Wednesday, September 2, 2009

खत्म होने वाली है मंदी

नई दिल्ली। प्रधानमंत्री डा. मनमोहन सिंह का कहना है कि आर्थिक मंदी का दौर अब समाप्ति पर है और आने वाले महीनों में स्थिति सामान्य होने की उम्मीद है। उन्होंने आगामी महीनों में अर्थव्यवस्था में सुधार के संकेत देते हुए कहा कि कमजोर मानसून को देखते हुए पूरी आर्थिक स्थिति पर विचार किया जाना चाहिए।

प्रधानमंत्री संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन सरकार के दूसरी बार सत्ता में आने के बाद मंगलवार को योजना आयोग की पहली पूर्ण बैठक को सम्बोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा कि वैश्विक मंदी के बाद स्थिति में अब सुधार हो रहा है।
हाल के महीने कठिन रहे हैं। ऊर्जा सुरक्षा दूसरा महत्वपूर्ण मुद्दा है, जिस पर गौर किए जाने की आवश्यकता है। आर्थिक वृद्धि के लिए ऊर्जा काफी महत्व रखती है और यही एक ऎसा क्षेत्र है जहां घरेलू अर्थव्यवस्था काफी घाटे में है। पेट्रोलियम पदार्थो की जरूरतों को पूरा करने के लिए 70 प्रतिशत तक आयात होता है। कोयले के भण्डार भी लगातार घटते जा रहे हैं। इसके लिए उन्होंने योजना आयोग से 'एकीकृत ऊर्जा नीति' के क्रियान्वयन पर ध्यान देने की हिदायत दी।
डा. सिंह ने कहा कि 11वीं पंचवर्षीय योजना का आधा समय बीत चुका है। वैश्विक आर्थिक मंदी के कठिन दौर और साथ ही मानसून की बेरूखी को देखते हुए योजना आयोग के लिए जरूरी हो गया है कि वह आयोग के मंत्री सदस्यों को देश के आर्थिक हालात से पूरी तरह अवगत कराए।
स्वीकृत ऊर्जा नीति को लागू करने की दिशा में प्रगति हुई है। इस बात का लेखा जोखा लिया जाएगा कि स्वीकृत ऊर्जा नीति के सुझावों को लागू करने के लिए और क्या किया जाना चाहिए। -मोंटेक सिंह अहलूवालिया योजना आयोग के उपाध्यक्ष
प्रधानमंत्री ने यह भी कहा* मौसम में बदलाव के खतरों के मद्देनजर तर्कसंगत ऊर्जा नीतियां काफी महत्वपूर्ण।* ऊर्जा से जुडे विभाग अलग-अलग मंत्रालयों के अधीन, ऎसे में मंत्रालयों की नीतियां भी एक दूसरे से अलग।* एकीकृत ऊर्जा नीति में समानता के लिए पहल, केबिनेट की दिसम्बर, 08 में इस नीतिगत दस्तावेज को मंजूरी।

संघ ने साधा आडवाणी पर निशाना

नई दिल्ली। लोकसभा चुनाव में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) की हार के बाद पार्टी में मचा घमासान फिलहाल थमता नजर नहीं आ रहा है। राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ (आरएसएस) ने भाजपा के वरिष्ठ नेता लालकृष्ण आडवाणी पर निशाना साधते हुए चुनाव में हार के लिए उन्हें जिम्मेदार बताया है।
आरएसएस के मुखपत्र 'पांचजन्य' के ताजा अंक में संघ ने हार का ठीकरा आडवाणी के सिर फोडते हुए कहा है कि चुनाव में उन्हें प्रधानमंत्री के रूप में पेश करना एक बडी भूल थी। संघ के वरिष्ठ सदस्य और चिंतक देवेन्द्र स्वरूप ने 'पांचजन्य' में प्रकाशित एक लेख में कहा है कि भाजपा की ओर से आडवाणी को भावी पीएम के तौर पर पेश करना और पूरे चुनाव अभियान को आडवाणी केन्द्रित करना एक बडी राजनीतिक भूल थी।
'पांचजन्य' में कहा गया है कि 'कांग्रेस ने आडवाणी और भाजपा की इस राजनीतिक भूल का बडी चतुराई से इस्तेमाल किया और इसका भरपूर लाभ उठाया।' देवेन्द्र स्वरूप ने कहा है कि कांग्रेस ने आडवाणी के लंबे राजनीतिक अनुभव के बजाय उनकी उम्र को उछालकर बहुत चालाकी से 'बुढापा बनाम युवा पीढी' को चुनाव का मुख्य मुद्दा बना दिया।

