Thursday, April 29, 2010

झमेले से छूट कांग्रेस में जाएंगी खुशबू

शादी से पहले सेक्स पर दिए अपने बयानों पर सुप्रीम कोर्ट से राहत मिलने के बाद
तमिल ऐक्ट्रेस खुशबू अब राजनीति की ओर कदम बढ़ाने की सोच रही हैं। वह कांग्रेस जॉइन कर सकती हैं। खुशबू इस समय लंदन में छुट्टियां मना रही हैं। उन्होंने हमारे सहयोगी अखबार टाइम्स ऑफ इंडिया को फोन पर बताया कि वह कांग्रेस जॉइन करना चाहती हैं। खुशबू ने बताया कि अगर उन्हें कांग्रेस की तरफ से न्योता मिलता है, तो वह इसे सहज स्वीकार कर लेंगी। खुशबू ने कहा कि वह कांग्रेस की बहुत बड़ी प्रशंसक हैं। क्या कांग्रेस की तरफ से उन्हें कोई सिग्नल मिला है, पर खुशबू ने कहा कि वह इस पर अभी कॉमेंट नहीं करेंगी। उन्होंने कहा कि वह कुछ दिन में चेन्नै लौट रही हैं, इसके बाद मैं सभी सवालों के जवाब दूंगी। उधर, तमिलनाडु कांग्रेस कमिटी के प्रेजिडेंट केबी थंगकाबालू से जब इस बारे में पूछा गया तो उन्होंने कहा, 'यदि वह कांग्रेस में आना चाहती हैं, तो उनका स्वागत है। जो कोई भी सोनिया जी की लीडरशिप को स्वीकार करना चाहता है, कांग्रेस में उसका स्वागत है। ' गौरतलब है कि शादी से पहले सेक्स वाले खुशबू के बयान पर खूब बवाल हुआ था। उनके खिलाफ 22 केस दर्ज किए गए थे। बुधवार को सुप्रीम कोर्ट ने इस साउथ इंडियन एक्ट्रेस पर दर्ज सभी क्रिमिनल केसों को रद्द कर दिया था।

विधायकों पर नजर

दिल्ली में अब विधायकों के आचरण की निगरानी विधानसभा की कमिटी करेगी। दिल्ली
विधानसभा के स्पीकर डॉ.
योगानंद शास्त्री
ने पहली
बार आचरण
कमिटी का
गठन किया
है। इस
तरह की
कमिटी अभी
राज्यसभा के लिए है लेकिन
दिल्ली पहला
ऐसा राज्य
है, जिसने
इस तरह
की कमिटी
का गठन
किया है।
इसके अलावा
स्पीकर ने
विधानसभा की अन्य कमिटियों के
गठन का
भी ऐलान
किया।

स्पीकर ने
बताया कि
राज्यसभा की तरह ही यह
कमिटी विधायकों
के लिए
कोड ऑफ
कंडक्ट तैयार
करेगी। इसके
अलावा विधायकों
के सदन
के भीतर
और बाहर
उनके कार्यकलापों
पर भी
नजर रखेगी।
अगर कोई
सदस्य आचरण
के उल्लंघन
का दोषी
पाया जाता
है तो
यह आवश्यक
सिफारिशें भी करेगी। नौ सदस्यों
वाली इस
कमिटी का
चेयरमैन राजेंद्र
नगर से
कांग्रेस विधायक रमाकांत गोस्वामी को
बनाया गया
है।

विधानसभा सूत्रों का कहना है
कि कुछ
समय पहले
एक विधायक
के खिलाफ
लगे आरोपों
के बाद
इस तरह
की कमिटी
के गठन
का फैसला
किया है।
वैसे इसके
गठन की
सिफारिश जनरल
परपज कमिटी
ने 31 मार्च
को दी
अपनी रिपोर्ट
में की
थी। स्पीकर
ने बताया
कि सत्ताधारी
पार्टी के
चीफ विप
ने दो
और कमिटियों
के गठन
का भी
अनुरोध किया
है। इसमें
एक अल्पसंख्यक
कल्याण कमिटी
और दूसरी
अन्य पिछड़ा
वर्ग कल्याण
कमिटी बनाने
को कहा
गया है।
इन कमिटियों
का गठन
जल्द किया
जाएगा।

