Monday, December 7, 2009

पृथक तेलंगाना राज्य बनाने की भाजपा की संसद में मांग

भाजपा ने सोमवार को संसद के दोनों सदनों में पृथक तेलंगाना राज्य के गठन के लिए तत्काल विधेयक लाने की मांग की। लोकसभा में भाजपा की उप नेता सुषमा स्वराज ने शून्यकाल के दौरान यह मुद्दा उठाते हुए कहा कि पृथक तेलांगना राज्य के गठन के लिए आंदोलन ने तीव्र रूप ले लिया है और चौदह लोगों ने आत्महत्या की हैं जिनमें सभी उम्रवर्ग के लोग शामिल हैं। उन्होंने कहा कि हमारी पार्टी सालों से तेलांगना राज्य के गठन की मांग का समर्थन कर रही है।
भाजपा नेतृत्व वाली राजग सरकार के कार्यकाल के दौरान देश में तीन नये राज्यों झारखंड, उत्तराखंड और छत्तीसगढ का गठन किया गया था। राजग सरकार तेलांगना राज्य का भी गठन करती लेकिन उस वक्त गठबंधन सरकार में शामिल तेलगू देशम पार्टी इसकी पक्षधर नहीं थी, इसलिए विधानसभा से इस बारे में प्रस्ताव पारित नहीं हुआ। भाजपा नेता ने सरकार से पृथक तेलांगना राज्य के गठन के लिए तत्काल विधेयक लाने की मांग की और कहा कि अगर विधेयक आता है तो इसके पारित होने में कोई दिक्कत नहीं होगी। उन्होंने कहा कि इससे पृथक राज्य के गठन की लोगों की सालों से चली आ रही प्रतीक्षा समाप्त होगी और आंदोलन को लेकर जा रही जिंदगियां बचाई जा सकेंगी। सुषमा स्वराज की बात का जनता दल यू के शरद यादव ने भी समर्थन किया। उधर राज्यसभा में शून्यकाल के दौरान भाजपा के एम वेंकैया नायडू ने यह मुद्दा उठाते हुए कहा कि एक पूर्व मंत्री इसी मुद्दे पर भूख हड़ताल पर बैठे हैं। उन्होंने कहा कि कांग्रेस ने अलग राज्य बनाने का आश्वासन दिया था लेकिन अभी तक कुछ नहीं हुआ।

लुधियाना मामले पर पंजाब विधानसभा में मारपीट

लुधियाना में हुए बवाल की तपिश बुधवार को पंजाब विधानसभा तक जा पहुंची। इस मसले पर कांग्रेस और अकाली दल के विधायकों में जमकर गर्मागर्मी हुई। कुछ देर में मामला हाथापाई तक जा पहुंचा। टीवी रिपोर्ट्स के मुताबिक पंजाब के डिप्टी सीएम सुखबीर सिंह बादल विधानसभा में लुधियाना मामले पर बयान दे रहे थे। इस बीच कांग्रेस विधायकों ने लुधियाना मामले में सरकार पर नाकामी का आरोप लगाया। मामला गर्मा गया और अकाली और कांग्रेस विधायकों के बीच तू तू-मैं मैं होने लगी। कुछ देर में नौबत मारपीट तक जा पहुंची। कांग्रेस विधायकों ने इसके लिए अकाली विधायकों को जिम्मेदार ठहराया है। इस हंगामे के बाद विधानसभा को 1 घंटे के लिए स्थगित कर दिया गया। गौरतलब है कि लुधियाना में कुछ दिन पहले प्रवासी मजदूरों ने हिंसक आंदोलन किया था। उनका यह प्रदर्शन कथित तौर पर मजदूरी लूटे जाने के विरोध में था। इसकी वजह से हिंसा भड़क उठी थी और कुछ इलाकों में कर्फ्यू लगाने की नौबत आ गई थी।

