विधानसभा चुनावों में बाजी हाथ से निकलने के बाद भाजपा ने लोकसभा चुनावों में परचम फहराने की मंशा लिए तैयारियां शुरू कर दी है।लोकसभा चुनावों की प्रारम्भिक तैयारियों के तहत भाजपा देहात जिला की बैठक आगामी 21 जनवरी को दोपहर साढ़े 12 बजे पटेल सर्कल स्थित पार्टी कार्यालय पर रखी गई है।देहात जिला प्रवक्ता वीरेन्द्रसिंह सौलंकी ने बताया कि देहात जिलाध्यक्ष गुणवंत सिंह झाला की अध्यक्षता में होने वाली बैठक में लोकसभा चुनावों के मद्देनजर संगठनात्मक चर्चा की जाएगी। बैठक में उदयपुर संसदीय क्षेत्र के प्रभारी रामदास अग्रवाल व नन्दलाल मीणा विशेष रूप से उपस्थित रहेंगे।सौलंकी ने बताया कि बैठक में जिले के सभी विधानसभा चुनाव लड़ चुके प्रत्याशी, जिला पदाधिकारी, जिला कार्य समिति सदस्य, मण्डल अध्यक्ष महामंत्री व मोर्चा-प्रकोष्ठों के जिलाध्यक्ष महामंत्री तथा विशेष आमंत्रित सदस्य भाग लेंगे।
Monday, January 19, 2009
गहलोत के सािन्नध्य में होगा मानगढ धाम पर विशेष आयोजन
वागड के जलियावाला बाग के नाम से पहचाने जाने वाले मानगढ धाम पर फरवरी माह के पहले सप्ताह में होने वाले दो दिवसीय विशाल धार्मिक कार्यक्रम में राज्य के मुख्य मंत्री अशोक गहलोत सहित विख्यात संत, महंत एवं जनप्रतिनिधि हिस्सा लेंगे। महर्षि दयानंद सेवाश्रम रातीतलाई बांसवाड़ा के तत्वावधान में कार्यक्रम की तैयारियां जोर शोर से चल रही हैं।कार्यक्रम के सफल आयोजन को लेकर गठित श्री गोविंद गुरू जयंती समारोह आयोजन समिति की रविवार को आनन्दपुरी पंचायत समिति सभागार में बैठक हुई। अध्यक्षता प्रधान श्रीमती सुभद्रा गरासिया ने की। मुख्य अतिथि समिति के अध्यक्ष एवं मानवाधिकार आयोग के प्रदेशाध्यक्ष खेमराज गरासिया थे। कार्यक्रम संयोजक जीववर्धन शात्री ने अतिथियों का स्वागत करते हुए बताया कि पंजाब में हुए जलियावाला बाग कांड को पूरे राष्ट्र में जाना जाता हैं जबकि मानगढ धाम पर सरकारी आंकडों के हिसाब से लगभग 1500 आदिवासियों के नरसंहार को राजस्थान में भी नहीं जाना जाता हैं। उन्होनें बताया कि प्रसिद्व स्वतंत्रता सैनानी और आदिवासी समाज सुधारक गोविंद गुरू की 150वीं जयंती एवं मानगढ क्रांति के सौ वर्ष पुरे होने के उपलक्ष्य में 7 व 8 फरवरी को मानगढ बलिदान शताब्दी समारोह मनाया जाएगा। कार्यक्रम में अंतर्राष्ट्रीय आर्य समाज के प्रधान स्वामी अग्निवेश सहित कई संत हिस्सा लेंगे। कार्यक्रम में राज्य के मुख्य मंत्री अशोक गहलोत सहित केबिनेट के कई मंत्री, विधायक और जनप्रतिनिधि भी आ सकते हैं। इस दौरान 5 फरवरी से मानगढ धाम पर स्थानीय भजन मंडलियें द्वारा भजन गायन कार्यक्रम शुरू हो जाएगें। विशाल यज्ञ कार्यक्रम के अलावा श्री गोविंद गुरू की जीवनी पर आधारित पुस्तक का विमोचन भी होगा। कार्यक्रम को लेकर दयानंद सेवाश्रम से जुडे उनके शिष्य जिलेभर में प्रचार प्रसार में जुट गए हैं। एक मोटे अनुमान के अनुसार इस कार्यक्रम में लगभग 20,000 लोगों की सहभागिता रहेगी। बैठक में सोमेश्वर पटेल, मणिलाल, मगनलाल पारगी, सुखलाल निनामा, करमचंद पारगी, लालसिंह पटेल, रकमचंद चरपोटा, शंभुलाल कटारा, परथा दायमा, योगेंद्र आर्य, रामचंद्र रावत, जोरावर पारगी, मोहनलाल ताबियार, रामेश्वर दयाल आर्य, गणेशलाल डामोर, कमलकिशोर पारगी, ओम लोदावरा सहित कई लोग मौजूद थे।
गहलोत मंत्रीमण्डल में भीलवाडा को प्रतिनिधित्व मिलना मुश्किल