स्पीकर ने
बताया कि
आचरण कमिटी
में डॉ.
नरेंद्रनाथ, मुकेश शर्मा, बरखा सिंह,
हरिशंकर गुप्ता,
डॉ. हर्षवर्धन,
ओ.पी.
बब्बर, रविंद्रनाथ
बंसल और
आसिफ मोहम्मद
खान को
सदस्य बनाया
गया है।
इसके अलावा
विशेषाधिकार कमिटी का चेयरमैन डॉ.
नरेंद्र नाथ,
सरकारी आश्वासन
कमिटी का
चेयरमैन हरशरण
सिंह बल्ली,
एससी/एसटी
एंड ओबीसी
वेलफेयर कमिटी
का चेयरमैन
मालाराम गंगवाल,
महिला एवं
बाल कल्याण
कमिटी का
चेयरपर्सन बरखा सिंह, पर्यावरण कमिटी
का चेयरमैन
हरिशंकर गुप्ता,
विधायकों के वेतन भत्ते तय
करने वाली
कमिटी का
चेयरमैन कंवर
करण सिंह,
पब्लिक अकाउंट
कमिटी का
चेयरमैन प्रहलाद
सिंह साहनी
और सरकारी
उपक्रम कमिटी
का चेयरमैन
बलराम तंवर
को बनाया
गया है।





बीजेपी सरकार बनाए, तो हम सपोर्ट करेंगेः जेएमएम

झारखण्ड मुक्ति मोर्चा (जेएमएम) के अध्यक्ष और झारखण्ड के मुख्यमंत्री शिबू सोरेन के बेटे हेमंत सरेन ने कहा है कि उनकी पार्टी बीजेपी की नेतृत्व में सरकार बनने की स्थिति में उसे समर्थन देने को तैयार है। हेमंत ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा, 'बीजेपी को नई सरकार के गठन की प्रक्रिया की शुरुआत करनी चाहिए।' उन्होंने कहा, 'जेएमएम चाहती है कि राज्य में जारी राजनीतिक संकट जल्द से जल्द खत्म हो। इसी को ध्यान में रखते हुए पार्टी के विधायकों ने बीजेपी से झारखंड में नई
सरकार बनाने की गुजारिश की है। अगर बीजेपी सरकार बनाने का मन बनाती है, तो सीएम शिबू सोरेन इस्तीफा देने के लिए तैयार है। ऐसी सूरत में हम बीजेपी को समर्थने देने के लिए तैयार हैं।' हालांकि हेमंत सोरेन ने बीजेपी से आग्रह किया कि वह किसी आदिवासी के नेतृत्व में ही सरकार का गठन करे। सोरेन के इस प्रस्ताव पर बीजेपी ने अभी कुछ नहीं कहा है, पर सूत्रों का कहना है कि पार्टी की संसदीय बोर्ड की बैठक में इस मामले पर विचार-विमर्श के बाद ही कोई फैसला लिया जाएगा।

सपा-राजद का बहिर्गमन

लोकसभा में गुरूवार को सरकारी नौकरियों में मुसलमानों आरक्षण के मसले पर समाजवादी पार्टी (सपा) और राष्ट्रीय जनता दल (राजद) के सदस्यों ने बहिर्गमन किया।राजद अध्यक्ष लालू प्रसाद यादव ने पूछा कि क्या सरकार विभिन्न सरकारी क्षेत्रों में मुसलमानों को समानुपातिक प्रतिनिधित्व देने की कोई योजना बना रही है? इसके जवाब में अल्पसंख्यक मामलों के मंत्री सलमान खुर्शीद ने कहा कि वह इस प्रश्न का जवाब नहीं दे सकते क्योंकि यह सूचीबद्ध नहीं है।इस लालू ने कहा कि सरकार ''मुस्लिम विरोधी'' है। उन्होंने मंत्री से इसका उचित उत्तर देने की मांग की। लोकसभाध्यक्ष मीरा कुमार ने कहा कि वह नोटिस दे सकते है और सदन में इस पर चर्चा हो सकती है।