राहुल की प्रेस कांफ्रेंस पर विवाद

युवा कांग्रेस के सदस्यता अभियान में तेजी लाने के लिए उत्तर प्रदेश के दो दिवसीय तूफानी दौरे पर आए कांग्रेस के राष्ट्रीय महासचिव राहुल गांधी के होने वाले संवाददाता को सोमवार सुबह कथित रूप से निरस्त किए जाने के बाद उठे विवाद को देखते हुए अंतत: अनुमति मिल गई है। कांग्रेस प्रवक्ता अखिलेश प्रताप सिंह ने बताया कि पर्यटन विभाग के प्रबंध निदेशक अवनीश अवस्थी ने उन्हें अवगत कराया है कि राहुल गांधी के लिए आवंटित किए गए प्रेक्षागृह में संवाददाता सम्मेलन की अनुमति प्रदान कर दी गई है। इससे पहले कांग्रेस प्रवक्ता ने बताया था कि सोमवार सुबह उनको पर्यटन विभाग के एक अधिकारी ने फोन पर सूचित कर बताया कि उच्चाधिकारियों के आदेश पर राहुल गांधी के लिए पहले से बुक कराए गए सभागार की बुकिंग को निरस्त कर दिया गया है। कांग्रेस प्रवक्ता ने कहा कि पर्यटन विभाग ने पहले से बुक कराए गए सभागृह के आवंटन को किन कारणों से निरस्त किया इस बारे में कुछ नहीं बताया गया। उन्होंने कहा कि कल तक तो पर्यटन विभाग के अधिकारी और एसपीजी की टीम प्रेस कांफ्रेंस स्थल की सुरक्षा आदि व्यवस्था के लिए आपसी समन्वय बनाए हुए थे लेकिन आज अचानक आवंटन को निरस्त कर दिया। इस बीच, सोमवार को अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय (एएमयू) में राहुल का जोरदार स्वागत किया गया। राहुल ने एएमयू पहुंचने के बाद वहां अलग-अलग विभागों में जाकर छात्रों से मुलाकात की। राहुल से मिलने के लिए युवाओं और छात्रों की भीड़ उमड़ पड़ी।

मोदी सरकार के मंत्निमंडल की रेगिरस्तान में बैठक संपन्न

जलवायु परिवर्तन पर जनजागरुकता के तहत मालदीव में सागर में और नेपाल में माऊंट एवरेस्ट पर मंत्निमंडलीय बैठकों के अभिनव प्रयोग के बाद गुजरात में भी रन्न आफकच्छ के रेगिस्तानी इलाके में राज्य सरकार का चार दिवसीय चितंन शिविर आज संपन्न हुआ।शिविर का आज चौथा और अंतिम दिन था जिसमें मुख्यमंत्नी समेत मंत्निमंडल के सभी सदस्यों और नौकरशाहों ने हिस्सा लिया। इन सबको रेगिस्तान में सूर्योदय एवं सूर्यास्त के अद्भुत नजारे देखने का अवसर मिला है। शिविर को पूर्व राष्ट्रपति ए पी जे अब्दुल कलाम ने संबोधित किया और गुजरात के मंत्नियों और नौकरशाहों को प्रशासन और जलवायु परिवर्तन की बारीकियां बतायीं।शिविर में प्रशासन को दुरस्त करने के लिए सामूहिक चर्चा और विभिन्न योजनाओं के क्रियान्वयन के विश्लेषण के साथ ही अधिकारियों को अपना कौशल सुधारने पर बल दिया गया।मुख्यमंत्नी नरेंद्र मोदी के कार्यकाल में इसतरह का यह छठा वार्षिक आयोजन है जिसमें भारतीय प्रशासनिक सेवा के 170 से अधिक अधिकारियों ने हिस्सा लिया। मोदी ने जलवायु परिवर्तन विषय वाले इस विशेष सत्न की तुलना मालदीव में मंत्निमंडल की पानी में और नेपाल में मंत्निमंडल की माऊंट एवरेस्ट पर हुई बैठकों से की है। मोदी सरकार के दौरान ही गुजरात में इस वर्ष के प्रारंभ में जलवायु परिवर्तन नामक अलग विभाग की स्थापना हुई और इसकी चहुंओर सराहना हुई।

