Monday, July 6, 2009

अल्पसंख्यकों का पैरा पढ़ना भूले प्रणव

वित्त मत्री प्रणव मुखर्जी सोमवार को लोकसभा में अपने बजट भाषण के दौरान अल्पसंख्यक कल्याण का पैरा पढ़ना भूल गए। पृष्ठ संख्या बारह पर 53 और 54 नम्बर के पैराग्राफ में अल्पसंख्यकों के हित की बातें हैं लेकिन अपनी रौ में बढ़ते प्रणव दा इन्हें अनदेखा कर सीधे 55 नम्बर पैरा को पढ़ने लगे। जल्द ही उन्हें अपनी भूल का अहसास हुआ और उन्होंने लोकसभा अध्यक्ष मीरा कुमार से माफी मांगते हुए पलटकर छूटे हुए पैराग्राफ को पढ़ा। वित्त मंत्री ने अल्पसंख्यक कल्याण के लिए 1740 करोड़ रूपए आवंटित करने का ऎलान किया जो कि पिछले वर्ष की तुलना में 74 फीसदी अधिक है। साथ ही बताया कि अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय ने पश्चिम बंगाल के मुर्शिदाबाद और केरल के मल्लपुरम में अपने कैंपस खोलने का फैसला किया है। प्रत्येक कैंपस के लिए प“ाीस-प“ाीस करोड़ रूपए आवंटित किए जाएंगे।लालू को सोनिया ने देखा तक नहींपिछली सरकार में केंद्रीय रेल मंत्री बने लालू प्रसाद यादव अपने राजनीतिक जीवन के सबसे बुरे दौर से गुजर रहे हैं। लालू लगभग पौने बारह बजे रघुवंश प्रसाद के साथ लोकसभा के अंदर आए। प्रणव मुखर्जी के बजट पेश करने के बाद सदन की कार्यवाही मंगलवार तक स्थगित हो गई तब लालू तेजी से सत्तापक्ष की बेंच की ओर बढ़े जहां कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी बैठी हुई थीं। उन्होंने भरसक कोशिश की कि सोनिया उनकी ओर मुखातिब हो जाएं किन्तु कांग्रेस अध्यक्ष ने देखना तक गंवारा नहीं किया और लालू हट गए।मुलायम की भी सुनवाई नहीं हुईसमाजवादी पार्टी के अध्यक्ष मुलायम सिंह यादव ने भी वित्त मंत्री को उस समय टोका जब वे आयकर छूट संबंधी घोषणाएं कर रहे थे। मुलायम ने सांसद क्षेत्र विकास निधि के बाबत अपनी बात रखनी चाही लेकिन प्रणव मुखर्जी ने कहा कि इस मौके पर टोकना ठीक नहीं क्योंकि पूरा देश टकटकी लगाए उनकी बात सुनना चाह रहा है। स्पीकर के निर्देश पर मुलायम बैठ गए।जद (यू ) का वाकआउटबिहार में कोसी की बाढ़ से हुई भारी तबाही पर राहत पैकेज का ऎलान न करने पर जद (यू) अध्यक्ष शरद यादव ने कड़ा विरोध जताया। भाजपा सांसद शाहनवाज हुसैन और अन्य ने भी उनका साथ दिया लेकिन वित्त मंत्री ने अनसुना कर दिया। नाराज शरद यादव अपनी पार्टी के सांसदों के साथ सदन से उठकर चले गए।ममता पीछे की पंक्ति मेंवित्त मंत्री, गृह मंत्री और सोनिया गांधी के साथ हमेशा पहली पंक्ति में बैठने वाले पूर्व केंद्रीय रेल मंत्री लालू प्रसाद यादव के उलट केंद्रीय रेल मंत्री ममता बनर्जी सबसे पीछे की पंक्ति में बैठी थीं। वे बड़े मनोयोग से वित्त मंत्री का बजट भाषण सुन रही थीं। जब बंगाल में चक्रवर्ती तूफान आइला से हुई बर्बादी के लिए प्रणव मुखर्जी ने एक हजार करोड़ रूपए के आवंटन की घोषणा की तो ममता का चेहरा खिल गया। वे इस बाबत प्रणव मुखर्जी से पहले कई दफा मिल चुकी थीं।नहीं दिखीं नलिनी, रमन मौजूदसंप्रग सरकार के पिछले कार्यकाल में पी.सी. चिदम्बरम ने बतौर वित्त मंत्री जब भी आम बजट पेश किया उनकी पत्नी नलिनी चिदम्बरम दर्शक दीर्घा में सपरिवार मौजूद रहतीं थीं लेकिन सोमवार को लम्बे अरसे के बाद वे नजर नहीं आई। वजह चिदम्बरम अब गृह मंत्री हैं और आम बजट वित्त मंत्री प्रणव मुखर्जी ने पेश किया। छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री रमन सिंह इत्मीनान के साथ शुरू से अंत तक बैठे रहे।

