Friday, April 5, 2013
Sunday, October 31, 2010
काली होगी महाराष्ट्र के सीएम की दीवाली
मुंबई की आदर्श हाउसिंग सोसायटी में अनियमितता के आरोपों पर मुसीबत में फंसे महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री अशोक चव्हाण पर फैसला जल्द होगा। कांग्रेस सूत्रों के हवाले से मीडिया में आ रही खबरों के मुताबिक आलाकमान चव्हाण के मामले पर अगले 48 घंटों में फैसला करेगा। रविवार को इस मुद्दे पर हुई बैठक में चव्हाण के उत्तराधिकारी को लेकर भी चर्चा की गई। इन आरोपों की जांच कर रही कांग्रेस की एक उच्च स्तरीय समिति ने मामले से जुड़े कागजातों के अध्ययन के लिए और समय मांगा है। समिति के दोनों सदस्यों रक्षा मंत्री एके एंटनी और वित्त मंत्री प्रणब मुखर्जी की रविवार रात हुई मुलाकात में यह फैसला लिया गया। मुलाकात के बाद प्रणब मुखर्जी ने कहा कि किसी भी फैसले से पहले हमें कुछ और दस्तावेज चाहिए। इनके अध्ययन के बाद ही सोनिया गांधी को रिपोर्ट दी जाएगी। सोनिया इसी रिपोर्ट के आधार पर अशोक चव्हाण के भविष्य का फैसला करेंगी। वैसे, मुखर्जी ने कहा कि इस मामले में देरी नहीं होगी और फैसला जल्द होगा। इससे पहले एके एंटनी ने भी कहा था कि इसमें अनावश्यक समय नहीं लगेगा। इस विषय में सामान्य समय लगेगा। फैसला जल्द लिया जाएगा।इस बीच, मुख्यमंत्री अशोक चव्हाण के लिए रविवार का दिन काफी भारी साबित हुआ। मुख्यमंत्री मीडिया से दूर रहने के लिए महाराष्ट्र सदन के बजाय अलग-अलग जगहों पर समय काटते रहे। वहीं उनके करीबी नेता मीडिया से मुलाकात में घोटाले में उनकी भूमिका को नगण्य साबित करने की कोशिश करते नजर आए। चव्हाण के एक करीबी नेता ने दैनिक भास्कर से कहा, ‘अगर इस पूरे प्रकरण में करगिल शब्द न जुड़ा होता तो मामला इतना तूल नहीं पकड़ता।’ मुख्यमंत्री के करीबी सूत्र पूरे विवाद में चव्हाण को कठघरे में खड़ा करने पर बचाव में तात्कालीन राजग सरकार, तब के मुख्यमंत्री विलासराव देशमुख, सुशील कुमार शिंदे और राकांपा नेता अजीत पवार की भूमिका पर भी सवाल उठा रहे हैं। इनका कहना है कि पूरे विवाद में सभी की भूमिका की जांच कर जवाबदेही तय होनी चाहिए। गौरतलब है कि ये सभी नाम ऐसे हैं, जो चव्हाण के उत्तराधिकारी के लिए चल रही दौड़ में शामिल हैं।
Thursday, September 9, 2010
संघ के 'मुंडा तीर' से आडवाणी पस्त
झारखंड में जेएमएम के साथ बीजेपी गठबंधन के घोर विराधी रहे बीजेपी के वरिष्ठ नेता लाल कृष्ण