गहलोत मंत्रिमंडल में भीलवाड़ा को प्रतिनिधित्व मिलना अब संभव नहीं लग रहा है। चुनाव जीतने के साथ ही मांडल क्षेत्र के विधायक रामलाल जाट का मंत्री बनना पक्का माना जा रहा था। लेकिन जिले के कुछ कद्दावर नेता अपने स्वार्थों के चलते राह में रोड़ा बने है। जिससे भीलवाड़ा विकास में भी पिछड़ेगा।जानकार सूत्रों की माने तो माण्डल क्षेत्र से पूर्व पंचायतराज मंत्री कालूलाल गुर्जर को पटखनी देने वाले डेयरी चेयरमेन और कांग्रेस के जमीन से जुड़े नेता रामलाल जाट का मंत्री बनना भीलवाड़ा में ही नहीं बल्कि प्रदेश की राजनीति में भी पक्का माना जा रहा था। लेकिन प्रथम सूची में रामलाल जाट को तो जगह नहीं मिल पाई। चार अन्य जाटों को मंत्री बना दिया गया। जिससे भीलवाड़ा को निराशा हाथ लगी और जाट समर्थक भी हताश हो गये। अब उम्मीद लगाई जा रही है कि अगले सप्ताह होने वाले मंत्रिमंडल विस्तार में जाट को झण्डी लगी कार मिल ही जायेगी। लेकिन उनकी राह में कांटे बिछाने वालों में और कोई नहीं बल्कि भीलवाड़ा के ही कांग्रेस के भीष्म पितामह और उनके कुछ चहेतों नेताओं के साथ ही दो विधायकों के नाम भी चर्चा में है।जानकारों की माने तो इन नेताओं ने मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के सामने जाट को मंत्री नहीं बनाने की तिकड़म बाजी की है। अब देखना यह है कि तिकड़मबाज अपनी योजना में सफल होते है और भीलवाड़ा के विकास को ताक में रख देते है या फिर जाट मंत्री बन भीलवाड़ा के विकास में भागीदारी निभा पाते है।
Friday, January 16, 2009
भाजपा साफ करे आडवाणी प्रधानमंत्री पद के उम्मीदवार है : शिवसेना
राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन के प्रमुख घटक दल शिवसेना ने कहा है कि लालकृष्ण आडवाणी को प्रधानमंत्री पद का उम्मीदवार घोषित करना भारतीय जनता पार्टी का ``अंदरूनी मामला'' है और राजग के सामने जब यह मुद्दा आयेगा तब पार्टी अपनी भूमिका स्पष्ट करेगी। शिवसेना के मुखपत्र मराठी दैनिक ``सामना'' के ताजा अंक के संपादकीय में कहा गया है कि भाजपा उनका निकटवर्ती सच्चा मित्र है और मित्र दल में प्रधानमंत्री पद को लेकर कोई तूफान उठता है तो शिवसेना बेचैन होती है । संसदीय चुनाव की अभी घोषणा भी नहीं हुई लेकिन कुछ राजनीतिक दल और नेता ``कौन बनेगा प्रधानमंत्री'' का खेल खेलने में मस्त है । भाजपा के ही कुछ नेता आडवाणी को प्रधानमंत्री बनने से रोकने के उद्देश्य से सक्रिय हो गये हैं । शिवसेना का मानना है कि आडवाणी प्रधानमंत्री पद के उम्मीदवार हैं लेकिन अन्य नेता भी प्रधानमंत्री पद की अपेक्षा रखते हैं,तो उसमें कोई गलत नहीं है। संपादकीय में कहा गया है कि पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी का स्वास्थ्य अगर ठीक रहता तो, ``प्रधानमंत्री कौन बने'' यह सवाल ही नहीं पैदा होता।शिवसेना ने कहा कि आडवाणी के अलावा भैरो सिंह शेखावत, राजनाथ सिंह। डा. मुरली मनोहर जोशी, अरूण जेटली और श्रीमती सुषमा स्वराज के नाम प्रधानमंत्री पद की दौड में है। इनके अलावा कांग्रेस में भी प्रधानमंत्री डा. मनमोहन सिंह के अतिरिक्त अर्जुन सिंह से लेकर प्रणव मुखर्जी तक इस पद की आस लगाये बैठे है और हाल में मुखर्जी ने प्रधानमंत्री पद के लिये राहुल गांधी का नाम लेकर इस सर्वोच्च पद की गरिमा ही समाप्त कर दी है।शिवसेना ने कहा कि बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार भी पूर्व प्रधानमंत्री एच डी देवेगौड़ा की तरह अपना भाग्य खुलने की प्रतीक्षा कर रहे है।