Saturday, July 4, 2009

वरुण गांधी के खिलाफ चार्जशीट की इजाजत

यूपी सरकार ने शुक्रवार को बीजेपी सांसद वरुण गांधी के खिलाफ कोर्ट में चार्जशीट दाखिल करने को हरी झंडी दे दी। लोकसभा चुनाव प्रचार के दौरान पीलीभीत में कथित रूप से भड़काऊ भाषण देने के केस में चार्जशीट के बाद वरुण के खिलाफ सुनवाई की राह और आसान हो जाएगी। राज्य के सचिव (गृह) महेश गुप्ता ने कहा कि सरकार ने पीलीभीत के डीएम को भड़काऊ भाषण देने के अभियुक्त वरुण के खिलाफ चार्जशीट दाखिल करने की इजाजत दे दी है। सूत्रों का कहना है कि पीलीभीत प्रशासन ने वरुण के कथित भड़काऊ भाषणों की सीडी के बारे में चंडीगढ़ स्थित फरेंसिक लैब से रिपोर्ट मिलने के बाद इस मामले चार्जशीट दाखिल करने की इजाजत मांगी थी। उन्होंने कहा कि राज्य के गृह विभाग ने इसके पहले कानून विभाग से इस मामले में राय मांगी थी, जिसने वरुण के खिलाफ अभियोजन का पक्ष लिया। राज्य सरकार के एक प्रवक्ता ने बताया कि सरकार ने पीलीभीत जिला प्रशासन को वरुण गांधी के खिलाफ भारतीय दंड संहिता की धारा 153-ए के तहत मुकदमा चलाने की इजाजत दी है। धारा 153-ए किसी संप्रदाय विशेष के खिलाफ नफरत फैलाने वाला भाषण देने से जुड़ी है। गौरतलब है कि पीलीभीत के बरखेड़ा थाने में पिछले 17 मार्च को चुनाव आयोग के निर्देश पर वरुण के खिलाफ 8 मार्च को भड़काऊ भाषण देने के आरोप में मामला दर्ज किया गया था। पीलीभीत शहर के देश नगर इलाके में 7 मार्च को एक और भड़काऊ भाषण देने के आरोप में वरुण के खिलाफ 19 मार्च को फिर एफआईआर दर्ज की गई थी।

