Friday, May 22, 2009

मंत्रियों ने नाम फाइनल

नई सरकार के मंत्रिमंडल को लेकर चल रही रस्साकशी खत्म होने की खबर है। मिली जानकारी के अनुसार 7 रेसकोर्स रोड में यूपीए चेअरपर्सन सोनिया गांधी और प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने मंत्रियों ने नाम फाइनल कर दिए हैं। आज शाम राष्ट्रपति भवन में आयोजित शपथ ग्रहण समारोह में प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह के साथ 19 मंत्रियों को शपथ दिलाई जाएगी। प्रधानमंत्री के इस नए मंत्रिमंडल में पी. चिदंबरम, प्रणव मुखर्जी, ए. के. ऐंटनी, शरद पवार, कपिल सिब्बल, आनंद शर्मा, सी.पी.जोशी, एस.एम.कृष्णा, गुलाम नबी आजाद, बी.के.हांडिक, प्रफुल्ल पटेल, मुरली देवड़ा, वीरप्पा मोइली, ममता बनर्जी और कमलनाथ शामिल हैं। सूत्रों के अनुसार आज शपथ लेने वाले मंत्रियों को यूपीए चेअरपर्सन सोनिया गांधी और प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने फोन कर सूचित कर दिया है।

वरुण गांधी पर अब मीडियाकर्मियों के साथ मारपीट करने का आरोप

विवाद बीजेपी का पीछा छोड़ता नहीं दिख रहा। बीजेपी सांसद वरुण गांधी पर अब मीडियाकर्मियों के साथ मारपीट करने का आरोप लगा है। उत्तर प्रदेश के पत्रकारों के एक समूह ने वरुण के खिलाफ 'दुर्व्यवहार' की शिकायत करते हुए पीलीभीत प्रशासन से उनके कार्यक्रम की कवरेज के दौरान सुरक्षा मुहैया कराए जाने की मांग की है। अलग-अलग मीडिया समूहों से जुड़े 30 पत्रकारों ने जिला अधिकारी को ज्ञापन सौंपा है। पीलीभीत जर्नलिस्ट असोसिएशन के अध्यक्ष मोहन कुमार ने कहा, 'हमने जिला प्रशासन से सुरक्षा मांगी है।' उनके मुताबिक 19 मई को संवाददाताओं ने बीजेपी के खराब प्रदर्शन पर वरुण की प्रतिक्रिया जानने के लिए संपर्क किया तो वरुण ने उनके साथ बदतमीजी की। कुमार के मुताबिक, 'वरुण नाराज हो गए और उन्होंने अपने सुरक्षाकर्मियों के साथ मिलकर कुछ टीवी चैनलों के पत्रकारों पर हमला भी किया। कुछ पत्रकारों के कैमरे तोड़ दिए।' जिलाधिकारी अजय चौहान ने संपर्क करने पर बताया कि उन्हें अभी तक ज्ञापन नहीं मिला है, लेकिन उन्होंने लोकल मीडिया में यह खबर देखी है कि वरुण ने पत्रकारों के साथ दुर्व्यवहार किया। उन्होंने कहा, 'ज्ञापन देखने के बाद हम जरूरी कदम उठाएंगे।'