आडवाणी पार्टी प्रेजिडेंट नितिन गडकरी से खासा नाराज हैं। आडवाणी खेमे से आ रही खबरों के मुताबिक, आडवाणी आज अर्जुन मुंडा के शपथ समारोह में शामिल नहीं होंगे। सूत्रों से मिली जानाकारी के मुताबिक, जिस तरह पार्टी प्रेजिडेंट नितिन गडकरी ने झारखंड में सरकार बनाने के निर्णय से आडवाणी को दूर रखा, उससे पार्टी में साफ संदेश गया कि अब पार्टी के अहम निर्णय में अब आडवाणी को महत्व नहीं दिया जाएगा। वैसे, अर्जुन मुंडा के शपथ समारोह में खास तौर पर शामिल होने के लिए पार्टी प्रेजिडेंट बीती रात अपने रूस दौर से लौट आए हैं। गौरतलब है कि जेएमएम के साथ सरकार बनाने के निर्णय पर नितिन गडकरी ने पार्टी पार्लियामेंट बोर्ड जिसके चेयरमैन आडवाणी है, से कोई सलाह-मश्विरा नहीं किया। उनका यह निर्णय नागपुर की आरएसएस लॉबी के चलते लिया गया है, वहीं बीजेपी में उनके इस निर्णय का समर्थन पूर्व पार्टी प्रेजिडेंट राजनाथ सिंह कर रहे हैं।
सू्त्रों से मिली जानकारी के अनुसार, संघ झारखंड में ज्यादा दिनों तक प्रेजिडेंट रूल या फिर वहां कांग्रेस शासन को बिल्कुल नहीं चाहता है। संघ के वरिष्ठ अधिकारियों का मानना है कि झारखंड में चर्च के विस्तार पर अंकुश लगाने और धर्मांतरण को रोकने के लिए शिबू सोरेन को समर्थन देना संघ के दीर्घकालीन उद्देश्य को पूरा करने में फायदेमंद है। गौरतलब है कि देश में धर्मांतरण को रोकना संघ का दीर्घकालीन एजंडा है। संघ का साफ तौर पर मानना है कि भारत को अगर हिंदू राष्ट्र बनाना है तो उसे किसी भी कीमत पर देश में धर्मांतरण रोकना ही होगा। धर्मांतरण की वजह से पूर्वोत्तार भारत के राज्यों का जिस तरह से इसाईकरण हुआ है संघ नहीं चाहता कि वही हालात झारखंड में बने। उल्लेखनीय है कि आदिवासी बहुल इस राज्य में हाल में जिस तरह से कांग्रेस के समर्थन से चर्च और मिशनरियों का जिस तरहविस्तार हुआ है उसने संघ को चिंता में डाल दिया है। बीजेपी के जेएमएम के साथ सरकार चलाने के कड़वे अनुभव पर संघ ने गडकरी को कहा है कि बड़े उद्देश्य के लिए कभी-कभी कड़वा घूंट भी पीना पड़ता है।
आडवाणी पार्टी प्रेजिडेंट नितिन गडकरी से खासा नाराज हैं। आडवाणी खेमे से आ रही खबरों के मुताबिक, आडवाणी आज अर्जुन मुंडा के शपथ समारोह में शामिल नहीं होंगे। सूत्रों से मिली जानाकारी के मुताबिक, जिस तरह पार्टी प्रेजिडेंट नितिन गडकरी ने झारखंड में सरकार बनाने के निर्णय से आडवाणी को दूर रखा, उससे पार्टी में साफ संदेश गया कि अब पार्टी के अहम निर्णय में अब आडवाणी को महत्व नहीं दिया जाएगा। वैसे, अर्जुन मुंडा के शपथ समारोह में खास तौर पर शामिल होने के लिए पार्टी प्रेजिडेंट बीती रात अपने रूस दौर से लौट आए हैं। गौरतलब है कि जेएमएम के साथ सरकार बनाने के निर्णय पर नितिन गडकरी ने पार्टी पार्लियामेंट बोर्ड जिसके चेयरमैन आडवाणी है, से कोई सलाह-मश्विरा नहीं किया। उनका यह निर्णय नागपुर की आरएसएस लॉबी के चलते लिया गया है, वहीं बीजेपी में उनके इस निर्णय का समर्थन पूर्व पार्टी प्रेजिडेंट राजनाथ सिंह कर रहे हैं।