शिवसेना ने कहा है कि राष्ट्रपति पद के चुनाव में उन्होंने श्रीमती प्रतिभा पाटिल को अपना समर्थन व्यक्त किया था लेकिन उस समय जनता दल (यू) के नेता दिग्विजय सिंह ने इसके विरोध में शिवसेना के साथ अपने संबंध तोड़ देने की चेतावनी दी थी । संपादकीय में कहा गया है राष्ट्रपति चुनाव में शेखावत के हार जाने से उनकी राजनीतिक पारी एकदम खत्म हो गई।शिवसेना ने गुजरात के मुख्यमंत्री नरेन्द्र मोदी को गुजरात का सर्वेसेवा करार देकर हिन्दुत्व की पताका बड़े साहस के साथ फहरायी है और गुजरात के मार्ग पर सबसे आगे निकल गयी है । संपादकीय में कहा गया है कि पूर्व में गुजरात को महात्मा गांधी अथवा सरदार पटेल के नाम से जाना जाता था लेकिन आज गुजरात को नरेन्द्र मोदी के नाम से जाना जाने लगा है।शिवसेना ने कहा है कि ऐसी स्थिति में जब भाजपा ने एक बार आडवाणी को प्रधानमंत्री पद का उम्मीदवार घोषित करने का फैसला कर लिया है तो इसके बाद प्रधानमंत्री कौन यह चर्चा बेमानी है और भाजपा को भी यह साफ कर देना चाहिये कि आडवाणी ही हमारे प्रधानमंत्री पद के उम्मीदवार है और अन्य कोई नहीं, जिससे स्थायी रप से इस भ्रम को दूर किया जा सके।
असमानता और अवसरों की गैर बराबरी को कम करना महत्वपूर्ण : मनमोहन सिंह
प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने बृहस्पतिवार को कहा कि असमानता और अवसरों की गैर बराबरी को कम करना देश के लिए सर्वाधिक महत्वपूर्ण है। उन्होंने कहा कि प्रमुख विकास आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए ध्यान केंद्रित किया जाना चाहिए।उन्होंने आगे कहा कि मेरे हिसाब से हमारे समक्ष सबसे महत्वपूर्ण मसला असमानता और अवसरों की गैर बराबरी को कम करना चुनौती के रूप में है। हमें विकास की बुनियादी आवश्यकताओं को पूरा करने की ओर ध्यान केंद्रित करना चाहिए जो मानव जाति के विकास के लिए आवश्यक हैं।मनमोहन सिंह यहां जिला योजना समिति के अध्यक्षों के पहले सम्मेलन का उद्घाटन कर रहे थे। उन्होंने कहा कि जिन क्षेत्रों की ओर ध्यान दिए जाने की आवश्यकता है उनमें बीमारियों कुपोषण को समाप्त करना, स्वच्छ पेय जल की सुविधा प्रदान करना, अच्छी तथा सार्वभौमिक शिक्षा, आबादी को दक्ष बनाना, रोजगार के अवसर प्रदान करना और पर्यावरण की सुरक्षा करना शामिल है।सिंह ने कहा कि ग्रामीण जल आपूर्ति जैसे कार्यक्रम को योजनाबद्ध किया जाना चाहिए और जिला स्तर पर इसे अमल में लाया जाना चाहिए तथा शहरी क्षेत्रों में मध्यम अवधि वाले विकास योजनाओं को जारी रखना चाहिए।देश को आगे ले जाने में पंचायती राज संस्थाओं की भूमिका की सराहना करते हुए उन्होंने कहा कि पंचायतों के वास्तविक सशक्तिकरण की दिशा में प्रगति भले ही असमान रही हो लेकिन स्थानीय सरकारों के नियमित चुनाव कराके लोकतांत्रिक कार्यव्यवहार को बढ़ाया गया है।प्रधानमंत्री ने कहा कि स्थानीय संस्थानों में चुने हुए प्रतिनिधियों के क्षमता निर्माण की आवश्यकता है। हमने अभी तक इस पर अपना ध्यान केंद्रित नहीं किया है। प्रधानमंत्री ने कहा कि पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी ने स्थानीय सरकारों को पुनर्जीवित करने के बारे में राष्ट्रीय सहमति कायम करने की पहल की अगुवाई की थी। उन्होंने कहा कि संप्रग सरकार ने केंद्र में पंचायती राज मंत्रालय को प्रतिष्ठापित किया ताकि लोक कल्याण के लिए मौन राजनीतिक और सामाजिक क्रांति को ठोस लक्ष्योन्मुख कार्रवाई में परिवर्तित किया जा सके।
समाजवादी पार्टी ने दत परिवार में करवा दी कलह