Thursday, July 2, 2009

मोहल्ला सरकार बनेंगी

नगरीय निकाय एवं पंचायत चुनाव के पहले भाजपा सरकार एक नया फार्मूला आजमाने जा रही है। इसके तहत प्रदेश भर में मोहल्ला सरकार गठित होंगी। इसको मोहल्ला समितियों का नाम दिया गया है। ये समितियां प्रशासनिक और वित्तीय अधिकारों से लैस होंगी। जरूरत पड़ने पर ये निर्माण कार्य भी हाथ में ले सकेंगी। नगरीय प्रशासन मंत्री बाबूलाल गौर ने मोहल्ला समितियों की घोषणा करते हुए इनके अधिकार व कत्तüव्य बताए। पत्रकारों से चर्चा करते गौर ने कहा कि इससे प्रत्येक नागरिक अपने मोहल्ले में विकास कार्यो से सीधे जुड़ेगा और सार्वजनिक निर्माण, पर्यवेक्षण, पर्यावरण, शिक्षा, स्वच्छता और स्वास्थ्य से जुड़े मुद्दों पर नियंत्रण रखने के अलावा इस बारे में निर्णय भी ले सकेगा। ऎसे होगा गठनकिसी भी नगरीय निकाय के किसी भी भाग में निवास करने वाले कम से कम 100 परिवार मिलकर मोहल्ला समिति का गठन कर सकते हैं। समिति को संबंधित नगरीय निकाय से मान्यता मिलेगी। इसका कार्यकाल पांच वर्ष होगा। इसमें एक अध्यक्ष, एक उपाध्यक्ष एवं कोषाध्यक्ष होंगे जिनका निर्वाचन चयन द्वारा होगा। एक सचिव भी होगा। संबंधित वार्ड का पार्षद समिति का सदस्य एवं संरक्षक होगा। आय के स्त्रोतसमिति केन्द्र, राज्य सरकार तथा नगरीय निकाय से निधि प्राप्त कर सकेगी और मोहल्लावासियों से निधि अंशदान के रूप में एकत्रित कर सकेंगी। समितियां नगरीय निकाय से किए गए करार (एमओयू) के अनुरूप करों का संग्रहण, स्थल जुर्माना आदि का काम करेंगी। वे निकाय की ओर से किसी एजेंसी के रूप में सिविल व अन्य कार्य हाथ में लेने में भी सक्षम होंगी।समिति का अमलासमितियां नगरीय निकाय से सेवा के लिए कर्मचारी मांग सकेंगी। इनका पर्यवेक्षण, नियंत्रण समितियों के पास होगा। समितियां अपने कर्मचारियों के विरूद्ध अनुशासनात्मक कार्रवाई की सिफारिश भी नगरीय निकाय से कर सकेंगी। कांग्रेस की तीखी प्रतिक्रियाभोपाल। मोहल्ला समितियों के गठन पर सरकार को कांग्रेस ने आड़े हाथों लिया है। कांग्रेस ने आरोप लगाया है कि सरकार इन समितियों को वित्तीय अधिकार इत्यादि देकर भाजपा कार्यकर्ताओं के खाने कमाने का एक नया जरिया शुरू कर रही है। विधानसभा में उप नेता प्रतिपक्ष चौधरी राकेश सिंह ने कहा कि विधानसभा सत्र 6 जुलाई से शुरू हो रहा है, लेकिन सरकार ने सदन में चर्चा कराए जल्दबाजी में ऎसा निर्णय क्यों लिया समझ से परे है। उन्होंने सवाल उठाया कि समितियों को मोहल्ले में सिविल कार्य के अधिकार कैसे दिए जा सकते हैं।

साम्प्रदायिकता फैलाने की इजाजत नहीं-माया

मुख्यमंत्री मायावती ने कहा है कि लिब्राहन आयोग रिपोर्ट को लेकर कुछ लोग राजनीतिक लाभ लेने के लिए प्रदेश में पुन: साम्प्रदायिक माहौल खराब करना चाहते हैं तथा दोनों समुदायों में खाई पैदा कर प्रदेश की कानून व्यवस्था पर फिर से चोट करना चाहते हैं। उन्होंने भाजपा और उसके सहयोगी संगठनों तथा अन्य लोगों को भी आगाह किया कि उनकी सरकार ऎसे तत्वों को किसी भी कीमत पर साम्प्रदायिक उन्माद फैलाकर माहौल खराब करने की इजाजत नहीं देगी। मुख्यमंत्री बुधवार को यहां संवाददाताओं को सम्बोधित कर रही थीं। उन्होंने कहा कि लिब्राहन आयोग की रिपोर्ट प्रस्तुत होने पर उन्होंने अपनी पहली प्रतिक्रिया दी थी और कहा था कि पूरी रिपोर्ट पढ़ने के बाद विस्तार से प्रतिक्रिया देंगी। परन्तु लिब्राहन आयोग की रिपोर्ट को लेकर समाचार पत्रों में छपी खबरों से ज्ञात हुआ है कि कुछ लोग रिपोर्ट को लेकर प्रदेश का माहौल खराब करना चाहते हैं।इस मामले को लेकर आज ही उन्होंने कैबिनेट सचिव, अतिरिक्त मंत्रिमण्डलीय सचिव, प्रमुख सचिव गृह, पुलिस महानिदेशक के साथ बैठक करके कानून व्यवस्था की समीक्षा की। इन अधिकारियों को पूरे प्रदेश में कानून व्यवस्था पर पैनी निगाह रखने के निर्देश दिए गए हैं। प्रमुख सचिव गृह तथा पुलिस महानिदेशक को वीडियों कान्फ्रेसिंग के माध्यम से सभी जिलाधिकारियों एवं पुलिस अधीक्षकों से बात करने साथ ही उन्हें सख्त निर्देश देने को कहा है।