Thursday, April 22, 2010

गडकरी अब करेंगे भाजपा का असली ऑपरेशन

नई दिल्ली । महंगाई विरोधी रैली की सफलता से उत्साहित भाजपा अध्यक्ष नितिन गडकरी अब भाजपा के असली ऑपरेशन में जुटेंगे। गडकरी के नेतृत्व में रैली में जिस तरह की नई पंरपराएं दिखीं उससे साफ हो गया है कि पहले पार्टी, बाद में कोई और। रैली में किसी एक नेता के पक्ष में नारे भी नहीं लगे। नारे लगे तो सिर्फ भाजपा के। मंच भाजपा के झंडे से सजा था। बीच में कमल का फूल था। मंच के दाएं-बाएं भाजपा के वैचारिक प्ररेणास्रोत श्यामा प्रसाद मुखर्जी और पं.दीनदयाल उपाध्याय के बड़े कट आउट यह संदेश दे रहे थे कि पार्टी मौजूदा किसी एक नेता के चेहरे या प्रभुत्व से नहीं चलेगी। अटल बिहारी वाजपेयी का एक बड़ा कविता लिखा चित्र मंच के पीछे लगा था। एक नई परंपरा यह भी दिखी कि रैली का समापन भाजपा अध्यक्ष के भाषण से हुआ। वर्ना आमतौर पर भाजपा के कार्यक्रमों का समापन पार्टी के वरिष्ठ नेता के संबोधन से होता रहा है। मसलन, पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी सबसे अंत में भाषण करते थे और वाजपेयी से पहले आडवाणी और आडवाणी से पहले भाजपा अध्यक्ष का भाषण। यही क्रम रहता था। पर इस बार क्रम बदला। वरिष्ठ नेता आडवाणी का भाषण गडकरी से पहले करवा दिया गया। इस चूक को सुषमा स्वराज ने महसूस भी किया। वैसे,गडकरी के राज में मंच संचालन का काम किसी एक या दो व्यक्ति के हाथ में नहीं रहा। रामलाल मैदान पर विजय गोयल के साथ-साथ महासचिव अनंत कुमार और धर्मेंद्र प्रधान ने भी संचालन किया। जंतर मंतर पर यह काम महासचिव थावर चंद गहलोत के जिम्मे रहा। गडकरी ने रैली के काम का बंटवारा इस तरह किया कि कोई एक नेता मंच पर हावी नहीं हो पाए। असल में रैली की सफलता के लिए गडकरी ने पूरी कमान अपने हाथ में ले रखी थी। रैली के बारे में गडकरी ने राज्यवार रिपोर्ट तैयार करवाई है। इस रिपोर्ट के आधार पर ही गडकरी अब भाजपा का असली ऑपरेशन करेंगे। सबसे पहले उनके निशाने पर मध्य प्रदेश,उत्तर प्रदेश, बिहार, दिल्ली, छत्तीसगढ़, राजस्थान जैसे बड़े सूबे हैं। इन राज्यों में प्रदेश अध्यक्ष को लेकर घमासान मचा है । गडकरी अध्यक्ष का फैसला करेंगे। रैली से पहले और बाद में इन राज्यों के कई नेता और कार्यकर्ता गडकरी को अपना योगदान बताने में व्यस्त रहे। दूसरा महत्वपूर्ण काम गडकरी को अपने नवगठित केंद्रीय पदाधिकारियों के बीच कामकाज का बंटवारा करना है राज्यों का प्रभार बांटना है। युवा और महिला मोर्चा सहित विभिन्न मोर्चा के अध्यक्षों का भी ऐलान करना है। सफल मानी जा रही इस रैली ने गडकरी को नई ताकत दी है।