मंत्रिमण्डल करेगा फैसला

राज्य के पंचायत राज कार्मिकों की मृत्यु के बाद उनके आश्रितों को नियुक्ति देने का मामला अब मुख्यमंत्री के पास पहुंच गया ै। मंत्रिमण्डल स्तर की बैठक में इन परिवारों का भविष्य तय होगा।राज्य में फिलहाल आठ सौ कर्मचारियों के परिवार रोजगार का इंतजार कर रहे हैं।इन कार्मिकों को सरकारी कर्मचारी नहीं मानने के कारण आश्रितों को नियुक्ति का मामला दस वर्ष से अटका हुआ है। पंचायत राज में पद रिक्त होने पर ही अनुकम्पा नियुक्ति हो सकती है, लेकिन दस वर्षोü से रिक्त पदों का अभाव चल रहा है। अब एक साथ आठ सौ कर्मचारी लगाना पंचायत राज विभाग के बूते से बाहर है। पिछले दिनों जयपुर में शिक्षा मंत्री, पंचायत राज मंत्री और दोनों विभागों के सचिवों के बीच हुई बैठक में इस मामले को मुख्यमंत्री सचिवालय भेजने का निर्णय हुआ।दोनों विभागों के सचिव ही मुख्यमंत्री को हालात से अवगत कराते हुए मंत्रिमण्डल की बैठक में इस बारे में निर्णय की आवश्यकता बताएंगे। बैठक में जिन प्रस्तावों पर चर्चा हुई उनमें अधिकांश का फैसला मंत्रिमण्डल स्तर की बैठक में ही हो सकता है। एक प्रस्ताव पंचायत राज विभाग कार्मिकों को सरकारी कर्मचारी मानना है। ऎसा होने पर सभी विभागों में रिक्त पदों पर नियुक्ति हो सकती है।दूसरा प्रस्ताव ग्राम सेवकों व अन्य पदों पर लगाना है। इस आशय का निर्णय भी मंत्रिमण्डल ही कर सकता है। माना जा रहा है कि विधानसभा सत्र के दौरान ही दोनों विभागों के सचिव मुख्यमंत्री को इस प्रकरण की जानकारी देंगे।

हट सकते हैं कुछ प्रस्ताव-सिब्बल

विकास मंत्री कपिल सिब्बल ने संकेत दिया है कि अगर उसके पीछे कोई ठोस तर्क हो तो वह अपने प्रस्तावों में से कुछ को हटा सकते हैं। सिब्बल ने कहा ये सुधार देश के लिए अच्छे हैं। यह सुधार जरूरी है।उन्होंने कहा कि सुधार के मुद्दे को लोक दायरे में रखा गया है और कुछ मंचों पर इस पर पहले ही चर्चा शुरू हो चुकी है। सिब्बल ने कहा कि लोकतंत्र में आम सहमति जरूरी है और यह संभव है कि कुछ विचार आम सहमति के अभाव में हकीकत का रूप न ले सकें।पीएम सुधार के पक्ष मेंप्रधानमंत्री से इस मसले पर सहमति के सवाल पर सिब्बल का कहना था कि खुद बेहद उत्सुक हैं कि शिक्षा क्षेत्र में सुधार की आवश्यकता है। दसवीं की परीक्षा को वैकल्पिक बनाने के संबंध में सिब्बल ने कहा कि सरकार इसे केन्द्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (सीबीएसई) में लागू करना चाहती है। इससे करीब 10 हजार स्कूल मान्यता प्राप्त हैं।उन्होंने बताया कि दसवीं बोर्ड की परीक्षा को वैकल्पिक बनाना सीबीएसई में एक साल में लागू किया जा सकता है। यह फैसला मंत्रालय स्तर पर किया जा सकता है और इसके लिए कैबिनेट की मंजूरी लेने की आवश्यकता नहीं है। ग्रेडिंग प्रणाली के संबंध में अपने प्रस्ताव के बारे में सिब्बल ने कहा -हम देखेंगे कि कितनी तेजी से इस पर अमल किया जा सकता है। सिब्बल ने कहा कि जिन सुधारों की उन्होंने घोषणा की है इनमें से कुछ पर विचार है। कुछ फैसले हैं और कुछ नीति और विधायी पहल हैं। हमें राज्य सरकारों और पंचायतों से सहयोग की आवश्यकता है। अगर सभी हिस्सेदार सहयोग करते हैं तो इसे किया जाना चाहिए।विदेशी शिक्षा विधेयक का मसौदा तैयारसिब्बल ने कहा कि फारेन एजुकेशन प्रोवाइडर्स बिल का मसौदा तैयार कर लिया गया है। यह पूछे जाने पर कि क्या विदेशी संस्थान आरक्षण लागू करेंगे तो उन्होंने कहा कि सरकार ने इस मुद्दे पर फैसला नहीं किया है। उन्होंने कहा -यह इस पर निर्भर करता है कि हम क्या फैसला करते हैं और कब आगे बढ़ते हैं।

