा कि इस हाईप्रोफाइल पद पर कौन दौड़ में रहे, मैं इसके विस्तार में जाने की बजाय चयन प्रक्रिया को देखकर चिंतित हूं। उन्होंने कहा, ‘प्रधानमंत्री, गृह मंत्री और विपक्ष की नेता को मिलाकर केवल तीन सदस्यीय समिति की स्थापना उपयुक्त अधिकारी की सर्वसम्मति से चयन के लिए की गई थी, लेकिन आम सहमति के बगैर ही देश को मुख्य चुनाव आयुक्त थोपने की कोशिश की जा रही है।’ थॉमस के नाम पर प्रधानमंत्री और गृह मंत्री की तो सहमति है, पर विपक्ष की नेता सुषमा स्वराज ने असहमति जता दी थी।

Sunday, September 5, 2010

कांग्रेस में एक भी ‘मर्द’ बचा है?: शिवसेना

सोनिया गांधी के लगातार चौथी बार कांग्रेस अध्यक्ष निर्वाचित होने के एक दिन बाद शिवसेना ने शनिवार को उनके विदेशी मूल का मुद्दा एक बार फिर उठाते हुए कांग्रेस में किसी 'पुरुष' के होने पर शंका जताई।पार्टी के मुखपत्र 'सामना' में एक तीखे संपादकीय में बाल ठाकरे की पार्टी ने सोनिया पर हमला करते हुए सवाल उठाया कि क्या कांग्रेस में कोई 'मर्द' है जो गांधी परिवार को चुनौती दे सकता है।संपादकीय में कहा गया, "कभी कहा जाता था कि इंदिरा गांधी (दिवंगत प्रधानमंत्री) अपने मंत्रिमंडल में एकमात्र मर्द हैं। सोनिया गांधी के युग में हम पूछ सकते हैं कि क्या कांग्रेस में एक भी मर्द बचा है? यदि ऐसा है तो उन्हें एक विदेशी महिला के सामने पार्टी के गर्व को समर्पित नहीं करना चाहिए।"सामना ने कहा कि कांग्रेस की स्थापना एक विदेशी ए. ओ .ह्यूम ने की थी लेकिन विदेशी होने के कारण वे भी कभी पार्टी अध्यक्ष नहीं बने। इसके बजाए दादाभाई नौरोजी या सुरेंद्रनाथ बनर्जी जैसे भारतीय दिग्गजों को कांग्रेस का अध्यक्ष बनाया गया।‘सामना’ के अनुसार वर्ष 1998 में जब शरद पवार, माखनलाल फोतेदार और भजनलाल जैसे नेताओं ने तत्कालीन कांग्रेस अध्यक्ष सीताराम केसरी को जबरन हटाकर राजीव गांधी की विधवा सोनिया को पार्टी अध्यक्ष बनाया था, तो उनका मानना था कि वे उनसे अपनी मर्जी के मुताबिक काम करवाएंगे।इन सभी नेताओं को सोनिया माइनो गांधी के विदेशी मूल पर सवाल खड़ा करने के कारण पार्टी छोड़ने को विवश होना पड़ा और इसके बाद मनमोहन सिंह प्रधानमंत्री बने।
संपादकीय के अनुसार अब सोनिया गांधी के जीवन का प्राथमिक लक्ष्य अपने बेटे राहुल गांधी को देश का प्रधानमंत्री बनाना है, लेकिन पार्टी के किसी भी व्यक्ति में उन्हें चुनौती देने का साहस नहीं है।‘सामना’ ने लिखा है कि जिस पार्टी में कभी महात्मा गांधी के फैसलों पर सवाल उठाए जाते और उन्हें चुनौती दी जाती थी, वहीं अब उसी पार्टी के लोगों में घुटने टेककर सोनिया गांधी के फैसलों को स्वीकार करने की प्रवृत्ति है।