सू्त्रों से मिली जानकारी के अनुसार, संघ झारखंड में ज्यादा दिनों तक प्रेजिडेंट रूल या फिर वहां कांग्रेस शासन को बिल्कुल नहीं चाहता है। संघ के वरिष्ठ अधिकारियों का मानना है कि झारखंड में चर्च के विस्तार पर अंकुश लगाने और धर्मांतरण को रोकने के लिए शिबू सोरेन को समर्थन देना संघ के दीर्घकालीन उद्देश्य को पूरा करने में फायदेमंद है। गौरतलब है कि देश में धर्मांतरण को रोकना संघ का दीर्घकालीन एजंडा है। संघ का साफ तौर पर मानना है कि भारत को अगर हिंदू राष्ट्र बनाना है तो उसे किसी भी कीमत पर देश में धर्मांतरण रोकना ही होगा। धर्मांतरण की वजह से पूर्वोत्तार भारत के राज्यों का जिस तरह से इसाईकरण हुआ है संघ नहीं चाहता कि वही हालात झारखंड में बने। उल्लेखनीय है कि आदिवासी बहुल इस राज्य में हाल में जिस तरह से कांग्रेस के समर्थन से चर्च और मिशनरियों का जिस तरहविस्तार हुआ है उसने संघ को चिंता में डाल दिया है। बीजेपी के जेएमएम के साथ सरकार चलाने के कड़वे अनुभव पर संघ ने गडकरी को कहा है कि बड़े उद्देश्य के लिए कभी-कभी कड़वा घूंट भी पीना पड़ता है।
Tuesday, September 7, 2010
इंदौर में वीएचपी उपाध्यक्ष समेत 150 गिरफ्तार
इंदौर।। संवेदनशील धार्मिक स्थल पर प्रतिबंधात्मक आदेश तोड़ते हुए सभा की कोशिश कर रहे विश्व हिन्दू परिषद
के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष हुकुमचंद सांवला समेत 150 लोगों को यहां मंगलवार रात गिरफ्तार कर लिया गया। पुलिस सूत्रों ने बताया कि शहर के कर्बला मैदान स्थित हनुमान चबूतरे पर रक्षा समिति के कार्यकर्ताओं ने पूजा-पाठ और आरती की। इसके बाद सांवला ने जैसे ही चबूतरे से अपने संबोधन की शुरूआत की, पुलिस ने उन्हें और स्थानीय संगठन के कार्यकर्ताओं को गिरफ्तार कर लिया। उन्होंने बताया कि प्रशासन ने कर्बला मैदान पर धार्मिक सभा पर भारतीय दंड प्रक्रिया संहिता की धारा 144 के तहत एहतियातन रोक लगा रखी है। सूत्रों के मुताबिक सांवला समेत 150 लोगों को यह प्रतिबंध तोड़ने के आरोप में गिरफ्तार किया गया और जेल भेज दिया गया।
के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष हुकुमचंद सांवला समेत 150 लोगों को यहां मंगलवार रात गिरफ्तार कर लिया गया। पुलिस सूत्रों ने बताया कि शहर के कर्बला मैदान स्थित हनुमान चबूतरे पर रक्षा समिति के कार्यकर्ताओं ने पूजा-पाठ और आरती की। इसके बाद सांवला ने जैसे ही चबूतरे से अपने संबोधन की शुरूआत की, पुलिस ने उन्हें और स्थानीय संगठन के कार्यकर्ताओं को गिरफ्तार कर लिया। उन्होंने बताया कि प्रशासन ने कर्बला मैदान पर धार्मिक सभा पर भारतीय दंड प्रक्रिया संहिता की धारा 144 के तहत एहतियातन रोक लगा रखी है। सूत्रों के मुताबिक सांवला समेत 150 लोगों को यह प्रतिबंध तोड़ने के आरोप में गिरफ्तार किया गया और जेल भेज दिया गया।
मुंडा बन सकते हैं अगले मुख्यमंत्री !