वरुण गांधी पर अब मीडियाकर्मियों के साथ मारपीट करने का आरोप

विवाद बीजेपी का पीछा छोड़ता नहीं दिख रहा। बीजेपी सांसद वरुण गांधी पर अब मीडियाकर्मियों के साथ मारपीट करने का आरोप लगा है। उत्तर प्रदेश के पत्रकारों के एक समूह ने वरुण के खिलाफ 'दुर्व्यवहार' की शिकायत करते हुए पीलीभीत प्रशासन से उनके कार्यक्रम की कवरेज के दौरान सुरक्षा मुहैया कराए जाने की मांग की है। अलग-अलग मीडिया समूहों से जुड़े 30 पत्रकारों ने जिला अधिकारी को ज्ञापन सौंपा है। पीलीभीत जर्नलिस्ट असोसिएशन के अध्यक्ष मोहन कुमार ने कहा, 'हमने जिला प्रशासन से सुरक्षा मांगी है।' उनके मुताबिक 19 मई को संवाददाताओं ने बीजेपी के खराब प्रदर्शन पर वरुण की प्रतिक्रिया जानने के लिए संपर्क किया तो वरुण ने उनके साथ बदतमीजी की। कुमार के मुताबिक, 'वरुण नाराज हो गए और उन्होंने अपने सुरक्षाकर्मियों के साथ मिलकर कुछ टीवी चैनलों के पत्रकारों पर हमला भी किया। कुछ पत्रकारों के कैमरे तोड़ दिए।' जिलाधिकारी अजय चौहान ने संपर्क करने पर बताया कि उन्हें अभी तक ज्ञापन नहीं मिला है, लेकिन उन्होंने लोकल मीडिया में यह खबर देखी है कि वरुण ने पत्रकारों के साथ दुर्व्यवहार किया। उन्होंने कहा, 'ज्ञापन देखने के बाद हम जरूरी कदम उठाएंगे।'

उत्तराखंड की कमान कोश्यारी को!

उत्तराखंड में नए मुख्यमंत्री के नाम पर सहमति बनाने के लिए केंद्रीय पर्यवेक्षक गोपीनाथ मुंडे और थावरचंद गहलोत गुरूवार को देहरादून रवाना हो गए। शुक्रवार को तीन बजे वहां पार्टी विधायक दल की बैठक बुलाई गई है। मुंडे और गहलोत विधायकों से सलाह-मशविरा कर अपनी रिपोर्ट पार्टी अध्यक्ष राजनाथ सिंह को सौंपेंगे। राजनाथ अन्य केंद्रीय नेताओं से बातचीत के बाद शनिवार को खंडूरी के उत्तराधिकारी का ऎलान कर सकते हैं। दौड में पूर्व मुख्यमंत्री भगत सिंह कोश्यारी सबसे आगे हैं जबकि रमेश पोखरियाल निशंक और त्रिवेंद्र सिंह रावत का नाम भी चर्चा में बना हुआ है।खंडूरी और उनके समर्थक नहीं चाहते कि कोश्यारी के हाथ में बागडोर थमाई जाए लेकिन राज्य में गहरी पैठ को देख आलाकमान का झुकाव उनकी तरफ ज्यादा है। सूत्रों के अनुसार, कोश्यारी का गढ माने जाने वाली कपकोट विधानसभा सीट पर 28 मई को होने जा रहे उपचुनाव के नतीजे पर पार्टी की सरकार का भविष्य टिका हुआ है। यही वजह है कि भाजपा कोई जोखिम नहीं उठाना चाहती। सूत्रों के अनुसार, कोश्यारी को मुख्यमंत्री बनाने का आश्वासन देकर कपकोट रवाना कर दिया गया है ताकि वे चुनाव पूर्व तैयारी में जुट जाएं। कोश्यारी वहां जम भी गए हैं। ऎसे में उनकी अनदेखी भारी पड जाएगी।इस बीच खंडूरी के पक्ष में सफाई देने उनके समर्थक दिल्ली पहुंचे। निशंक के अलावा प्रदेश अध्यक्ष ब“ाी सिंह रावत, राज्य के प्रभारी अनिल जैन और कृष्ण मुरारी मोघे ने राजनाथ सिंह से मुलाकात कर उन्हें समझाया कि लोकसभा चुनाव में हार के लिए अकेले खंडूरी जिम्मेदार नहीं। दूसरे कई कारण हैं जिन पर भी गौर करना चाहिए लेकिन, उन्हें यह कहकर टाल दिया गया कि अब फैसला विधायकों का मन टटोलकर लिया जाएगा। केंद्रीय पर्यवेक्षक जैसी रिपोर्ट देंगे उस आधार पर नाम का ऎलान कर दिया जाएगा। चूंकि उपचुनाव 28 को हैं इसलिए हर हाल में 25-26 तक नए मुख्यमंत्री का नाम घोषित करना पडेगा।