Sunday, December 6, 2009

केन्द्रीय मंत्री जोशी की प्रतिष्ठा दांव पर

राजस्थान क्रिकेट एसोसिएशन (आरसीए) के चुनाव में केन्द्रीय ग्रामीण विकास मंत्री सी.पी. जोशी और आईपीएल के कमिश्नर ललित मोदी के बीच अध्यक्ष पद के लिए सीधे टक्कर होगी। चुनाव को लेकर केन्द्रीय मंत्री जोशी की प्रतिष्ठा दांव पर है।

प्रदेश में यह पहला मौका है जब क्रिकेट के सर्वोच्च पद पर बडे कद के राजनीतिज्ञ सीधे मैदान में हैं। अध्यक्ष पद के तीसरे उम्मीदवार शिवचरण माली ने रविवार को दिनभर चले नाटकीय घटनाक्रम के बाद शाम को अध्यक्ष और डिप्टी प्रेसिडेंट पद से नाम वापस ले लिया।
नाम वापसी का समय शाम पांच बजे तक था, लेकिन माली जयपुर के सांसद महेश जोशी और वन राज्य मंत्री रामलाल जाट करीब पांच बजकर दस मिनट पर क्रिकेट एकेडमी पहुंचे और इसकी घोषणा की। उधर, डॉ. बिमल सोनी को निर्विरोध डिप्टी पे्रसीडेंट चुन लिया गया।
शनिवार को किसी भी सूरत में नाम वापस नहीं लेने का दावा करने वाले माली ने किसी भी तरह के राजनीतिक दबाव से इनकार किया। ज्यादा सवाल करने पर माली ने कहा कि महेश जोशी इन सवालों का जवाब देंगे। जोशी बोले- माली निष्ठावान कांग्रेसी कार्यकर्ता रहे हैं। उनके खेल प्रेम को देख उन्हें क्रीडा परिषद का अध्यक्ष बनाया जा रहा है।
राठौड गुट को मोदी के पैनल में जगहनाम वापसी के समय तक क्रिकेट राजनीति में अलटा-पलटी का दौर चला। शनिवार तक सीपी जोशी गुट का समर्थन करने वाला राजेन्द्र सिंह राठौड गुट मोदी गुट के समर्थन में उतर आया। सूत्रों के अनुसार राठौड गुट को जोशी के पैनल में जगह नहीं मिली।
डिप्टी प्रेसीडेंट के लिए जब शिवचरण माली और सचिव पद के लिए पूर्व अध्यक्ष संजय दीक्षित का पैनल में नाम आया तो राठौड गुट ने अलग होकर चुनाव लडने की घोषणा कर दी। राठौड गुट को मोदी गुट के पैनल में उचित स्थान मिलने से चुनावी तालमेल बैठ गया। अब खुद राठौड मोदी गुट की ओर से सचिव पद के लिए संजय दीक्षित के खिलाफ मैदान में हैं।

जोशी के खिलाफ सुनवाई 9 को

केन्द्रीय ग्रामीण एवं पंचायत राज मंत्री डा.सी.पी. जोशी के खिलाफ दायर परिवाद पर सुनवाई के लिए न्यायालय ने 9 दिसम्बर की पेशी नीयत की है। जोशी के खिलाफ नाथद्वारा विधायक कल्याणसिंह ने विशेष सत्र अदालत (भ्रष्टाचार संबंधी मामला) में परिवाद दर्ज करवाया था। परिवाद में सिंह ने डा. जोशी को राजसमंद जिला क्रिकेट संघ का कोषाध्यक्ष बनाने की प्रक्रिया पर सवाल उठाए हैं। परिवाद में राजसमंद क्रिकेट संघ के पदाघिकारी सहित छह जनों के नाम शामिल हैं।