झारखंड में तेजी से बदलते सियासी घटनाक्रम के बीच भाजपा ने पूर्व मुख्यमंत्री अर्जुन मुंडा को पार्टी विधायक दल का नया नेता चुन लिया है और वह झारखंड मुक्ति मोर्चा के समर्थन से मंगलवार को एक बजे राज्यपाल के समक्ष सरकार बनाने का दावा पेश करने वाली है।
इससे पहले नेता रघुवर दास ने आज पार्टी विधायक दल के नेता पद से इस्तीफा दे दिया। नए घटनाक्रम के मद्देनजर करीब तीन महीने बाद राज्य में चुनी हुई सरकार बनने का रास्ता साफ होता दिख रहा है और नए मुख्यमंत्री के तौर पर एक बार फिर मुंडा की ताजपोशी हो सकती है।
बीजेपी द्वारा समर्थन वापस लेने के बाद 30 मई को शिबू सोरेन ने झारखंड में मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा दे दिया था। तभी से वहां राष्ट्रपति शासन लागू है। लेकिन अब संकेत हैं कि झारखंड मुक्ति मोर्चा ने इस बार बीजेपी को बिना शर्त समर्थन देने का फैसला लिया है।
झारखंड के पूर्व मुख्यमंत्री शिबू सोरेन अपने बेटे हेमंत सोरेन के साथ सोमवार को दिल्ली में थे, जिस दौरान संकेत मिले हैं कि उनकी बीजेपी नेताओं से चर्चा हुई है। रांची लौटने के बाद शिबू ने कहा कि जनता अभी चुनाव नहीं चाहती और जेएमएम किसी भी समान विचारधारा वाले दल को समर्थन देने के लिए तैयार है।
इससे पहले नेता रघुवर दास ने आज पार्टी विधायक दल के नेता पद से इस्तीफा दे दिया। नए घटनाक्रम के मद्देनजर करीब तीन महीने बाद राज्य में चुनी हुई सरकार बनने का रास्ता साफ होता दिख रहा है और नए मुख्यमंत्री के तौर पर एक बार फिर मुंडा की ताजपोशी हो सकती है।
बीजेपी द्वारा समर्थन वापस लेने के बाद 30 मई को शिबू सोरेन ने झारखंड में मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा दे दिया था। तभी से वहां राष्ट्रपति शासन लागू है। लेकिन अब संकेत हैं कि झारखंड मुक्ति मोर्चा ने इस बार बीजेपी को बिना शर्त समर्थन देने का फैसला लिया है।
झारखंड के पूर्व मुख्यमंत्री शिबू सोरेन अपने बेटे हेमंत सोरेन के साथ सोमवार को दिल्ली में थे, जिस दौरान संकेत मिले हैं कि उनकी बीजेपी नेताओं से चर्चा हुई है। रांची लौटने के बाद शिबू ने कहा कि जनता अभी चुनाव नहीं चाहती और जेएमएम किसी भी समान विचारधारा वाले दल को समर्थन देने के लिए तैयार है।
Monday, September 6, 2010
विधानसभाः पक्ष-विपक्ष ने दी एक-दूसरे को देख लेने की धमकी
चंडीगढ़. विधानसभा में मानसून सत्र के दूसरे दिन जमकर हंगामा बरपा। एक बारगी तो ऐसी स्थिति आ गई कि विधानसभा अध्यक्ष हरमोहिन्दर सिंह चट्ठा को कुछ समय के लिए कार्यवाही स्थगित करनी पड़ी। विधायकों ने बांहें चढ़ा ली, एक- दूसरे को देख लेने की नौबत आ गई। चल बाहर-बाहर-चल बाहर जैसे शब्दों का प्रयोग होने लगा। विशेष बात यह भी देखने को मिली मुख्यमंत्री भूपेन्द्र सिंह हुड्डा ने खुद मोर्चा संभाला। विपक्ष के नेता ओमप्रकाश चौटाला से अधिकांश मुद्दों पर सीधी तकरार हुई। हुड्डा ने एकबारगी तो यहां तक कह दिया कि अगर आपको किसान हितैषी होने का गर्व है तो कंडेला जाकर पूछो, सच्चई पता चल जाएगी। बाद में चौटाला तो सदन से बाहर ही चले गए। एक बार उनकी उनको अपनी टिप्पणी वापस लेनी पड़ी।