तेल पर ऎसी फिसलन कि सदन ठीक से नहीं चल पाए

संसद में गुरूवार को तेल पर ऎसी फिसलन रही कि दोनों सदन ठीक से नहीं चल पाए। विपक्ष के हंगामें में सत्ता सहयोगियों के साथ खड़े हो जाने से जहां लोकसभा को दिनभर के लिए स्थगित करना पड़ा, वहीं विपक्ष ने राज्यसभा से बहिर्गमन कर अपना विरोध दर्ज कराया। सभी सदस्य मुल्यवृद्धि वापल लेने की मांग को लेकर सरकार पर दबाव बना रहे थे।लोकसभा में शिबू सोरेन के शपथ के बाद दो सदस्यों को श्रद्धांजलि दी गई। उसके बाद जैसे ही प्रश्नकाल प्रारंभ हुआ सपा और वामपंथी सदस्य तेल के दाम में बढ़ोतरी के विरोध में खड़े हो गए। उसमें भाजपा के शामिल होते ही सदन में हंगामा मच गया। करीब 11 बजकर 23 मिनट पर लोकसभा की कार्यवाही स्थगित कर दी गई। करीब 17 मिनट बाद सदन की कार्यवाही दोबारा शुरू होने पर फिर शोरशराबा तेज हो गया। इसी दौरान आर्थिक सर्वेक्षण पेश किए जाने के बाद सदन को भोजनावकाश तक के लिए फिर स्थगित कर दिया गया।दोपहर दो बजे सदन शुरू होते ही विपक्ष के आसन के पास पहुंचकर हंगामा करने के उत्पन्न व्यवधान के चलते लोकसभा की कार्यवाही दिनभर के लिए स्थगित कर दी गई। उधर राज्यसभा में भी इसी मुद्दे पर विपक्ष हमलावर रहा। भाजपा, सपा, वामदलों ने मिलकर सदन में आपनी बात रखने के लिए दबाव बनाने की कोशिश की, लेकिन उसका असर होता नहीं देख सदन का बहिर्गमन कर उन्होंने विरोध दर्ज कराया।