आडवाणी के सिर हार का ठीकरा

लोकसभा चुनाव में पार्टी की हार से बौखलाए भाजपा के दो कैबिनेट मंत्रियों ने पराजय का ठीकरा अपने राष्ट्रीय नेता लालकृष्ण आडवाणी के सिर फोडने की कोशिश कर सबको चौंका दिया। दोनों मंत्री आडवाणी को आकर्षणविहीन कहने तक से नहीं झिझके। वाकया गुरूवार शाम को मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान के निवास पर हुई कैबिनेट की अनौपचारिक बैठक में सामने आया। चुनाव के बाद यह पहली बैठक थी। विश्वस्त सूत्रों ने बताया कि बैठक की शुरूआत में ही विंध्य के एक मंत्री ने कहा कि आडवाणी में आकर्षण नहीं था। इसलिए पार्टी चुनाव में हारी। बुंदेलखंड के एक प्रभावशाली मंत्री ने इसका समर्थन किया और कहा कि पार्टी प्रदेश में भी इसी वजह से पराजित हुई। बैठक गलत दिशा में जाते देख मुख्यमंत्री ने तुरंत उन्हें टोका और कहा कि अब चुनाव पर किसी तरह की चर्चा नहीं होगी। बैठक में केवल सरकारी कामकाज और लक्ष्य पर बातचीत होगी।

तीन साल पहले से चुनाव की तैयारी

बहुजन समाज पार्टी ने लोकसभा चुनाव में प्रदर्शन की समीक्षा करने के साथ ही तीन साल बाद आने वाले विधानसभा चुनाव की तैयारी शुरू कर दी है। बुधवार देर रात तक चली विधायकों की बैठक में उनसे विधानसभा चुनाव की तैयारी में जुटने को कहा गया है। साथ ही विधायकों की समस्याओं के समाधान के लिए नई व्यवस्था की गई है। अब सप्ताह में दो दिन मंत्री बाबू सिंह कुशवाहा पार्टी दफ्तर में विधायकों से मिलेंगे और मुख्यमंत्री सचिवालय में दो बार अर्जी देने के बाद सुनवाई न होने पर मुख्यमंत्री को अवगत कराया जाएगा। मुख्यमंत्री और बसपा की राष्ट्रीय अध्यक्ष मायावती ने लोकसभा चुनाव में पार्टी को अपेक्षित सफलता न मिलने पर समीक्षा के लिए यहां मंगलवार और बुधवार को बैठक आयोजित की थी। पहले दिन की बैठक राष्ट्रीय स्तर की थी। इस बैठक में पार्टी की जिला एवं विधानसभा इकाइयों को छोडकर सभी भाईचारा एवं कमेटियां भंग कर दी थी। दूसरे दिन जब विधायकों के साथ बैठक हुई तो विधायकों ने मुख्यमंत्री के सामने पीडा रखी कि अफसर उनकी सुनते नहीं हैं और न ही उन तक सही बात पहुंचाते हैं। विधायकों ने लोकसभा चुनाव में बसपा को अपेक्षित परिणाम न मिलने के लिए नौकरशाही की निरंकुशता को जिम्मेदार ठहराया।बसपा अध्यक्ष ने अपनी पार्टी में मण्डल प्रभारी के पद समाप्त कर दिए। कोआर्डिनेटरों की बैठक में उन्होंने जोन स्तर पर कोआर्डिनेटर बनाने का फैसला किया। पार्टी के संगठनात्मक ढांचे को 11 जोन में बाँटा गया है। कई कोआर्डिनेटर बदले गए हैं। नये चेहरों को संगठन में जिम्मेदारी दी गई है। नये कोआर्डिनेटरों से उच्च वर्ग, मुस्लिम और अति पिछडी जातियों को जोडने को कहा गया। नई जिम्मेदारी बांटने में लोकसभा चुनाव के प्रदर्शन को आधार बनाया गया है। लखनऊ और इलाहाबाद मण्डल को मिलाकर एक जोन बनाया गया है। इस जोन में इन्द्रजीत सरोज को हटाकर लालजी वर्मा को जिम्मेदारी दी गई है। इनके साथ विधान परिषद सदस्य जुगल किशोर और रायबरेली सीट पर सोनिया गांधी के खिलाफ एक लाख वोट पाने वाले आर.एस. कुशवाहा को भी जोडा गया है।