मोदी सरकार को सुप्रीम कोर्ट का नोटिस:

सुप्रीम कोर्ट ने जसवन्त सिंह की पुस्तक पर रोक के गुजरात सरकार के फैसले पर मोदी सरकार को नोटिस जारी किया है।रोक को चुनौती देने वाली याचिका पर अगली सुनवाई 8 सितम्बर को होगी। याचिका में आरोप लगाया गया है कि बगैर पढे ही पुस्तक पर प्रतिबन्ध लगा दिया गया।
गुजरात हाईकोर्ट में फैसला सुरक्षितअहमदाबाद। गुजरात हाईकोर्ट ने जसवन्त सिंह की पुस्तक पर गुजरात में प्रतिबंध को लेकर दायर याचिका पर अपना फैसला सुरक्षित रखा है। मुख्य न्यायाधीश के.एस. राधाकृष्णन की अध्यक्षता वाली वृहत पीठ के सामने राज्य सरकार ने शपथ पत्र देकर दूसरी अधिसूचना जारी करने का प्रस्ताव किया।
बस इंतजार...वसुन्धरा राजे के नेता प्रतिपक्ष पद को लेकर विवाद में भाजपा आलाकमान को कुछ दिन और इंतजार के अलावा कोई रास्ता नहीं दिख रहा है। मंगलवार को भाजपा अध्यक्ष राजनाथ सिंह के निवास पर वरिष्ठ नेता अरूण जेटली, सुषमा स्वराज और वेंकैया नायडू के साथ हुई बैठक में वसुन्धरा मामले पर गहन मंत्रणा के बाद राय यह बनी कि उन पर दबाव बनाने के बजाय उनके स्वस्थ होने तक इन्तजार किया जाए, ताकि पूरे प्रकरण को सौहार्दपूर्ण तरीके से निपटाया जा सके।
जानकार सूत्रों के अनुसार बैठक में भाजपा अध्यक्ष के समक्ष वेंकैया ने वसुन्धरा का पक्ष मजबूती से रखा। उनको लेकर लगने वाली अटकलों की स्थिति स्पष्ट करते हुए उन्होंने बताया कि वसुन्धरा उनसे मिलने दिल्ली आई थी, लेकिन अचानक बीमार पडने के कारण वह नहीं मिल पाई।
उन्होंने वसुन्धरा के चिकित्सक से हुई बातचीत का ब्योरा अध्यक्ष के सामने रख उनके मन की आशंकाओं को भी साफ करने की कोशिश की। भाजपा अध्यक्ष को वेंकैया यह भरोसा दिलाने का प्रयास किया कि वसुन्धरा केन्द्रीय नेतृत्व के निर्णय को मानेंगी। इससे पूर्व मंगलवार सुबह राजस्थान भाजपा के पूर्व अध्यक्ष ओ.पी. माथुर दिल्ली पहुंचते ही सीधे राजनाथ सिंह से मिले।
वसुंधरा समर्थक दिल्ली से लौटेजयपुर। प्रतिपक्ष की नेता वसुंधरा राजे के समर्थक विधायक व नेता मंगलवार को दिल्ली से जयपुर लौट आए। विधायक राजेन्द्र राठौड, दिगम्बर सिंह, राधेश्याम गंगानगर, कल्याण सिंह, हरिसिंह रावत, भाजपा के पूर्व प्रदेश महामंत्री रामपाल जाट आदि दोपहर में राजे की तबियत पूछकर जयपुर के लिए रवाना हो गए। भवानी सिंह राजावत दिल्ली से ही कोटा चले गए।