भगवान का भोग, 'जीम गए' मंत्री-अफसर

जयपुर। जिस देवस्थान निधि के धन से मंदिरों की व्यवस्था व भगवान के भोग-राग की व्यवस्था की जानी थी, उस राशि से विभाग के मंत्री व अफसरों के लिए गाडियां, कम्प्यूटर, ब्रॉड बैण्ड कनेक्शन, स्टेशनरी, आलमारियां और अन्य उपकरण खरीद लिए गए।
विभाग के अफसरों ने इस राशि का जमकर मनमाना उपयोग किया। वित्त विभाग की ओर से देवस्थान विभाग की गत छह साल की स्पेशल ऑडिट में यह खुलासा करते हुए 1.58 करोड रूपए की गडबडियों का जिक्र किया गया है।
इस ऑडिट रिपोर्ट मेंं तत्कालीन देवस्थान राज्यमंत्री, प्रमुख देवस्थान सचिव व अन्य अफसरों से करीब 16.50 लाख रूपए की वसूली की सिफारिश की है। देवस्थान मंत्री बृजकिशोर शर्मा के निर्देश पर वित्त विभाग ने 2003 से 2008 तक सहायक आयुक्त कार्यालय की स्पेशल ऑडिट की है। पूर्ववर्ती भाजपा शासनकाल की इस अवधि में उषा पूनिया देवस्थान राज्यमंत्री थीं।
रिपोर्ट के अनुसार देवस्थान निधि नियमों के तहत केवल राजकीय व आत्मनिर्भर श्रेणी के मंदिरों की व्यवस्था, रख-रखाव व भगवान के भोग-राग पर ही राशि खर्च की जा सकती है, लेकिन ऑडिट अवधि में जम कर नियम विरूद्ध मनमाना खर्चा किया गया।
खजाने में जमा नहीं करवाए 55 लाख रिपोर्ट के अनुसार विभाग में गडबडी का आलम यह था कि अफसरों ने अपने मनमाने खर्च के लिए करीब 55 लाख रूपए सरकारी खजाने (पीडी एकाउण्ट) में जमा ही नहीं करवाए। यह राशि मन्दिरों की सम्पत्ति के किराये, भेंट आदि के रूप में मिली थी। ऑडिट अवधि में विभाग को 1.31 करोड राशि मिली थी, लेकिन 55 लाख रूपए रख कर पीडी एकाउण्ट में 76 लाख ही जमा करवाए गए। ऑडिट रिपोर्ट में टिप्पणी की गई है कि कार्यालय में इतनी राशि रखने से गबन की आशंका रहती है और यह राशि सीधे खर्च करना गम्भीर अनियमितता है।
विभाग के पी.डी. खाता पास-बुक व रोकड बही में भी बडा अन्तर है। इस अनियमितता के लिए सहायक आयुक्त प्रथम को जिम्मेदार ठहराया गया है। कर्मचारियों के सीपीएफ के 60 हजार रूपए भी खातों में जमा नहीं करवाए गए। रिपोर्ट में इसके लिए जरूरी कार्रवाई की सिफारिश की गई है।
मनमानियां-गडबडियां* राज्यमंत्री, प्रमुख सचिव व अन्य अफसरों ने नियम विरूद्ध 17.28 लाख रूपए की यात्राएं किराये के वाहनों में की। वसूली की सिफारिश।* प्रमुख सचिव व सहायक आयुक्त के लिए 9.69 लाख रूपए की दो गाडियों की खरीद, इनकी मरम्मत पर 5.04 लाख रूपए खर्च। गाडियों की लॉग बुक का संधारण भी नहीं।* निधि से 3.42 लाख रूपए का फर्नीचर, फोटो स्टेट मशीन, साइबर शॉट कैमरे खरीदे गए।* कम्प्यूटर, कलर प्रिंटर, स्टेशनरी खरीद तथा फोटोस्टेट पर 8.55 लाख रूपए खर्च।* काफी सामान आयुक्तालय से सचिवालय भेजा गया, जिसकी रसीद तक नहीं।* 2.16 लाख रूपए का अनियमित कार्यालय व्यय* राज्यमंत्री, प्रमुख सचिव व उप सचिव के लिए 3 लाख रूपए की स्टेशनरी खरीद व 9.14 लाख रूपए ऑपरेटर सहित कम्प्यूटर का अनियमित भुगतान।