विश्वसनीय छत्तीसगढ़’ आम जनता के लिए जारी

नितिन गडकरी ने रविवार को मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह के निवास पर राज्य के लिए प्रदेश सरकार द्वारा तैयार नया प्रतीक वाक्य ‘विश्वसनीय छत्तीसगढ़’ को आम जनता के लिए जारी किया। राज्य शासन द्वारा अपनी योजनाओं के प्रचार-प्रसार और जनसम्पर्क अभियानों में इस प्रतीक वाक्य का इस्तेमाल किया जाएगा। श्री गडकरी ने कहा कि नए छत्तीसगढ़ राज्य में प्रदेश सरकार की विभिन्न जन-कल्याणकारी योजनाओं के सफल क्रियान्वयन से आम जनता में विकास और विश्वास का एक नया वातावरण निर्मित हुआ है।मुख्यमंत्री डॉ.सिंह ने श्री गडकरी को बताया कि अपार क्षमताओं, अवसरों और अपार सद्भावना की धरती छत्तीसगढ़ ने पिछले दस वर्षो में यह साबित कर दिया है कि अंतर्राष्ट्रीय परिदृश्य में मजबूती से उभरते भारत और दुनिया के लोग अब छत्तीसगढ़ पर भरोसा करते हैं और यही अब छत्तीसगढ़ की नई पहचान बन गई है। मुख्यमंत्री ने कहा कि यही इस प्रतीक वाक्य की रचना की बुनियाद है। उन्होंने कहा कि पहले छत्तीसग़ढ की पहचान अपार प्राकृतिक संसाधनों से परिपूर्ण एक ऐसे राज्य के रूप में थी, जो देश की आजादी की लगभग आधी शताब्दी गुजर जाने के बाद भी पिछड़ेपन की छाया से मुक्त नहीं हो पाया था। राज्य में सामाजिक-आर्थिक विकास के अनेक क्षेत्रों में कई अभूतपूर्व और महत्वपूर्ण उपलब्धियां दर्ज की गयी। राज्य के संसाधनों में विकास की क्षमता के प्रति भी राज्य के भीतर और बाहर विश्वास की एक नई लहर देखी जा रही है। मुख्यमंत्री ने कहा कि इन्हीं भावनाओं को शामिल करते हुए छत्तीसगढ़ राज्य के नए प्रतीक ‘ विश्वसनीय छत्तीसगढ़’ की रचना की गई है। इसमें हर रंग राज्य की वन-संस्कृति और कृषि-संस्कृति का प्रतीक है। लाल रंग दस वर्ष पुराने नहीं बल्कि तरुणाई की ओर ब़ढते छत्तीसग़ढ के उत्साह, उमंग, जोश और गतिशीलता का प्रतीक है।मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य का यह नया प्रतीक वाक्य ‘विश्वसनीय छत्तीसग़ढ’ संस्कारों के लिए प्रतिबद्धता और समग्र विकास के लिए नवीन शिखरों तक पहुंचने के संकल्पों का भी प्रतीक है। उन्होंने कहा कि इन दो शब्दों को जो़डते हुए धान की जो सुनहरी बालियां इसमें प्रदर्शित की गयी है, उनका आकार एक उड़ते हुए सुनहरे पक्षी का है। यह राज्य में विकास की वर्तमान तेज गति और भविष्य की स्वर्णिम संभावनाओं का भी प्रतीक है। छत्तीसगढ़ और छत्तीसगढ़ियों का योगदान यह विश्वास दिलाता है कि भारत की विकास गाथा में छत्तीसगढ़ की वर्तमान भूमिका के साथ-साथ भावी भूमिका और भी ज्यादा महत्वपूर्ण रहेगी।