अब स्पीकर पर टिकी भाजपा की निगाहें

नई दिल्ली। संसद की लोक लेखा समिति से जसवंत सिंह को इस्तीफा देने के लिए मनाने में असफल रहने के बाद भाजपा की उम्मीदें अब लोकसभा अध्यक्ष पर टिक गई हैं। संसदीय समितियों में दलीय आधार पर होने वाली नियुक्तियों को देखते हुए भाजपा को पूरा विश्वास है कि जसवंत सिंह ने अगर खुद इस्तीफा नहीं दिया तो लोकसभा अध्यक्ष अपने अधिकारों का इस्तेमाल करते हुए जसवंत को समिति के अध्यक्ष पद से भी हटा देंगी।
जसवंत सिंह को पद छोडने के लिए मनाने की कोशिशें नाकाम होने के बाद भाजपा ने अब पूरा मामला लोकसभा अध्यक्ष पर छोड दिया है। सूत्रों के अनुसार लोकसभा में विपक्ष के नेता लालकृष्ण आडवाणी ने सोमवार को लोकसभा अध्यक्ष मीरा कुमार से इस बारे में चर्चा भी की है। संसदीय परंपरा में लोकसभा में मुख्य विपक्ष को लोक लेखा समिति का अध्यक्ष पद दिया जाता है। इसीलिए जब यह पद भाजपा के हिस्से में आया तो उसने वरिष्ठ नेता जसवंत सिंह का नाम आगे बढाया। अब जबकि जसवंत सिंह को भाजपा से ही बाहर कर दिया है तो इस पद पर भाजपा के ही किसी सदस्य की नियुक्ति होनी चाहिए।इसके पहले लोकसभा में पार्टी की उप नेता सुषमा स्वराज व एस एस अहलूवालिया ने सोमवार को जसवंत सिंह से मुलाकात कर उनसे इस्तीफा देने का आग्रह किया था। लेकिन जसवन्त सिंह ने पार्टी की सलाह को दरकिनार कर दिया। उन्होंने मंगलवार को कहा कि वह संसद की लोक लेखा समिति (पीएसी) के अध्यक्ष का पद नहीं छोडेंगे। जसवन्त ने कहा, मुझे पद छोडने के लिए कहना किसी राजनीतिक दल का नहीं, बल्कि लोकसभा अध्यक्ष का काम है।

हंगामे के बाद ताला तोडा

जयपुर। विभिन्न समस्याओं को लेकर एनएसयूआई के छात्रों मंगलवार को राजस्थान विश्वविद्यालय के प्रशासनिक भवन में जमकर हंगामा किया। आक्रोशित छात्रों ने प्रशासनिक भवन का ताला तोड दिया। इसके बाद छात्र सीधे परीक्षा नियंत्रक एन.एन.गुप्ता के कमरे में जा घुसे और उनका घेराव किया।
छात्र परीक्षा नियंत्रक के सामने रखी टेबल पर चढ गए और अपनी मांगे पूरी करने के लिए दबाव बनाने लगे। प्रदर्शन के दौरान छात्रों ने टेबिल का शीशा भी फोड दिया।
हंगामे की जडराजस्थान विश्वविद्यालय के प्रशासनिक भवन का द्वार सुबह 11 बजे से दोपहर 2 बजे तक बंद रखे जाने, बीएड के प्रवेश पत्र से वंचित छात्राओं को प्रवेशपत्र दिए जाने, आरएल (परिणाम बाद में) को शीघ्र निपटाने सहित छात्रों से जुडी अन्य मांगे प्रदर्शन का मुख्य कारण रहीं।
दो बजे के बाद नहीं मिलते कर्मचारीएनएसयूआई के विश्वविद्यालय इकाई अध्यक्ष मुकेश भाखर व छात्र नेता राजेंद्र तिवाडी ने बताया कि पिछले तीन दिनों से प्रशासनिक भवन का द्वार सुबह 11 बजे से दोपहर 2 बजे तक बंद रहता है, जिससे विद्यार्थियों को परेशानी होती है। छात्र नेता अजय मीणा ने आरोप लगाया कि कर्मचारी 2 बजे के बाद प्रशासनिक भवन में कर्मचारी ही नहीं मिलते, जिससे विद्यार्थियों को निराश होकर लौटना पडता है।
छात्राएं भी पीछे नहींप्रदर्शन के दौरान जमवारामगढ के लक्ष्मीबाई टीटी कॉलेज की करीब आधा दर्जन छात्राएं भी आ गईं और उन्होंने भी परीक्षा नियंत्रक को प्रवेश पत्र जारी करने के लिए कहा। छात्राओं का कहना था कि उनकी उपस्थिति पूरी होने के बाद भी विश्वविद्यालय ने उन्हें प्रवेशपत्र जारी नहीं किए हैं। बाद में छात्राओं को विश्वविद्यालय ने प्रवेश पत्र जारी कर दिए।
इस्तीफे की मांगमांगें नहीं माने जाने पर छात्रों ने परीक्षा नियंत्रक से इस्तीफा देने की मांग की। बाद में पुलिस प्रशासन की समझायश के बाद मामला शांत हुआ। जिन छात्राओं को बीएड की परीक्षा के प्रवेशपत्र नहीं मिले हैं उन्हें विश्वविद्यालय अंडरटेकिंग दिलवाकर परीक्षा दिलवाएगा।
इन परीक्षार्थियों से हम शपथ पत्र भरवा रहे हैं। यदि इनकी उपस्थिति कम है तो इन्हें कोर्ट का निर्णय मानना पडेगा। प्रशासनिक भवन का द्वार बंद नहीं होगा। गोपनीय शाखा में प्रवेश बंद रखा जाएगा।एम.एस. पूनिया, चीफ प्रॉक्टर, राजस्थान विश्वविद्यालय