Wednesday, May 20, 2009

सत्रह लाख किसानों के कर्ज माफी की तैयारी

राज्य सरकार प्रदेश के 17 लाख 30 हजार किसानों के पचास हजार रूपए तक के अल्पकालीन फसल ऋण माफ करने की तैयारी में है। फैसले से सरकारी खजाने पर 3815 करोड से अधिक का बोझ पडेगा। सूत्रों के मुताबिक राज्य सरकार 31 दिसम्बर 2008 की स्थिति में किसानों का पचास हजार रूपए तक का अल्पकालीन ऋण माफ करने जा रही है, लेकिन इसके लिए यह शर्त रहेगी कि वे बकाया ऋण राशि एक साथ जमा कर दें। प्राथमिक सहकारी समितियों के जरिए दिए गए इन ऋणों को माफ करने के लिए सरकार को 3815.69 करोड रूपए की व्यवस्था करनी होगी। मुख्यमंत्री इस सम्बंध में गुरूवार को समीक्षा बैठक लेने वाले हैं।

''राहुल के कारण नहीं जीती कांग्रेस"

उत्तर प्रदेश में कांग्रेस को २१ सीटें मिलने का ोय कांग्रेस महासचिव एवं सांसद राहुल गांधी को न देते हुए समाजवादी पार्टी के महासचिव अमर ङ्क्षसह ने आज कहा कि ऐसा उनकी पार्टी की रणनीति में भूल के कारण संभव हो पाया है ।ङ्क्षसह ने एक निजी चैनल को दिये साक्षात्कार में कहा कि प्रदेश में कांग्रेस को गांधी के प्रभाव के कारण अच्छी संख्या में सीटें नहीं मिली है बल्कि सपा की रणनीति में भूल के कारण मिली है । उन्होंने कहा कि उनकी पार्टी ने भारतीय जनता पार्टी और बहुजन समाज पार्टी को मुख्य रूप से निशाने पर रखा जिस कारण कांग्रेस को बड़ी संख्या में सीटें मिली । सपा महासचिव ने कहा कि फर्रूखाबाद और प्रतापगढ़ की सीट पर उनकी पार्टी उम्मीदवारों की घोषणा के कारण ही कांग्रेस के साथ उनका समझौता टूट गया। उन्होंने कहा कि वह उस समय अस्पताल में थे अन्यथा सपा उम्मीदवारों की इन दोनों सीटों पर घोषणा नहीं होने देते । उन्होंने माना कि कांग्रेस और सपा मिलकर लड़े तो प्रदेश की ८० में से ५० से ज्यादा सीटें जीते होते । उन्होंने कहा कि कांग्रेस जो सीटें मांग रही थी उनमें रामपुर को छोड़कर उसने सभी सीटें जीत ली और वहां सपा दूसरे नम्बर पर भी नहीं रही ।ङ्क्षसह ने कहा कि गांधी आर्दशवादी है और उनमें अभी राजनीतिक प्रदूषण नहीं घुसा है । पर कुछ लोग जिनमें पत्रकार भी है उनकी चापलूसी में लगे है जो उनके लिये घातक है।सपा महासचिव ने कहा कि पिछली मनमोहन सरकार को संकट के समय में बचाने के बाद भी कांग्रेस के दूसरे और तीसरे दर्जे के नेता जिस तरह से उनकी पार्टी के बारे में बयानबाजी कर रहे हैं उससे लगता है कि रणनीति में कहीं भूल हुई। उन्होंने कहा कि जिस तरह का बर्ताव कांग्रेस पार्टी कर रही है उससे दर्द हो रहा है। उन्होंने कहा कि संप्रग सरकार को हमने देश के हित में परमाणु करार के लिए समर्थन दिया था पर अब आगे से हम किसी भी दल से कोई बात करने में दिल से नहीं बल्कि दिमाग से बात करेंगे।