''गुमशुदा'' मंत्री को लेकर हंगामा

रसायन और उर्वरक मंत्री एम अलागिरी की संसद में लगातार गैर मौजूदगी को लेकर लेाकसभा में आज भाजपा समेत समूचे विपक्ष ने भारी आपत्ति जताई और इस मुद्दे को लेकर उनकी द्रमुक सदस्यों से तीखी नोंकझोंक भी हुई। हालांकि सदन के नेता तथा वित्त मंत्री प्रणव मुखर्जी ने यह कहकर सदस्यों को शांत करने का प्रयास किया कि मंत्री इस समय देश से बाहर हैं और इसलिए आज सदन में नहीं आए। विपक्ष की नेता सुषमा स्वराज ने मंत्री की अनुपस्थिति पर आपत्ति जताते हुए कहा कि यह ऐसे मंत्री हैं जिनका चेहरा आज तक सांसदों ने तो क्या अध्यक्ष तक ने नहीं देखा है। उन्होंने कहा कि ऐसा सुनने में आया है कि उन्होंने आज तक कैबिनेट की किसी बैठक तक में हिस्सा नहंी लिया है। उन्होंने कहा कि संसद का सत्र चालू होने पर मंत्रियों का पहला दायित्व संसद के प्रति होता है, उसके बाद कोई दूसरा दायित्व आता है। उन्होंने कहा कि अध्यक्ष की अनुमति से ही मंत्री सदन से गैर हाजिर हो सकते हैं। उन्होंने सरकार से जानना चाहा कि यह ''गुमशुदा'' मंत्री कहां छुपे हैं।इससे पूर्व सदन के नेता प्रणव मुखर्जी ने सदस्यों को शांत करने का प्रयास करते हुए कहा कि संबंधित मंत्री देश से बाहर हैं और संसदीय नियमों के अनुसार मंत्री की गैर मौजूदगी में राज्य मंत्री जवाब देने के लिए अधिकृत हैं। उन्होंने कहा कि सदस्य प्रश्नकाल चलने दें और वे यह मामला बाद में भी उठा सकते हैं। सदन में आज प्रश्नकाल में अलागिरी के मंत्रालय से संबंधित प्रश्न पूछे जाने थे और उनके अनुपस्थित रहने पर भाजपा सहित अनेक दलों के सदस्यों ने कड़ी आपत्ति जताई।लोकसभा में प्रश्नकाल के दौरान जब रसायन और उर्वरक मंत्रालय से संबंधित पूरक प्रश्न का अलागिरी के स्थान पर राज्य मंत्री जवाब देने खड़े हुए तो भाजपा के वरिष्ठ सदस्य यशवंत सिन्हा ने इस पर कड़ी आपत्ति जताई। उन्हीं की पार्टी के हरेन पांडया ने कहा कि मंत्री बिना आसन की अनुमति के सदन से गैर हाजिर हैं और यह आसन का अपमान है। निर्दलीय दिग्विजय सिंह ने कहा कि सांसदों ने आज तक मंत्री का चेहरा तक नहीं देखा है इस पर स्पीकर मीरा कुमार ने कहा कि उन्होंने राज्य मंत्री को जवाब देने के लिए अधिकृत किया है। लेकिन सदस्य शांत नहीं हुए और प्रश्नकाल की समाप्ति तक इस मुद्दे को लेकर विपक्ष तथा द्रमुक सदस्यों के बीच नोंकझोंक होती रही।

''मोदी के कारनामों को वसुंधरा उजागर करे''

मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने आज आईपीएल आयुक्त ललित मोदी और पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे पर प्रहार करते हुए कहा कि वसुंधरा राजे को सार्वजनिक और राजनीतिक जीवन में बने रहने के लिए प्रदेशहित में उन तथ्यों का खुलासा करना चाहिए जिसकी वजह से राजस्थान क्रिकेट संघ के तत्कालीन अध्यक्ष मोदी का समर्थन करने के लिए अधिकारियों पर बेजा दबाव डाला गया। उन्होंने कहा कि ऐसे कौन से कारण थे कि तत्कालीन मुख्यमंत्री वसुंधरा को मोदी को क्रिकेट में स्थापित करने के लिए क्रिकेट कानून को बदलने का अध्यादेश लाकर कानून बनाना पड़ा और इन्हें सार्वजनिक करना चाहिए। उन्होंने कहा कि मोदी राजस्थान का पैसा कहां ले गए, इसका खुलासा वसुंधरा को करना चाहिए। गहलोत ने कहा कि वसुंधरा से उस दौरान यदि चूक हुई है तो उसे जनहित में मंजूर करना चाहिए। गहलोत ने आज यहां संवाददाताओं से बातचीत में कहा कि तत्कालीन भाजपा सरकार के कार्यकाल में मुख्यमंत्री के सिविल लाइंस स्थित सरकारी आवास के पते से दस्तावेजों के पंजीकरण किए गए। वरिष्ठ अधिकारियों को मोदी से मिलने के लिए जयपुर, दिल्ली, मुम्बई समेत देश के अन्य कई बड़े होटलों में मिलने के लिए भेजा गया। उन्होंने कहा कि हमने उसी समय वसुंधरा राजे को आगाह किया था लेकिन इस ओर ध्यान नहीं दिया गया। गहलोत ने कहा कि तत्कालीन भाजपा सरकार के कार्यकाल की जांच के लिए गठित न्यायमूर्ति माथुर आयोग का काम यदि आगे बढ़ता तो कई बातें सामने आती। वसुंधरा और मोदी ने उस वक्त क्या-क्या तमाशे किए हंै, पूरा प्रदेश, देश जानता है। उन्होंने कहा कि मोदी से मिलने के लिए वरिष्ठ अधिकारी ही नहीं मंत्रियों को मोदी के कमरे के बाहर घंटों इंतजार करना पड़ता था। उन्होंने कहा कि पूर्व मुख्यमंत्री को प्रदेश हित और स्वंय को राजनीतिक तथा सार्वजनिक जीवन में बने रहने के लिए उन बातों का खुलासा करना चाहिए जिसकी वजह से उन्होंने मोदी को भरपूर समर्थन दिया। उन्होंने कहा कि मोदी मुम्बई में बैठकर लेनदेन के हिसाब का मिलान करते थे, यदि कहीं कमी पाई जाती तो काम रोक दिए जाते थे। उन्होंने कहा कि राजस्थान के तत्कालीन नगरीय एवं स्वायत शासन मंत्री प्रताप सिंह सिंघवी और राजस्थान आवासन मंडल के तत्कालीन अध्यक्ष अजय पाल सिंह के मामले पूरे देश के सामने है जिनके निर्माण कार्य मोदी के इशारे पर रोक दिए गए और बाद में उन्हें फिर अनुमति दे दी गई। गहलोत ने कहा कि तत्कालीन भाजपा सरकार के कार्यकाल में प्रमुख विपक्षी पार्टी कांगे्रस और मीडिया मोदी के तमाशों और अधिकारियों के साथ की जाने वाली अशोभनीय घटनाओं को लगातार सामने लेकर आता रहा, लेकिन पूर्व मुख्यमंत्री ने उनकी (मोदी की) हरकतों को रोकना पसंद नहीं किया। गहलोत ने जोर देकर कहा कि ये काम वसुंधरा राजे की शह के बिना संभव नहीं थे। उन्होंने कहा कि अब जब देश भर में आईपीएल आयुक्त मोदी को लेकर शोर मचा हुआ है, ऐसे समय में वसुंधरा राजे मौन क्यों हैं, उन्हें इस बात का खुलासा करना चाहिए। उन्होंने कहा कि मेरी चिन्ता है कि जिस सुनियोजित ढंग से मोदी के माध्यम से राजस्थान का पैसा बाहर गया, उसका खुलासा उन्हें करना चाहिए।