वसुंधरा, माथुर सहित कई नेताओं की सुरक्षा हटाई

सरकार ने पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे, सांसद ओमप्रकाश माथुर समेत कई भाजपा नेताओं की सुरक्षा हटा ली है।अचानक सुरक्षाकर्मी बुलाए जाने से नाराज भाजपा नेताओं ने सरकार पर ओछी मानसिकता का आरोप लगाया है। सूत्रों के अनुसार 2 सितंबर को सरपंचों के आंदोलन का समर्थन करने के बाद विधायकों और सांसदों की गिरफ्तारी से ठीक पहले देर रात सभी सुरक्षा गार्डो को वापस बुला लिया गया था। इसके बाद अभी तक ये गार्ड वापस नहीं लौटे हैं।गृहमंत्री और डीजी ने कहा-हमें पता ही नहीं: गृहमंत्री शांति धारीवाल ने इस बारे में कहा कि उन्हें इसकी जानकारी नहीं है। वे फिलहाल कोटा में हैं, इसलिए पुलिस महानिदेशक हरीशचंद्र मीना ही कुछ बता सकते हैं। मीना ने कहा कि उन्हें भी इस बारे में कुछ नहीं पता। वे फाइल देखकर ही बता सकते हैं। शेष x पेज ४मैं तो कल भी अकेला ट्यूर करके आया हूं: ओमप्रकाश माथुर का कहना है कि मुझे वाई श्रेणी की सुरक्षा मिली हुई है। मेरे सभी सुरक्षाकर्मी 2 सितंबर की रात्रि वापस बुला लिए गए। कारण मुझे पता नहीं है। मैं तो शनिवार को भी अकेला ही टूर करके आया हूं। सरकार की ओछी मानसिकता: पूर्व मंत्री राजेन्द्र राठौड़ का कहना है कि उन्हें धमकियां मिली हुई हैं। सीआईडी सीबी की रिपोर्ट पर उन्हें दो सुरक्षाकर्मी उपलब्ध कराए गए थे। सरपंच आंदोलन के समर्थन में हमारी गिरफ्तारी से पहले इन गार्डो को अचानक बुला लिया गया। यह सरकार की ओछी मानसिकता है। अब कुछ हुआ तो सरकार की जिम्मेदारी: पूर्व मंत्री डॉ. दिगंबरसिंह ने कहा कि मौजूदा राजनीतिक वातावरण को देखते हुए उन्हें सीआईडी की रिपोर्ट पर सुरक्षा मुहैया कराई गई थी। सरकार ने सरपंच आंदोलन के कारण उनके सभी सुरक्षाकर्मी वापस बुला लिए। अब यदि उनके साथ कोई अप्रिय घटना होती है तो उसकी जिम्मेदारी सरकार की होगी। इनके हटाए सुरक्षाकर्मीराज्यसभा सांसद ओमप्रकाश माथुर, पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधराराजे, सांसद डॉ. किरोड़ीलाल, पूर्व मंत्री राजेन्द्र राठौड़, डॉ. दिगंबरसिंह के सभी सुरक्षाकर्मी वापस बुला लिए गए हैं। इनमें से माथुर, वसुंधरा और किरोड़ीलाल को वाई श्रेणी की सुरक्षा मिली है। इन नेताओं का कहना है कि उन्हें लिखित या मौखिक आदेश भी नहीं दिया गया।

Thursday, September 2, 2010

विधायक पुत्र के साथ मारपीट

श्रीडूंगरगढ के कांग्रेस विधायक मंगलाराम गोदारा के पुत्र को घेरकर कुछ लोगों ने मारपीट कर दी। यह घटना पूनरासर गांव में गुरूवार दोपहर को हुई। इससे उनके चोटें आई। मारपीट के कारणों का अभी खुलासा नहीं हो सका है।
पुलिस ने बताया कि मारपीट में घायल हुए विधायक पुत्र केसराराम गोदारा (35) को यहां पीबीएम अस्पताल में भर्ती कराया गया है। उनके बयान अभी तक दर्ज नहीं हुए। उधर, घटना की सूचना मिलने पर अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक सतीश चंद्र जांगिड, वृत्ताधिकारी सदर सरजीत सिंह व अन्य घटनास्थल गांव पूनरासर पहुंच गए तथा आरोपियों की तलाश शुरू कर दी।