चुनाव शुरु होने वाले है। सीटों को लेकर कांग्रेस राकांपा और सपा के बीच रस्साकशी शुरु हो गयी है। इन पार्टियों की निगाहें हैं मुंबई के उत्तरी इलाके पर जहां से अपनी जीत को सुनिश्चत करने के लिए इन्होंने चुना है दत्त परिवार को।कांग्रेसी सूत्रों का मानना है कि सपा चुनावी मैदान में दत्त परिवार का नाम लाकर मुंबई व महाराष्ट्र की लोकसभा सीटों के लिए कांग्रेस पर दबाव बनाना चाहती है। वहीं 2004 में मुंबई की 6 में से 5 सीटों पर विजयी कांग्रेस कोई भी सीट छोड़ना नहीं चाहती है। दूसरी ओर राष्ट्रवादी कांग्रेस मुंबई में एक लोकसभा सीट चाहती है। महाराष्ट्र समाजवादी पार्टी प्रमुख अबु असीम आजमी ने मुंबई के उत्तर पश्चिम इलाके से अपना प्रत्याशी चुनावी सफर में उतरने का संकेत देकर कांग्रेस व राष्ट्रवादी कांग्रेस गठबंधन के समक्ष कड़ी चुनौती खड़ीकर दी है। मुंबई के उत्तर पश्चिम इलाके पर दत्त परिवार का दबदबा रहा है वहां से सुनील दत्त पांच बार विजी रह चुके हैं। सूत्रों की माने तो उत्तर पश्चिम सीट को लेकर हो रही उठापटक की देखते हुए प्रिया दत्त उत्तर मध्य से लड़ने का मन बना रही है। उनके भाई संजय की नामौजूदगी से भी उनकी जीत पर कोई असर नहीं पड़ेगा। एक कांग्रेसी नेता के अनुसार परिसीमन के बाद उत्तर पश्चिम सीट के समीकरण में उलटफेर हुआ है। उत्तर मध्य से प्रिया दत्त को जीतने में कोई मुश्किल नहीं होगी क्योंकि इस क्षेत्र की जनता सुनिल दत्त की कट्टर समर्थक रही है। इस पूरे प्रकरण में संजय दत्त की भूमिका को लेकर कांग्रेस का मानना है कि सपा मुन्नाभाई को रीयल लाइफ में मामू बना रही है। प्रिया व संजय से जब उनकी राय पूछी गयी और जानने का प्रयास किया गया कि उनका अगला कदम क्या होगा तो प्रिया दत्तने कहा मैं कांग्रेस का साथ दूंगी और मुझे खुशी होगी अगर संजय हमारे लिए (कांग्रेस) के लिए काम करेगा। वहीं संजय दत्त का कहना था में अभी कुछ नहीं कहूंगा। मैं अपने राजनीतिक कदम के बारे में एक या दो दिन में बात करुंगा। भले ही चुनाव का परिणाम कुछ भी हो कोई भी पार्टी जीते परंतु सत्ता की चाहतने भाई बहन के प्यार को जरुर खत्म व पराजित कर दिया है।
बंगला खाली नहीं करने वाले मंत्रियों को नोटिस
पद से हटने के बाद भी बंगले का मोह नहीं छोडने वाले तीन मंत्रियों को राज्य के जनरलएडमिनिस्ट्रेशन डिपार्टमेंट (जीएडी) ने बंगला खाली करने का नोटिस दिया है। राज्य में पिछले महिने मंत्रिमंडल में फेरफार किया था। नये मुख्य मंत्री अशोक चव्हाण के मंत्रिमंडल से अलग किए गए अनिल देशमुख (बांधकाम निर्माण विभाग), बाबा सिद्धिकी (अन्न एवं नागरी आपुर्ति मंत्री) तथा वसंत पुरके (िशक्षा विभाग) को अपने बंगले तत्काल खाली करने का नोटिस दिया है। यह बंगले नरीमन पॉईंट में मंत्रालय के सामने 2500 स्क्वायर फुट के क्षेत्र में है। नियमानुसार मंत्री पद छोडने के बाद मंत्रियों को 15 दिन में ही बंगला खाली करना होता है। ऐसी ही नोटिस पूर्व परिवहन मंत्री धर्मराव आत्राम को भी भेजी है। उनका मलबार हिल में सरकारी आवास खाली करना शेष है। आत्राम ने जुलाई 2008 में त्याग पत्र दिया था। चिंकारा की हत्या के प्रकरण में उन पर आरोप लगा था। कांग्रेस से सस्पेंड हुए नेता नारायण राणे ने भी मलबार हिल के निवास स्थान को खाली नहीं किया है। जी एडी के सूत्रों ने बताया कि अभी तक राणे को नोटिस नहीं भेजा है क्योंकि उनका राजनीतिक तौर पर निर्णय तय नहीं हुआ है।
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