सरकार हेकड़ी से बाज आए-भाजपा

संसद सत्र के ऎन पहले पेट्रोल-डीजल के दाम बढ़ाने के फैसले को सत्ता का दंभ करार देती भाजपा ने आगाह किया है कि सरकार हेकड़ी से बाज आए वरना न संसद चलाना आसान होगा और न ही शासन। लोकसभा में उपनेता प्रतिपक्ष सुषमा स्वराज के अनुसार, संप्रग के सहयोगी दलों या विपक्ष को भरोसे में लिए बगैर पेट्रो पदार्थो की मूल्यवृद्धि, हाईकोर्ट के जज पर दबाव डालने के लिए केंद्रीय मंत्री का फोन करना और आंध्र प्रदेश के कांग्रेसी सांसद का बैंक मैनेजर को थप्पड़ मारना तीन दिन की इन घटनाओं से स्पष्ट है कि सरकार सत्ता के मद में चूर है और, लोकतंत्र के मजबूत स्तंभ विधायिका, न्यायपालिका, कार्यपालिका सब इसके लपेटे में हैं।केंद्रीय मंत्री टी.आर बालू ने भी सदन में मूल्यवृद्धि के तरीके पर अंगुली उठाते हुए कहा कि निर्णय से पहले कैबिनेट में चर्चा होनी चाहिए थी। अभी तक ऎसी घोषणाएं संसद सत्र चल रहा हो तो सदन के अंदर स्पीकर की अनुमति से की जाती रही हैं लेकिन मनमोहन सरकार ने यह परंपरा तोड़कर संसदीय शिष्टाचार का उल्लंघन किया है। भाजपा जानना चाहती है कि बुधवार की रात गुपचुप तरीके से दाम बढ़ाने वाली सरकार को क्या यह पता न था कि गुरूवार से संसद सत्र शुरू हो रहा है। संसद की अवहेलना का इससे बड़ा उदाहरण नहीं मिल सकता। विस्मय की बात है कि आम आदमी के नाम पर वोट बटोरकर सत्तासीन हुई कांग्रेस ने उसी के साथ विश्वासघात किया है। उसे अपने पहले बजट सत्र का पहला तोहफा पेट्रोल-डीजल का दाम बढ़ाकर दिया है। सवाल यह है कि जब सरकारी आंकड़े तेल कंपनियों को मुनाफे में बता रहे हैं तो फिर किसे फायदा पहुंचाने के लिए अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमत में उछाल के बहाने दाम बढ़ाए गए। पेट्रोल-डीजल के दाम घटाने बढ़ाने का समय भी रोचक है। पिछले शासनकाल के शुरूआती चार वर्षो में सरकार दाम बढ़ाती गई और जब चुनाव आए तो वोट की खातिर कीमत कम कर दी गई। नतीजों के बाद जब फिर सत्ता में लौटे तो आम जनता और किसानों की स्थिति का ख्याल किए बिना फिर दाम बढ़ा दिए। यह भी नहीं सोचा कि इनका असर रोजमर्रा की जरूरतों वाली वस्तुओं के दाम पर भी पड़ेगा। यातायात, ढुलाई सब महंगे होंगे तो खाने-पीने की चीजों के भाव भी आसमान पर पहुंचेंगे। जनहित में सरकार को फैसला वापस लेना चाहिए। जहां तक बैंक मैनेजर को सांसद की ओर से मारे गए थप्पड़ का सवाल है तो इस मामले को संसद की आचार संहिता समिति के हवाले कर देना चाहिए और, उस केंद्रीय मंत्री के नाम का खुलासा कर बर्खास्त करना चाहिए जिसने जज को फोन कर अनुचित दबाव डाला।

भड़के जोशी-योगी, सुषमा चुप

भारतीय दंड संहिता की धारा 377 को संविधान की भावना के विपरीत बताकर समलैंगिक संबंधों को वैध ठहराने वाले हाईकोर्ट के फैसले पर भाजपा असमंजस में है। पार्टी विद डिफरेंस के हिन्दुत्ववादी चेहरों मुरली मनोहर जोशी और योगी आदित्यनाथ ने इसे धर्म-संस्कृति-समाज के खिलाफ बताकर तीखा विरोध दर्ज कराया है लेकिन पार्टी ने अभी अपने पत्ते नहीं खोले हैं। लोकसभा में उपनेता प्रतिपक्ष सुषमा स्वराज हों या राज्यसभा के वरिष्ठ सांसद वेंकैया नायडू दोनों ने यह कहकर बात टाल दी कि फिलहाल पार्टी के अंदर इस पर चर्चा नहीं हुई है। जोशी या योगी ने कुछ कहा है तो यह उनकी राय हो सकती है। जहां तक भाजपा के रूख का सवाल है तो पहले यह देखना होगा कि सरकार कैसा रवैया अपनाती है।सुषमा के अनुसार, अभी तक केंद्र सरकार के दो मंत्रालय धारा 377 में संशोधन के सवाल पर आमने सामने थे। गृह मंत्री चिदम्बरम इसे बनाए रखने का पक्ष ले रहे थे जबकि विधि मंत्री वीरप्पा मोइली संशोधन की वकालत कर रहे थे। अब जबकि हाईकोर्ट ने अपना फैसला दे दिया है तब प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने चिदम्बरम, मोइली और स्वास्थ्य मंत्री गुलाम नबी आजाद को निर्देश दिया है कि वे मिल बैठकर सोचें कि क्या करना ठीक होगा। एक बार सरकार अपना रूख स्पष्ट कर दे, इसके बाद भाजपा नेता भी मिल बैठकर अपनी राय बना लेंगे।इससे पूर्व लोकसभा में वाराणसी संसदीय सीट से जीतकर पहुंचे मुरली मनोहर जोशी ने संवाददाताओं के सवाल पर दो-टूक प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि हाईकोर्ट का निर्णय भारतीय संस्कृति और समाज के खिलाफ है। यह नहीं हो सकता कि दो जजों ने कोई फैसला दिया और उसे पूरा देश मान ले। कोर्ट से ऊपर संसद और जनता दोनों हैं। योगी आदित्यनाथ ने समलैंगिक संबंधों को अप्राकृतिक, उच्छृंखल करार देते हुए कहा कि धारा 377 किसी भी सूरत में खारिज नहीं होनी चाहिए। समलैंगिक संबंध समाज विरोधी कृत्य है जिसे मान्यता देना ठीक नहीं। उनकी मांग है कि इस पर और कड़ा प्रतिबंध लगना चाहिए।