सोनिया बनेंगी चौथी बार कांग्रेस अध्यक्ष

नई दिल्ली। सोनिया गांधी शुक्रवार को चौथी बार कांग्रेस अध्यक्ष बनकर नया रिकॉर्ड बनाएंगी। उनका फिर से अध्यक्ष चुना जाना तय हो गया है। गुरूवार को एकमात्र पर्चा उन्होंने ही दाखिल किया। इस औपचारिकता को पूरा करने में प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह, कांग्रेस महासचिव राहुल गांधी समेत सभी पदाघिकारियों, कांग्रेस शासित राज्यों के मुख्यमंत्रियों, केन्द्रीय मंत्रियों व प्रदेश अध्यक्षों ने अपना योगदान दिया। केन्द्रीय चुनाव प्राघिकरण के अध्यक्ष आस्कर फर्नांडीस ने बताया कि सोनिया गांधी के समर्थन में 56 प्रस्ताव आए जिसमें से एक प्रस्ताव चंडीगढ का रद्द किया गया।
शुक्रवार को बाकी औपचारिकताएं पूरी करने के बाद शाम को सोनिया को फिर अध्यक्ष चुने जाने की घोषणा की जाएगी। पार्टी संविधान के अनुसार अध्यक्ष पद के लिए उम्मीदवार को स्वयं नामांकन भरना जरूरी नहीं है। कोई भी दस मतदाता उम्मीदवार की लिखित सहमति के बाद उनके नाम का प्रस्ताव करते हैं।
पीएम ने भरा पहला प्रस्तावसोनिया ने 1998 में पार्टी की कमान संभाली थी। सोनिया गांधी को अध्यक्ष बनाने का सबसे पहला प्रस्ताव गुरूवार को प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने भरा। इसके बाद प्रणव मुखर्जी के नेतृत्व में मंत्री व पदाघिकारी शामिल हुए। राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत, प्रदेश अध्यक्ष सीपी जोशी सहित कई नेताओं ने कांग्रेस अध्यक्ष के समर्थन में पर्चे भरे।

