Thursday, July 9, 2009

विकास पर ज्यादा धन खर्च करें

बेंगलूरू। मुख्यमंत्री बी.एस. येडि्डयूरप्पा ने अधिकारियों को वैश्विक मंदी के मद्देनजर अनावश्यक गैर योजनागत खर्चो में कटौती करने तथा विकासपरक योजनागत कार्यक्रमों के क्रियान्वयन पर अधिक धन खर्च करने के निर्देश दिए हैं।मुख्यमंत्री मंगलवार को यहां कर्नाटक विकास कार्यक्रम समीक्षा बैठक को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा कि दूसरे राज्यों के तुलना की जाए तो प्रदेश में करों के संग्रहण की स्थिति बेहतर है। इस धन को फलप्रद कार्यक्रमों के लिए उपयोग में लाया जाना चाहिए। जो कार्यक्रम कम फलदायक हैं उनके खर्चो में कटौती करके अधिक फलदायक कार्यक्रमों में अधिक निवेश करने के मकसद से ही सरकार ने खर्च सुधार आयोग की स्थापना की है। उन्होंने कहा कि अधिकारियों को आयोग के साथ सहयोग करके अधिक महत्वपूर्ण कार्यक्रमों के लिए अधिक संसाधन मुहैया कराने में योगदान देना होगा। मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार ने अब तक दो बार मंथन बैठकें बुलाई हैं। बैठकों मे संसाधनों का प्रभावशाली सदुपयोग करने के साथ ही आय के नए स्त्रोतों को तलाशने पर विस्तार से चर्चा हुई है। यही कार्य विभागीय स्तर पर भी होना चाहिए और विकास कार्यो का प्रभावी क्रियान्वयन सुनिश्चित करने के लिए नई रणनीति बनाई जानी चाहिए। सभी विभागों को जुलाई के अंत तक नई कार्यसूची तैयार करनी होगी। योजनागत कार्यक्रमों का क्रियान्वयन चार तिमाही में समान रूप से होना चाहिए लेकिन अंतिम तिमाही में क्रियान्वयन पर अधिक बल देने की परिपाटी रही है, जिस पर रोक लगनी चाहिए। इससे निर्माण कार्य की गुणवत्ता बढ़ेगी तथा भ्र्रष्टाचार पर भी रोक लगाई जा सकेगी।मुख्यमंत्री ने बताया कि ग्रामीण विकास व पंचायत राज, आईटी बीटी, प्राथमिक व माध्यमिक शिक्षा, उच्च शिक्षा जैसे विभागों में 140 फीसदी प्रगति दर्ज की गई है जबकि पर्यटन, समाज कल्याण, कपड़ा व हथकरघा जैसे विभागों में 126 फीसदी प्रगति दर्ज की गई है। उन्होंने बताया कि जून के अंत तक योजनागत खर्च 2,651 करोड़ किया गया है, जो पिछले साल की तुलना में 65 फीसदी अधिक है।बैठक के बाद संवाददाताओं के साथ बातचीत में मुख्यमंत्री ने कहा कि पिछले बजट में घोषित नए कार्यक्रमों का क्रियान्वयन अगले चार- पांच दिनों में किया जाएगा। पिछले बजट में घोषित 65 नए कार्यक्रमों में से 50 फीसदी कार्यक्रमों को पहले ही लागू किया जा चुका है। शेष कार्यक्रमों के लिए चार-पांच दिनों में सरकारी आदेश जारी करने के साथ धन उपलब्ध कराया जाएगा। उन्होंने बताया कि राच्य में 3,389 लघु सिंचाई तालाबों पर लोगों ने अतिक्रमण कर रखे हैं इन अतिक्रमणों को जल्द हटाने के आदेश दिए गए हैं। इसी तरह बुनकरों व मछुआरों को भी 3 फीसदी ब्याज दर पर ऋण वितरित करने के अधिकारियों को निर्देश दिए गए हैं। अब से आगे अधिकारियों को एक माह में दो बार जिला स्तर पर जाकर प्रगति की समीक्षा करने को कहा गया है। मच्छरों के प्रको से फैल रहे संक्रामक रोगों की तरफ ध्यान आकृष्ट करने पर उन्होंने कहा कि इस बारे में जल्द ही अधिकारियों की बैठक बुलाकर विचार किया जाएगा।

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