चुनाव के लिए घटाए थे दाम-शरद

राजग संयोजक शरद यादव ने कहा कि अभी संसद के लिए विपक्षी गठबन्धन की रणनीति तय नहीं हुई है लेकिन पेट्रो पदार्थो में की गई मूल्यवृद्धि ने यह स्पष्ट कर दिया है कि सिर्फ चुनावी लाभ के लिए पेट्रोल- डीजल के दाम घटाए गए थे। सहयोगी दलों से चर्चा के बाद देखेंगे कि इस मुद्दे को किस रूप में और कब उठाया जाए।सरकार की घेरेबंदी के लिए मुद्दे गिनाते शरद यादव ने कहा कि महंगाई, बेकारी, बेरोजगारी, भ्रष्टाचार के अलावा शिक्षा क्षेत्र में प्रस्तावित सुधारों का मसला प्रमुखता से उठेगा। रेल बजट और आम बजट पेश होना है और उस पर चर्चा भी होगी। उस दौरान विपक्ष दमदार तरीके से अपना पक्ष रखकर सुनिश्चित करेगा कि सरकार आम आदमी के हितों की अनदेखी न कर पाए। मंगलवार को प्रधानमंत्री के सुपुर्द की गई लिब्राहन आयोग की रिपोर्ट पर एटीआर बनाकर जल्द संसद में पेश करने का दबाव बनाए जाने की संभावना को खारिज करते राजग संयोजक ने कहा कि यह काल्पनिक सवाल है।अभी रिपोर्ट सिर्फ सरकार को सौंपी गई है, सार्वजनिक नहीं हुई है। जब तक इसका अध्ययन न कर लिया जाए कुछ भी कहना-सुनना बेमानी होगा। 6 दिसम्बर 1992 को अयोध्या में बाबरी ढांचा विध्वंस मामले की जांच के लिए जस्टिस लिब्राहन की अध्यक्षता में गठित इस रिपोर्ट पर वरिष्ठ भाजपा सांसद और इसी मामले के एक आरोपी मुरली मनोहर जोशी ने भी समान रवैया अपनाया। नियमित प्रेस ब्रीफिंग करने भाजपा मुख्यालय पहुंचे जोशी से अत्यधिक विवादित मसले से जुड़ी रिपोर्ट पर प्रतिक्रिया के लिए पचासों सवाल पूछे गए परन्तु जोशी ने हर बार टका सा जवाब दिया कि बगैर इसे देखे वे कुछ नहीं कहेंगे। पहले सरकार इस पर कार्रवाई रिपोर्ट बनाएगी फिर संसद में पेश किया जाएगा। इसके बाद बहस होगी। तब जो भी कहना होगा, जमकर बोलेंगे। सरकार ने उन्हें और आडवाणी समेत अन्य भाजपा नेताओं को फंसाने के लिए ऎसे समय रिपोर्ट पेश कराई है जब विपक्ष चुनावी हार के बाद बेहद कमजोर स्थिति में हैक् इस पर मुस्कुराते हुए जोशी ने कहा कि रिपोर्ट के निष्कर्षो को जानने के बाद ही तय किया जाएगा कि उन्हें फंसाने के लिए रिपोर्ट आई है या राम मंदिर मुद्दे को पुनजीर्वित करने के लिए।