गुस्साए सरपंचों का विधानसभा कूच आज

जयपुर । जयपुर में स्टेच्यू सर्किल के पास उद्योग मैदान में दो दिन से जमे राज्यभर के सरपंचों ने शुक्रवार को सुबह 11 बजे विधानसभा की ओर कूच करने का ऎलान किया है। सरपंच ग्राम पंचायतों का सामाजिक अंकेक्षण और अधिकारों में की गई कटौती समाप्त करने की मांग कर रहे हैं। पडाव स्थल पर सरपंचों के साथ बैठे भाजपा व निर्दलीय विधायकों और सांसद किरोडी लाल मीणा ने भी कूच में शामिल होने का ऎलान किया है। इस बीच खबर है कि स्टेच्य सर्किल पर जमे सरपंचों को देर रात पुलिस ने हटा दिया है तथा पडाव स्थल से भाजपा नेता ओम बिरला व राजेन्द्र राठौड तथा सांसद मीणा को उठा कर उन्हें गुप्त स्थान पर ले जाया गया है। विधानसभा की तरफ जाने वाले मार्गों पर सुरक्षा बढा दी गई है तथा बेरिकेट्स लगाए गए हैं।
सरपंचों में पुलिस के लाठीचार्ज को लेकर आक्रोश है। पडाव स्थल पर दिनभर चली सभा के दौरान लोगों ने लाठीवार की निंदा की। सरपंचों का कहना था कि जब तक उनकी मांगें मानी नहीं जाती तब तक आंदोलन जारी रहेगा। भाजपा विधायक ओम बिडला व सांसद मीणा ने सरपंचों से आह्वान किया कि सरपंच साथियों व समर्थकों को रातों रात जयपुर बुलाएं। पडावस्थल पर नई संघर्ष समिति भी गठित की गई। इस बीच सांसद किरोडीलाल मीणा को सरकार की ओर से दी गई वाई श्रेणी की सुरक्षा देर रात्रि हटा दी गई। मीणा के अनुसार उनके सुरक्षाकर्मियों ने बताया कि उन्हें पुलिस लाइन बुलाए जाने का आदेश मिला है।
सरपंचों में गुटबाजी पडाव के दौरान सरपंचों में गुटबाजी भी नजर आई। यह गुटबाजी उद्योग मैदान में पडाव शुरू होने के साथ ही शुरू हो गई थी। शुक्रवार को भी यह देखने को मिली। कांग्रेस की विचारधारा वाले सरपंच पडाव स्थल पर बिखरे नजर आए।
बातचीत से मामला सुलझाए सरकारसरपंचों के कूच में भाजपा विधायक शामिल होंगे। यह आंदोलन सरपंचों का है और उन्हें ही आंदोलन की रणनीति तैयार करनी है। संवेदनहीन हो चुकी सरकार ने महिलाओं को भी नहीं छोडा। सरकार को मामला बातचीत से सुलझाना चाहिए लेकिन सरकार डण्डे बरसा रही है। वसुन्धरा राजे, राष्ट्रीय महामंत्री, भाजपा
'हिंसा हुई तो भाजपा जिम्मेदार'मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने गुरूवार को आरोप लगाया कि भाजपा व उनकी पूर्व मुख्यमंत्री सरपंचों के आंदोलन में हिंसा भडकाने का षड्यंत्र कर रही हैं। गहलोत ने इसे राज्य की परम्परा के खिलाफ बताते हुए निन्दा की और कहा कि शुक्रवार को कोई हिंसा हुई तो भाजपा व पूर्व मुख्यमंत्री इसके लिए जिम्मेदार होंगे।
उन्होंने सरपंचों से भी अपील की, वे शांतिपूर्ण तरीके से अपनी मांगें रखें, वार्ता के द्वार खुले हैं। सरकार खुले दिमाग से उनकी मांगों पर विचार कर जरूरी कार्रवाई करेगी। वे कानून हाथ में नहीं लें और सरपंचों के नाम पर हिंसा फैलाने वालों से सावधान रहें। सरपंचों के सहयोग के बिना ग्रामीण विकास नहीं हो सकता। अपने निवास पर पत्रकारों से बातचीत में गुरूवार को गहलोत ने कहा कि लोकतंत्र में आंदोलन का सबको हक है। सरपंचों की मांग पर पंचायती राज मंत्री ने एक कमेटी बनाई है जो गौर कर रही है।
इसमें भी दिक्कत नहीं लेकिन अब भाजपा ने अपने राजनीतिक स्वार्थ के लिए आंदोलन को हथिया लिया है। भाजपा के नेता, खास कर पूर्व मुख्यमंत्री, धरनास्थल पर जाकर भडकाऊ भाषण दे रहे हैं कि बदला लेना है। गुप्त बैठकें हो रही हैं और षडयंत्र किए जा रहे हैं कि किस तरह हिंसा हो। यह प्रयास और सोच निन्दनीय है।
गहलोत ने कहा कि सरपंच बुधवार को उनसे मिलना चाहते थे, वे तैयार भी थे, लेकिन उन्हें नहीं मिलने दिया गया। बाद में लाठीवार की दुर्भाग्यपूर्ण घटना हुई। गहलोत के अनुसार अपने शासनकाल में 21 बार गोलियां चला कर 90 लोगों को मार चुकी भाजपा व पूर्व मुख्यमंत्री को मलाल है कि कांग्रेस राज में गोली क्यों नहीं चल रही। उन्होंने कहा कि अपने राजनीतिक स्वार्थ पूरा करने के लिए हिंसा फैलाने के षडयंत्र का किसी को अघिकार नहीं।
जिस भाजपा ने पंचायतों के अघिकार वापस ले लिए, पांच साल तक कटारिया कमेटी का नाटक कर अघिकारों का मामला दबाए रखा। वे आज कि स हक से सरपंचों की तरफदारी कर रही हैं। इसका उन्हें नैतिक अघिकार ही नहीं है। भाजपा विधानसभा में अपनी बात रखे, लेकिन इस तरह आंदोलन का मकसद पीछे छोड कर सिर्फ राजनीतिक रोटियां सेंकने का हक किसी को नहीं है। उन्होंने कहा कि माकपा विधायक अमराराम व सांसद किरोडीलाल से भी उन्हें आंदोलन भडकाने की अपेक्षा नहीं है।
सरपंचों की मांग पर गहलोत ने कहा कि उनका सम्मान कायम रहना चाहिए। खरीद प्रक्रिया में बदलाव इसीलिए किया गया है कि सरपंच बदनाम न हों, उनकी विश्वसनीयता बनी रहे। इस मामले में सरपंचों की एकल पीठ में हार के बाद हाईकोर्ट में अपील भी लम्बित है और सरकार के पास सीमित विकल्प हैं।