Thursday, September 9, 2010

संघ के 'मुंडा तीर' से आडवाणी पस्त

झारखंड में जेएमएम के साथ बीजेपी गठबंधन के घोर विराधी रहे बीजेपी के वरिष्ठ नेता लाल कृष्ण
आडवाणी पार्टी प्रेजिडेंट नितिन गडकरी से खासा नाराज हैं। आडवाणी खेमे से आ रही खबरों के मुताबिक, आडवाणी आज अर्जुन मुंडा के शपथ समारोह में शामिल नहीं होंगे। सूत्रों से मिली जानाकारी के मुताबिक, जिस तरह पार्टी प्रेजिडेंट नितिन गडकरी ने झारखंड में सरकार बनाने के निर्णय से आडवाणी को दूर रखा, उससे पार्टी में साफ संदेश गया कि अब पार्टी के अहम निर्णय में अब आडवाणी को महत्व नहीं दिया जाएगा। वैसे, अर्जुन मुंडा के शपथ समारोह में खास तौर पर शामिल होने के लिए पार्टी प्रेजिडेंट बीती रात अपने रूस दौर से लौट आए हैं। गौरतलब है कि जेएमएम के साथ सरकार बनाने के निर्णय पर नितिन गडकरी ने पार्टी पार्लियामेंट बोर्ड जिसके चेयरमैन आडवाणी है, से कोई सलाह-मश्विरा नहीं किया। उनका यह निर्णय नागपुर की आरएसएस लॉबी के चलते लिया गया है, वहीं बीजेपी में उनके इस निर्णय का समर्थन पूर्व पार्टी प्रेजिडेंट राजनाथ सिंह कर रहे हैं।
सू्त्रों से मिली जानकारी के अनुसार, संघ झारखंड में ज्यादा दिनों तक प्रेजिडेंट रूल या फिर वहां कांग्रेस शासन को बिल्कुल नहीं चाहता है। संघ के वरिष्ठ अधिकारियों का मानना है कि झारखंड में चर्च के विस्तार पर अंकुश लगाने और धर्मांतरण को रोकने के लिए शिबू सोरेन को समर्थन देना संघ के दीर्घकालीन उद्देश्य को पूरा करने में फायदेमंद है। गौरतलब है कि देश में धर्मांतरण को रोकना संघ का दीर्घकालीन एजंडा है। संघ का साफ तौर पर मानना है कि भारत को अगर हिंदू राष्ट्र बनाना है तो उसे किसी भी कीमत पर देश में धर्मांतरण रोकना ही होगा। धर्मांतरण की वजह से पूर्वोत्तार भारत के राज्यों का जिस तरह से इसाईकरण हुआ है संघ नहीं चाहता कि वही हालात झारखंड में बने। उल्लेखनीय है कि आदिवासी बहुल इस राज्य में हाल में जिस तरह से कांग्रेस के समर्थन से चर्च और मिशनरियों का जिस तरहविस्तार हुआ है उसने संघ को चिंता में डाल दिया है। बीजेपी के जेएमएम के साथ सरकार चलाने के कड़वे अनुभव पर संघ ने गडकरी को कहा है कि बड़े उद्देश्य के लिए कभी-कभी कड़वा घूंट भी पीना पड़ता है।




1 comment:

मिहिरभोज said...

ये वर्ड वैरिफिकेशन हटाओ तबही हम कंमैंट लिखेंगे