सोनिया ने सदस्यता लौटाई

नई दिल्ली। कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी ने मंगलवार को प्रेस क्लब ऑफ इण्डिया (पीसीआई) की मानद सदस्यता लौटा दी। पार्टी के एक वरिष्ठ नेता ने बताया कि उन्होंने सदस्यता लौटा दी है। हमें प्रेस क्लब की अंदरूनी राजनीति से कोई लेना देना नहीं है।

Monday, August 31, 2009

यहां भी पहुंचा 'बवाल'

दिल्ली से जयपुर तक भाजपा के अन्दरूनी झगडों की आंच भीलवाडा तक पहुंच गई है। पूर्व सांसद सुभाष बहेडिया को सदस्यता अभियान का जिला प्रभारी बनाए जाने पर पार्टी के कई पदाधिकारियों व निवर्तमान प्रदेश उपाध्यक्ष वीपी सिंह ने बगावती तेवर अपना लिए। भाजपा यहां भी वसुन्धरा राजे खेमे एवं प्रदेश अध्यक्ष अरूण चतुर्वेदी खेमे में बंटी दिखाई दी।

भाजपा सदस्यता अभियान के प्रदेश संयोजक वासुदेव देवनानी की अध्यक्षता में सोमवार को हुई पार्टी के जिला पदाधिकारियों की बैठक में खेमेबंदी की झलक साफ दिखाई दी। बैठक से वीपी सिंह के उठकर चले जाने के बाद संगठन में बवाल की स्थिति है। अभियान के लिए मण्डल संयोजकों की नियुक्ति में पार्टी संगठन को विश्वास में नहीं लेने का आरोप लगाते हुए सिंह के नेतृत्व में शाम को अलग बैठक हुई।
बैठक में कार्यकर्ताओं व पदाधिकारियों की बात सुनने के बाद सिंह ने सदस्यता अभियान नियुक्ति को लेकर आक्रामक तेवर दिखाए। उन्होंने देवनानी पर ही अविश्वास जताते हुए कहा- 'सदस्यता अभियान में जिला प्रभारियों की नियुक्ति के नाम पर पार्टी की मुखालफत करने वालों को पुरस्कृत किया जा रहा है। मैडम के खिलाफ रहे लोगों को प्रभारी बनाकर आखिर क्या चाहते हैं। सभी जानते हैं कि सुभाष बहेडिया ने लोकसभा चुनाव में यहां के अधिकृत प्रत्याशी के खिलाफ माहौल बनाया था'।
जिलाध्यक्ष दामोदर अग्रवाल ने पार्टी अनुशासन की दुहाई देते हुए कहा कि सिंह के माध्यम से कार्यकर्ताओं की बात आगे पहुंचाई जाएगी। बैठक में भाजपा के कई पदाधिकारियों व कार्यकर्ताओं ने कहा कि किसी भी सूरत में बहेडिया को जिला प्रभारी स्वीकार नहीं करेंगे।
बाल आप्टे से करेंगे शिकायत सिंह के अनुसार वह कार्यकर्ताओं की शिकायतों को एक-दो दिन में सदस्यता अभियान के राष्ट्रीय संयोजक बाल आप्टे के समक्ष रखेंगे। उन्होंने जरूरत पडने पर कार्यकर्ताओं को दिल्ली पहुंचने के लिए तैयार रहने को भी कहा।