मेरी जान को खतरा

खतरा है। उन्होंने गृह मंत्रालय से तत्काल उनकी सुरक्षा के कदम उठाने की अपील की है। उधर, वरूण की मां मेनका गांधी ने प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह को पत्र लिख कर शिकायत की है कि केन्द्र सरकार उनकी पुत्र की सुरक्षा में ढिलाई बरत रही है। वरूण ने रविवार को यहां बयान जारी कर कहा कि दिल्ली पुलिस द्वारा शनिवार को गिरफ्तार किए गए अंडरवल्र्ड के अपराधी मेरी हत्या की साजिश रच रहे थे।हाल के महीनों में यह दूसरी बार है जब मुझ पर हमले की साजिश का पर्दाफाश हुआ है। वरूण ने कहा कि वह जनता के चुने हुए प्रतिनिधि हैं और उन्हें लगातार लोगों के सम्पर्क में रहना होता है। इसके लिए उन्हें समुचित सुरक्षा मुहैया कराई जानी चाहिए।मेनका का पत्र मेनका ने प्रधानमंत्री को लिखे पत्र में दिल्ली पुलिस द्वारा अंडरवल्र्ड सरगना छोटा शकील गिरोह के सात सदस्यों की गिरफ्तारी का उल्लेख करते हुए कहा है कि ये लोग वरूण और उनके वकीलों की हत्या की साजिश रच रहे थे। इससे पहले अप्रेल में भी ऎसे ही एक षडयंत्र का पर्दाफाश हो चुका है। इससे लगता है कि वरूण ही हत्या के लिए एक नियोजित अभियान चल रहा है।निशाने पर थे तीन वीवीआईपीदिल्ली पुलिस ने राजधानी के विभिन्न इलाकों से कुख्यात अपराधी सरगना छोटा शकील गिरोह के छह शूटरों को गिरफ्तार करने का दावा किया है। दिल्ली पुलिस (विशेष प्रकोष्ठ) के संयुक्त आयुक्त पी एन अग्रवाल ने बताया कि शनिवार रात राजधानी के विभिन्न इलाकों से गिरफ्तार किए गए इन शूटरों के निशाने पर तीन वीवीआईपी थे। इनके पास से विदेशी हथियार भी बरामद किए गए है। पुलिस इनसे पूछताछ कर रही है। इससे पहले, सभी को तीस हजारी कोर्ट में डयूटी मजिस्ट्रेट के समक्ष पेश किया। जहां बंद कमरे में सुनवाई के बाद सभी अपराधियों को सात दिन के लिए पुलिस हिरासत में भेज दिया गया।