चौटाला ने शब्द वापस लिएचौटाला ने ऐसी आपत्तिजनक शब्दों को प्रयोग किया कि मुख्यमंत्री हुड्डा का पारा चढ़ गया। शब्द किसके लिए कहे यह तो समझ में नहीं आया लेकिन थाली में छेद करने वाली कहावत व सफेद कपड़ों में काली भेड़ जैसे शब्द सुनाई दिए। यह सुन मुख्यमंत्री तैश में आ गए, उनके साथ रणदीप सुरजेवाला व कैप्टन अजय सिंह यादव भी खड़े हो गए। सभी कहने लगे चौटाला शब्द वापस लें। इस पर अध्यक्ष बोले, आप शब्दवापस लें। चौटाला ने कहा, मेरे शब्दों से किसी को मानसिक पीड़ा हुई है तो मैं शब्द वापस लेता हूं। इस पर सीएम नहीं मानें। वे बोले, शब्द वापस लें। अध्यक्ष ने भी कह दिया कि पहले आप पहले यह बताओं की शब्द कहे या नहीं, हाउस तभी आगे चलेगा? पहले तो चौटाला अड़े रहे बाद में मुख्यमंत्री ने दबाव बढ़ाया तो चौटाला ने कहा, मैं अपने शब्द विदड्रा करता हूं। तब आगे की कार्रवाई चली।
दशहरा, दिवाली व छठ के बीच बिहार चुनाव से बिदके नेता
कुल 243 सीटों वाले बिहार विधानसभा का चुनाव छह चरणों तक खींचे जाने का अनुमान न तो नेताओं को था और न ही सूबे के नौकरशाहों को। नेता छह चरणों में चुनावों की घोषणा का तो इस्तेकबाल कर रहे हैं, लेकिन दशहरा, दिवाली और बिहार का सबसे पावन पर्व छठ के बीच चुनाव की घोषणा को वे गलत करार दे रहे हैं। चुनावों के बरक्स आयोग की घोषणा के साथ ही विभिन्न दलों के नेताओं ने छठ के ठीक पहले पांचवें चरण के चुनाव की तारीख में तब्दीली करने की मांग कर दी है। सूर्य की उपासना का पर्व छठ नहाय खाय, खरना और सूर्य को एक दिन शाम को और दूसरे दिन सूर्योदय के समय अघ्र्य के साथ तीन दिनों में संपन्न होता है।व्रत की तैयारी हफ्ते भर पहले से चलती है इस बीच माना जा रहा है कि विभिन्न दलों के प्रत्याशी चुनाव प्रचार नहीं करने के स्थिति में रहेंगे। दैनिक भास्कर से बातचीत करते हुए जदयू अध्यक्ष शरद यादव ने कहा, ‘चुनाव आयोग को छठ के ठीक पहले पांचवें चरण के चुनाव की तारीख बदलनी चाहिए। बिहार में छठ पर्व की महत्ता को देखते हुए 9 नवंबर को पांचवें चरण का चुनाव कराना किसी भी दृष्टि से ठीक नहीं।’ 5 नवंबर को दिवाली के छह दिनों के बाद छठ का पर्व होने के कारण तारीख आती है ११ नवंबर। माना जा रहा है कि व्रत का त्योहार तीन दिनों तक चलने का स्पष्ट असर चुनाव प्रचार पर पड़ेगा। ज्यादातर प्रत्याशियों को इस बात की भी चिंता सता रही है कि चुनावों के बीच आने वाले पर्व के कारण वोटरों तक अपनी बात असरदार तरीके से कैसे पहुंचाई जाए! राजद, लोजपा, भाजपा और कांग्रेस के कई नेताओं ने अलग-अलग बातचीत में स्वीकार किया कि कुछ चुनाव की कुछ तारीखों पर आयोग से बातचीत कर बीच का रास्ता निकालने की कोशिश की जाएगी। औसतन हर चरण में 40 सीटों पर चुनाव की तैयारी आयोग ने की है। चाहे नक्सल प्रभावित गया, जहानाबाद और नेपाल के सीमावर्ती सीमांचल इलाका हो या फिर मिथिलांचल, भोजपुर और कोशी का वृहत क्षेत्र, सभी 56 हजार 943 पोलिंग बूथों पर केंद्रीय बल की तैनाती सुनिश्चित करने के लिए ही आयोग ने पिछली दफा 5 चरण की बजाय इस बार छह चरण के चुनाव का प्रस्ताव तैयार किया है।
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