फर्जी मुठभेड़ पर टिकैत की आंदोलन की धमकी

उत्तराखंड की राजधानी देहरादून में रणवीर सिंह (24) नामक युवक को कथित रूप से पुलिस मुठभेड़ में मारे जाने की घटना को लेकर मृतक के गांव में आक्रोश व्याप्त हो गया है। किसान नेता महेंद्र सिंह टिकैत ने राज्य पुलिस के खिलाफ सड़क पर उतरने की धमकी दी है। उधर मृतक के परिजनों ने मामले की सीबीआई जांच की मांग की है ताकि मामले का सच सामने आ सके। रणवीर के परिजनों ने आरोप लगाया है कि देहरादून पुलिस ने शुक्रवार को एक फर्जी मुठभेड़ में रणवीर को मार डाला। रणवीर प्रबंधन में स्नातक था और वह एक वित्तीय कंपनी के साथ कुछ काम के सिलसिले में देहरादून गया हुआ था। रणवीर के अंतिम संस्कार में हिस्सा लेने आए भारतीय किसान यूनियन (बीकेयू) के नेता महेंद्र सिंह टिकैत ने रणवीर सिंह के पैतृक गांव में ऐलान किया, ''हम इस घटना के खिलाफ सड़क पर उतरेंगे। यह उत्तराखंड पुलिस की एक घृणित कार्रवाई है।'' टिकैत ने पत्रकारों के साथ बातचीत में कहा, ''हम विरोध प्रदर्शन की रणनीति पर चर्चा कर रहे हैं, लेकिन यह तय है कि क्षेत्र के लोग इस घटना को लेकर चुप नहीं बैठने वाले हैं।'' टिकैत ने धमकी भरे अंदाज में कहा कि सात दिन के अंदर यदि उत्तराखंड पुलिस के खिलाफ हत्या का मामला दर्ज नहीं किया गया तो वह सड़क पर उतरने के लिए बाध्य होंगे। टिकैत ने कहा कि रणवीर के शरीर पर मौजूद चोटों के निशान और उसकी पोस्टमार्टम रिपोर्ट से साफ हो गया है कि गोली मारने से पहले उसकी बुरी तरह पिटाई की गई। रणवीर सिंह की मां सुरेश देवी ने भी पोस्टमार्टम रिपोर्ट का जिक्र करते हुए कहा, ''मेरे बेटे को लाठियों से पीटा गया। उसकी ठोड़ी राइफल के कुंदे से मार कर तोड़ दी गई। इसके अलावा उसे 10 गोलियां दागी गईं।'' प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक उन्होंने भीड़-भाड़ वाले इलाके में देखा कि रणवीर और उसके दो साथी जो कि मोटरसाइकिल पर सवार थे उनसे पुलिस धक्का-मुक्की कर रही थी। उत्तराखंड पुलिस के अनुसार पुलिस के साथ धक्का-मुक्की के बाद रणवीर ने एक पुलिस सब इंस्पेक्टर का रिवाल्वर छीन लिया। इसके बाद पुलिस ने उसे अपराधी मान लिया। मुख्यमंत्री रमेश पोखरियाल ने मामले की जांच राज्य पुलिस की अपराध जांच शाखा (सीआईडी) से कराने की घोषणा की है। लेकिन रणवीर के पिता सरकार के इस फैसले से संतुष्ट नहीं हैं। रणवीर के अंतिम संस्कार के अवसर पर पिता रवींद्र ने संवाददाताओं से कहा,''मैं जानता हूं अब मेरा बेटा मुझे वापस नहीं मिल सकता, लेकिन मैं चाहता हूं जो भी पुलिसकर्मी दोषी हैं उनके खिलाफ हत्या का मामला चले, ताकि आगे इस तरह की घटना न दोहराई जा सके।'

कांग्रेस ने दुर्भाग्यपूर्ण बताया

नई दिल्ली : कांग्रेस प्रवक्ता अभिषेक सिंघवी ने आडवाणी के बयान को दुर्भाग्यपूर्ण बताते हुए कहा है कि हारने वाली पार्टी के टॉप नेता की ओर से ऐसी मांग का उठना हैरतअंगेज और दुर्भाग्यपूर्ण है। कांग्रेस ने आडवाणी द्वारा मतपत्रों से वोटिंग कराने की मांग को कल्पना की उड़ान भी बताया। पार्टी प्रवक्ता मनीष तिवारी ने आडवाणी के इन विचारों को खारिज करते हुए एक न्यूज चैनल से बातचीत में कहा कि ईवीएम में गड़बड़ी की शिकायत कोई नई बात नहीं है, पर यह मतदान पत्रों की शुरुआत करने की बात करना गलत है।

ईवीएम नतीजों की सत्यता को लेकर राजनीतिक दलों ने आवाज तेज कर दी

इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन (ईवीएम) से निकले नतीजों की सत्यता को लेकर अब राजनीतिक दलों ने आवाज तेज कर दी है। ईवीएम के फूलप्रूफ होने को लेकर अब तक बीजेपी नेता लालकृष्ण आडवाणी ने ही सवाल किए थे, पर अब उनके साथ लेफ्ट सहित बाकी दलों ने भी सुर मिला लिया है। बीजेपी, सीपीएम, जेडीएस, एलजेपी और आरजेडी सरीखी पार्टियों ने ईवीएम की जगह पर फिर से बैलट पेपरों के इस्तेमाल की मांग तेज कर दी है। ज्ञात हो कि आडवाणी ने एक अखबार से बातचीत में कहा था कि जब तक चुनाव आयोग ईवीएम से चुनावी धांधलियां न किए जाने को लेकर सुनिश्चित नहीं हो जाता, तब तक उसे अगले विधानसभा चुनावों में वोटिंग मत पत्रों से करानी चाहिए। बीजेपी प्रवक्ता रविशंकर प्रसाद ने रविवार को कहा कि महाराष्ट्र और हरियाणा में होने वाले विधानसभा चुनाव से पहले चुनाव आयोग को ईवीएम से छेड़छाड़ की गुंजाइश खत्म करनी होगी, वरना मतपत्र से वोटिंग कराना सही होगा। बीजेपी ने स्पष्ट किया कि पार्टी हाल ही में हुए लोकसभा चुनाव में मतदान के दौरान इस्तेमाल की गई ईवीएम के बारे में कोई सवाल नहीं उठा रही। उन्होंने कहा कि विभिन्न वर्गों द्वारा ईवीएम से छेड़छाड़ की आशंका व्यक्त की जा रही थी और हाल ही में दिल्ली के पूर्व मुख्य सचिव उमेश सहगल ने चुनाव आयोग के सामने एक तकनीकी प्रदर्शन के जरिए बताया भी कि ईवीएम से किस तरह छेड़छाड़ की जा सकती है। उसके बाद आयोग ने एक चुनाव उपायुक्त को इस बात की जांच के लिए नियुक्त किया। प्रसाद ने कहा कि जर्मनी में ईवीएम के इस्तेमाल पर रोक लग चुकी है, जब कि अमेरिका में भी ईवीएम के इस्तेमाल के समय कागजी बैकअप जरूरी है। दुनिया के कई देश फिर से मतपत्र से वोट डालने की परंपरा की तरफ वापस लौट रहे हैं। सीपीएम पोलित ब्यूरो के सदस्य सीताराम येचुरी ने कहा कि ईवीएम की कार्यप्रणाली पर उठाए गए सवालों की जांच बेहद गंभीरता से की जानी चाहिए। खासकर इस बात को देखते हुए कि ज्यादातर देशों में वोटिंग अब मतपत्रों से ही कराई जा रही है। उधर, जेडीएस चीफ एच. डी. देवगौड़ा का आरोप है कि ईवीएम में गोपनीयता नहीं बरती जा सकती। इस सिस्टम को हटाना होगा। हमारी पार्टी ने चुनाव से पहले ईवीएम की खामियों को गिनाया भी था। एलजेपी के महासचिव अब्दुल खालिद ने कहा कि हमारी पार्टी ईवीएम के इस्तेमाल को बंद कर मतपत्रों से वोटिंग कराने की मांग करती है। जब संसद के भीतर पोलिंग में गड़बड़ी हो जाती है तो ईवीएम कैसे फूलप्रूफ हो सकती हैं। इस बीच, आरजेडी ने बिहार में सत्तारूढ़ एनडीए द्वारा ईवीएम से छेड़छाड़ के आरोपों की जांच कराने के लिए चुनाव आयोग के पास जाने का फैसला किया है। पार्टी के स्थापना दिवस के मौके पर पार्टी की सीनियर नेता राबड़ी देवी और शकील अहमद खान ने कहा कि आयोग को ईवीएम से छेड़छाड़ की बड़े पैमाने पर आई शिकायतों की जांच करानी चाहिए।